ब्रिक्स नेताओं से पीएम मोदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी और ज़रूरी खनिजों का हथियार के तौर पर इस्तेमाल हमारी साझा तरक्की में बाधा डाल सकता है। इधर, ब्रिक्स वीवीआईपी डिनर में शुद्ध शाकाहारी मेन्यू पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं और राहुल गांधी ने तंज कसा है।
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी, शी जिनपिंग और अन्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने चेताया कि तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स को हथियार की तरह इस्तेमाल करना ख़तरनाक है। पीएम का यह बयान इसलिए काफी अहम है क्योंकि रेयर अर्थ मिनरल्स की प्रोसेसिंग व रिफाइनिंग में चीन का दबदबा है और वैश्विक क्षमता का क़रीब 90% चीन के पास ही है। पिछले साल अप्रैल से चीन इनके निर्यात को चुनिंदा लाइसेंस के ज़रिए जारी कर रहा है। यानी जो चीन की शर्तें मानेगा उसको निर्यात आसानी से होगा। चीन के इसी नियंत्रण का नतीजा यह हुआ है कि दुनिया में सेमीकंडक्टर, रेयर अर्थ मिनरल्स, बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े कच्चे माल की सप्लाई चेन बाधित हुई है।
इसी वजह से अहम खनिजों पर जिनपिंग के सामने पीएम की चेतावनी बेहद अहम है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि दुनिया को तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के हथियारों की तरह इस्तेमाल के खतरे को पहचानना चाहिए। उनके मुताबिक, अगर तकनीक और जरूरी खनिजों को राजनीतिक या रणनीतिक दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है तो इससे देशों की साझा प्रगति प्रभावित हो सकती है।
यह मुद्दा भारत के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि मौजूदा अर्थव्यवस्था में इलेक्ट्रिक वाहन, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण, अक्षय ऊर्जा और बैटरी जैसी कई तकनीकों के लिए अहम खनिजों की ज़रूरत होती है।
चीन का रेयर अर्थ सप्लाई चेन पर बड़ा नियंत्रण
क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर पीएम मोदी की टिप्पणी को चीन की भूमिका के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। रेयर अर्थ मिनरल्स की वैश्विक सप्लाई चेन में चीन का बड़ा दबदबा है। खासकर इन खनिजों की प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग में चीन की क्षमता दुनिया के बाकी देशों से काफी आगे है। चीन के पास क़रीब 4.4 करोड़ मीट्रिक टन रेयर अर्थ ऑक्साइड यानी आरईओ भंडार है। यह वैश्विक भंडार का लगभग 48–52% है। चीन न सिर्फ खनन बल्कि प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग में भी क़रीब 85–90% वैश्विक क्षमता नियंत्रित करता है।चीन ने अप्रैल 2025 में कुछ रेयर अर्थ मिनरल्स और उनसे जुड़े मैग्नेट्स के निर्यात पर लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू की थी। इसके बाद दुनिया भर की कंपनियों को सप्लाई को लेकर चिंता हुई। भारत में भी ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र पर इसका असर देखने को मिला।
रेयर अर्थ मैग्नेट्स इलेक्ट्रिक मोटर समेत कई तकनीकों के लिए अहम होते हैं। यही वजह है कि भारत लंबे समय से क्रिटिकल मिनरल्स के लिए अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने और दूसरे देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
सप्लाई चेन का सवाल आर्थिक नहीं, रणनीतिक भी
रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर मौजूदा विवाद ने यह दिखाया है कि वैश्विक सप्लाई चेन सिर्फ कारोबार का विषय नहीं रह गई है। अब यह राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता से भी जुड़ गई है।सेमीकंडक्टर और बैटरी से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा उपकरणों तक, कई उद्योग ऐसे हैं जहां कुछ चुनिंदा देशों की सप्लाई पर निर्भरता मौजूद है। ऐसे में किसी भी तरह का निर्यात प्रतिबंध, लाइसेंस व्यवस्था या राजनीतिक तनाव पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अपनी तकनीकी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाते हुए जरूरी खनिजों के लिए किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भर न रहे।
कोई संकट अब एक क्षेत्र तक सीमित नहीं: पीएम
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया एक-दूसरे से इतनी जुड़ी हुई है कि किसी एक हिस्से में पैदा होने वाला संकट बाकी दुनिया को भी प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि महामारी, जलवायु संबंधी आपदाओं और सप्लाई चेन में रुकावटों ने यह साबित किया है कि आज कोई संकट किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता।
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। ऐसे में ब्रिक्स देशों के लिए अपनी अर्थव्यवस्थाओं और व्यवस्थाओं को भविष्य के संकटों के प्रति अधिक मज़बूत बनाना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि संकट आने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय उसकी पहले से पहचान करना, उसके लिए तैयार रहना और समय पर कार्रवाई करना जरूरी है।
दूसरे दिन कई बड़े नेता मौजूद
पीएम मोदी के भाषण के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो समेत कई ब्रिक्स नेता मौजूद थे। भाषण से पहले नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में ब्रिक्स नेताओं ने ग्रुप फोटो भी खिंचवाई। प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन से इतर कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों का कार्यक्रम भी रखा है।
ब्रिक्स के डिनर के वेज मेन्यू पर हंगामा
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान आयोजित एक वीवीआईपी डिनर का पूरी तरह शाकाहारी मेन्यू देश में राजनीतिक विवाद का विषय बन गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत मंडपम में ब्रिक्स नेताओं और प्रतिनिधियों के लिए डिनर का आयोजन किया था। इस डिनर में मेहमानों को केवल शाकाहारी भोजन परोसा गया। कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार भारत की विविध खान-पान की संस्कृति को विदेशी मेहमानों के सामने पूरी तरह पेश नहीं कर रही है।
80 फीसदी भारतीय नॉन-वेज खाते हैं: राहुल
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि 80 फीसदी भारतीय नॉन-वेज खाते हैं। उन्होंने भारतीय नॉन-वेज खाने की तारीफ की और इसके साथ ही उन्होंने छोले-भटूरे की तस्वीर भी साझा की। हालाँकि राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में ब्रिक्स डिनर का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया, लेकिन डिनर के मेन्यू को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच उनकी पोस्ट आई है।
पवन खेड़ा ने बीजेपी पर लगाया 'खान-पान थोपने' का आरोप
कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने ब्रिक्स डिनर के मेन्यू को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी की अपनी खान-पान संबंधी पसंद को दूसरों पर थोपने की आदत पहले से ही समस्या पैदा करती रही है और अब इसे दुनिया भर से आए विदेशी मेहमानों तक भी ले जाया गया है।
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि भारत एक बेहद विविध खान-पान वाला देश है। यहां अलग-अलग राज्यों और समुदायों की अपनी भोजन परंपराएं हैं और नॉन-वेज व्यंजन भी भारतीय खान-पान का अहम हिस्सा हैं। उन्होंने पूछा कि ब्रिक्स के विदेशी मेहमानों के लिए भारत की इस विविधता को मेन्यू में जगह क्यों नहीं दी गई।