प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस की मंगलवार को दिल्ली में मुलाक़ात हुई। जब प्रधानमंत्री ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस और उनकी भारतीय मूल की पत्नी उषा के साथ उनके तीन बच्चों का गर्मजोशी से स्वागत किया, तो यह सिर्फ़ एक राजनयिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि यह दो देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक सहयोग को मज़बूत करने का एक मौक़ा भी था। दोनों नेताओं ने व्यापार समझौते की राह प्रशस्त की। लेकिन क्या यह मुलाकात वाक़ई में 'विकसित भारत' और 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' के सपनों को साकार कर पाएगी, या इसके रास्ते में अनदेखी चुनौतियाँ छिपी हैं?

इसे समझने से पहले यह जान लें कि आख़िर दोनों नेताओं की मुलाक़ात के बाद क्या कहा गया है। पीएम मोदी ने मुलाक़ात को लेकर कहा है, 'नई दिल्ली में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनके परिवार का स्वागत करके खुशी हुई। हमने मेरी अमेरिका यात्रा और राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ मुलाक़ात के बाद तेज़ी से हुई प्रगति की समीक्षा की। हम व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा, ऊर्जा और लोगों के मेलजोल सहित पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी हमारे लोगों और विश्व के बेहतर भविष्य के लिए 21वीं सदी की एक निर्णायक साझेदारी होगी।'

जेडी वेंस की भारत यात्रा 21 से 24 अप्रैल तक तय है। इसमें दिल्ली के साथ-साथ जयपुर और आगरा में सांस्कृतिक और राजनयिक कार्यक्रम शामिल हैं। वेंस ने सोमवार को दिल्ली में स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर का दौरा किया और वहाँ के आतिथ्य की प्रशंसा की। भारतीय मूल की उनकी पत्नी उषा वेंस और उनके बच्चों ने पारंपरिक भारतीय परिधानों में भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इसे सोशल मीडिया पर खूब सराहना मिली।

इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को तेजी से अंतिम रूप देना है। ख़ासकर तब जब ट्रम्प ने 2 अप्रैल को भारत पर 26% टैरिफ़ लगाया था। हालाँकि बाद में 9 अप्रैल को इस टैरिफ़ को 90 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया। इसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है। 

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प्रधानमंत्री मोदी और वेंस ने अपनी बैठक में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति की समीक्षा की और इसे दोनों देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी बताया। दोनों नेताओं ने ऊर्जा, रक्षा, और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने के प्रयासों का भी स्वागत किया।

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार हाल तक 190 अरब डॉलर तक पहुँचा था। दोनों देशों ने 2030 तक इस व्यापार को 500 अरब डॉलर तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।

पहले ट्रंप ने भारत को 'टैरिफ अब्यूज़र' और 'टैरिफ किंग' कहकर आलोचना की है, क्योंकि भारत का टैरिफ अमेरिका से काफ़ी ज़्यादा है। भारत ने पहले ही कुछ अमेरिकी सामानों पर टैरिफ़ कम किया है और इस समझौते के तहत और बड़ी कटौती की संभावना है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस सप्ताह क्षेत्र-विशिष्ट व्यापार चर्चाएँ होंगी, जिनका लक्ष्य मई 2025 तक बातचीत को समेटना हो सकता है। भारत ने साफ़ किया है कि वह जल्दबाजी में या बंदूक की नोक पर समझौता नहीं करेगा और कोई भी समझौता भारत की चिंताओं को ध्यान में रखकर ही होगा।

व्यापार के अलावा मोदी और वेंस ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। इसमें क्वाड गठबंधन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की रणनीतियाँ शामिल हैं।

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दोनों नेताओं ने रक्षा साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की। इस साल की शुरुआत में ट्रंप ने भारत को एफ़-35 स्टील्थ फाइटर जेट की पेशकश की थी और फ़रवरी में मोदी-ट्रम्प की मुलाक़ात में मिसाइल प्रौद्योगिकी पर सहयोग की बात हुई थी। अमेरिका ने भारत को 'मेजर डिफेंस पार्टनर' और 'स्ट्रैटेजिक ट्रेड ऑथराइजेशन-1' का दर्जा दिया है, जो इसे NATO सहयोगियों के समकक्ष रखता है।


दोनों देशों ने ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, और AI जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया। अमेरिकी कंपनियाँ भारत में लैपटॉप, टैबलेट, और मोबाइल जैसे उपकरणों की उत्पादन लाइन बढ़ाने की योजना बना रही हैं, ताकि चीन पर निर्भरता कम की जा सके।

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जेडी वेंस की यात्रा और व्यापार समझौते में प्रगति भारत-अमेरिका संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ को दिखाती है। यह मुलाकात कई कारणों से अहम है। अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध और ट्रम्प के टैरिफ ने भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार के रूप में उभारा है। वेंस की यात्रा ट्रम्प प्रशासन की भारत के साथ संबंधों को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता को दिखाती है।

व्यापार समझौता भारत को टैरिफ के दबाव से राहत दे सकता है और अमेरिकी निवेश को बढ़ावा दे सकता है, विशेष रूप से मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में। हालांकि, भारत को अपने कृषि और डेयरी क्षेत्र के हितों की रक्षा के लिए सावधानी बरतनी होगी। यह यात्रा ट्रम्प के इस साल के अंत में भारत दौरे और क्वाड शिखर सम्मेलन की आधारशिला रखती है। माना जा रहा है कि मोदी और ट्रम्प के बीच व्यक्तिगत तालमेल इस साझेदारी को और मज़बूत करता है।