PM Modi Foreign Travel Cost- राज्यसभा में विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 2026 में पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर ₹74.59 करोड़ खर्च हुए हैं। जानिए 2021 से 2026 तक का पूरा आंकड़ा और विवरण।
पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर खर्च चर्चा में। एआई से तैयार फोटो
भारत के अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में से लगभग आधे लोग अपनी विदेश यात्रा पर 1 लाख रुपये से कम खर्च करते हैं। वहीं दूसरी ओर, वर्ष 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आधिकारिक विदेश यात्राओं का औसत खर्च प्रति घंटे लगभग ₹12.4 लाख रहा है।
गुरुवार 6 अगस्त को राज्यसभा में पेश सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 तक प्रधानमंत्री के विदेश दौरों पर कुल ₹74.59 करोड़ खर्च हुए हैं। इस दौरान उन्होंने 13 देशों में कुल 25 दिन बिताए। यदि प्रतिदिन के हिसाब से देखें, तो यह खर्च प्रति दिन लगभग ₹2.98 करोड़ बैठता है। इसमें 6 जुलाई से 11 जुलाई के बीच इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की उनकी हालिया यात्राएं भी शामिल हैं।
आम नागरिक बनाम आधिकारिक दौरा: तुलना और अंतर
फिनटेक फर्म 'वाइज़' (Wise) के एक सर्वेक्षण (एनडीटीवी द्वारा जून में रिपोर्ट की गई) के अनुसार, लगभग 50% भारतीय अंतरराष्ट्रीय यात्री अपनी विदेश यात्रा पर प्रति व्यक्ति ₹1 लाख से कम खर्च करते हैं, जबकि अधिकांश लोगों का बजट ₹50,000 से ₹1 लाख के बीच होता है।हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन दोनों आंकड़ों की सीधी तुलना नहीं की जा सकती। जहाँ एक आम यात्री का बजट केवल उसकी व्यक्तिगत उड़ानों, आवास, भोजन और खरीदारी तक सीमित होता है, वहीं प्रधानमंत्री की आधिकारिक यात्राओं में सुरक्षा व्यवस्था, साथ जाने वाला प्रतिनिधिमंडल, लॉजिस्टिक्स, आधिकारिक इंतज़ाम और कूटनीतिक प्रतिबद्धताओं का भारी खर्च शामिल होता है।
पीएम मोदी की विदेश यात्रा के खर्च पर एक नज़र
2025 में इन देशों में हुआ सबसे ज्यादा खर्च:
वर्ष 2025 के कुल ₹187 करोड़ के खर्च में कुछ प्रमुख देशों के दौरे सबसे महंगे रहे:
फ्रांस: ₹25.59 करोड़
ब्राजील: ₹17.72 करोड़
अमेरिका: ₹16.54 करोड़
सऊदी अरब: ₹15.54 करोड़
चीन: ₹10.59 करोड़
ब्रिटेन (UK): ₹9.91 करोड़संसद में सरकार का पक्ष
राज्यसभा सांसद संजय सिंह और वी. शिवदासन द्वारा 2021 से पीएम के विदेश दौरों, उन पर हुए खर्च, हस्ताक्षरित समझौतों और निवेश प्रतिबद्धताओं से संबंधित प्रश्न पूछे गए थे। इसका लिखित जवाब विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने दिया।विदेश राज्य मंत्री ने 35 पन्नों के अपने विस्तृत जवाब में पूर्ववर्ती सरकारों के दौरों के खर्च का हवाला भी दिया:
अमेरिका (2011): ₹10.74 करोड़
रूस (2013): ₹9.95 करोड़
फ्रांस (2011): ₹8.33 करोड़
जर्मनी (2013): ₹6.02 करोड़
(नोट: ये आंकड़े उस समय के वास्तविक खर्च को दर्शाते हैं, जिनमें मुद्रास्फीति या मुद्रा के मूल्य में उतार-चढ़ाव को समायोजित नहीं किया गया है।)
दौरों का महत्व और आर्थिक लाभ
विदेशों के साथ संबंधों को मजबूत करने पर जोर देते हुए विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने कहा: "प्रधानमंत्री की उच्च-स्तरीय विदेश यात्राएं विदेशी देशों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय व वैश्विक स्तर पर भारत की भागीदारी को बढ़ावा देने का एक स्थापित माध्यम हैं। ये यात्राएं तकनीक, नवाचार, व्यापार व निवेश, रक्षा, ऊर्जा सहयोग और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करती हैं।"सरकार द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, जुलाई 2021 से इन यात्राओं के दौरान कुल 316 एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा, अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 की अवधि के दौरान भारत को कुल 381.8 अरब अमेरिकी डॉलर का एफडीआई (FDI) प्राप्त हुआ।