PM मोदी ने SRCC कॉलेज में राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। पीएम मोदी वहां जेन ज़ी के बीच ‘दिमागी नक्सल’, ‘झूठ की गूंज’ और ‘माई-बाप संस्कृति’ जैसे जुमले उछालते रहे। राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज छेड़ा है। यह प्रोग्राम भी उसी तर्ज पर था।
पीएम मोदी शनिवार 5 सितंबर को दिल्ली के एसआरसीसी कॉलेज में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में जेन ज़ी को संबोधित करने गए थे। लेकिन वहां उनके दिमाग़ में नेता विपक्ष राहुल गांधी के छाये हुए थे और पूरा भाषण चुनावी अंदाज में राहुल और बाकी विपक्ष पर हमले में बीता। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने हालिया स्वतंत्रता दिवस भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को फिर दोहराया और कहा कि लाल किले से उन्होंने इस नाम की जैसे ही ‘होम्योपैथी की गोली’ दी, वैसे ही देश में मौजूद ‘दिमागी नक्सल’ एक-एक करके सामने आने लगे।
मोदी ने कांग्रेस के छात्र संवाद अभियान ‘छात्रों की गूंज’ पर भी तंज कसते हुए उसे ‘झूठ की गूंज’ करार दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि ‘‘सच की हुंकार के आगे झूठ की गूंज टिक नहीं सकेगी।’’
प्रधानमंत्री के मुताबिक, ‘‘जैसे ही मैंने दिमागी नक्सल वाली होम्योपैथी की गोली दी, सारे दिमागी नक्सल निकल-निकलकर बाहर आने लगे और जो इस बीमारी को बढ़ावा दे रहे हैं, अब जनता उनका भी असली रंग देख रही है।’’ यह बयान प्रधानमंत्री के 15 अगस्त के भाषण से जुड़ा है। स्वतंत्रता दिवस पर मोदी ने कहा था कि हथियारबंद नक्सलवाद को कमजोर किया गया है, लेकिन ‘‘मानसिक नक्सल’’ अब भी मौजूद हैं और समाज को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने और युवाओं को विकसित भारत की मुख्यधारा से जोड़ने की बात कही थी।
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान पर तंज
प्रधानमंत्री मोदी ने राहुल गांधी और कांग्रेस के छात्र संवाद कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ को भी अपने निशाने पर लिया। यह अभियान छात्रों के बीच परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा की बढ़ती लागत, सरकारी भर्तियों में कथित अनियमितताओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दे उठाने के लिए चलाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह अभियान राजस्थान के कोटा, उत्तराखंड के देहरादून, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और महाराष्ट्र के पुणे समेत कई स्थानों पर आयोजित किया जा चुका है।मोदी ने इस अभियान के नाम पर तंज कसते हुए कहा कि ‘छात्रों की गूंज’ नहीं, बल्कि ‘झूठ की गूंज’ है। उन्होंने कहा कि वे जानते हैं कि ‘‘सच की हुंकार के आगे झूठ की गूंज टिक नहीं सकेगी।’’ यह टिप्पणी सीधे तौर पर कांग्रेस और राहुल गांधी के राजनीतिक अभियान पर निशाने के तौर पर देखी जा रही है।
माई बाप कल्चर का नया जुमला उछालाः प्रधानमंत्री ने कांग्रेस की राजनीति पर हमला करते हुए ‘माई-बाप संस्कृति’ को उससे जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि वह ऐसी राजनीति के सामने चट्टान की तरह खड़े हैं। बता दें यहां पर माई-बाप से मतलब गॉड फादर से है। और यह जुमला हर सरकार में, हर संस्थान में अक्सर बोला जाता है। मोदी ने अपने 2013 के SRCC भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ की बात की थी। उनके अनुसार, उस समय के राजनीतिक माहौल में कई लोगों को यह विचार असंभव लगता था, लेकिन आज ‘मेक इन इंडिया’ की ब्रांड वैल्यू दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि उन्हें अपने पुराने दावों और आज की स्थिति के बीच तुलना करने का साहस है और इसलिए वे 2013 में SRCC में कही गई बातों को याद दिला रहे हैं।
‘नाराज फूफा’ वाला तंज भी कसा
प्रधानमंत्री ने सरकार की योजनाओं और परियोजनाओं का विरोध करने वालों के लिए एक और व्यंग्यात्मक शब्द का इस्तेमाल किया—‘नाराज फूफा’। उन्होंने कहा कि कैंपस से बाहर छात्रों को दो तरह के लोग मिलेंगे। एक वे, जो समाज की ताकत को राष्ट्र की ताकत में बदलने में सकारात्मक भूमिका निभाते हैं। दूसरे वे, जो कोई भी काम शुरू होते ही ‘नाराज फूफा’ बन जाते हैं और हर चीज का विरोध करते हैं।मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि जब दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाई गई तो ऐसे लोगों ने पूछा कि इसकी क्या जरूरत है। हाई-स्पीड ट्रेन शुरू करने, UPI लाने और नए संसद भवन के निर्माण के समय भी उन्होंने कथित विरोध का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन सभी सवालों का जवाब भारत ने अपने काम से दिया है और देश को जो जरूरी है, उसे करने से कोई रोक नहीं सकता।
2013 के भारत की तस्वीर पेश कर कांग्रेस पर हमला
मोदी ने अपने 2013 के SRCC दौरे को याद करते हुए तत्कालीन यूपीए सरकार के कार्यकाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस समय वह गुजरात के मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ विपक्षी दल के नेता थे, लेकिन उन्होंने SRCC के मंच का इस्तेमाल तत्कालीन केंद्र सरकार पर हमला करने के लिए नहीं किया था। उनके अनुसार, उन्होंने उस समय आरोप लगाने के बजाय अपना विजन सामने रखा था। हालांकि उनका गुजरात का कार्यकाल 2002 के भीषण दंगों के लिए भी जाना जाता है।मोदी ने कहा कि उस समय देश में ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ की चर्चा थी और भारत को दुनिया के ‘फ्रैजाइल फाइव’ देशों में गिना जाता था। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में आतंकवाद और पाकिस्तान की चुनौती को लेकर भी निराशा का माहौल था।
पाकिस्तान को भी चेतावनी
SRCC में प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान को भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान भारत में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश करता है तो भारतीय सशस्त्र बल उसकी सीमा के भीतर जाकर जवाब देंगे। मोदी ने कहा कि ‘‘घर में घुसकर मारते हैं’’ और अगर पाकिस्तान ने कोई दुस्साहस किया तो भारतीय सेना उसके इलाके में जाकर कार्रवाई करेगी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में शांति बढ़ने का दावा करते हुए कहा कि माओवादी आतंकवाद और नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है।मोदी के भाषण का राजनीतिक संदेश क्या है?
प्रधानमंत्री का SRCC संबोधन केवल कॉलेज की शताब्दी का कार्यक्रम नहीं रहा। भाषण का एक बड़ा हिस्सा मौजूदा राजनीतिक टकराव और विपक्ष पर हमले के इर्द-गिर्द रहा।
- एक तरफ मोदी ने अपने 2013 के भाषण और उस समय के भारत की आर्थिक स्थिति को आज के भारत से जोड़कर अपनी सरकार के प्रदर्शन का दावा किया, तो दूसरी तरफ उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी की छात्र राजनीति को ‘झूठ की गूंज’ कहकर निशाना बनाया। पूरे भाषण में राहुल गांधी और कांग्रेस का असर दिखाई दे रहा था। इधर पीएम मोदी लगातार राहुल को निशाना बना रहे हैं।
- इसी क्रम में उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ जैसे राजनीतिक जुमलों का इस्तेमाल किया। इससे उनका संदेश स्पष्ट तौर पर विपक्ष यानी खासतौर पर कांग्रेस और सरकार के आलोचकों को निशाना बनाने वाला रहा।
- SRCC में उनका यह कार्यक्रम ऐसे समय हुआ है जब कांग्रेस भी छात्रों और युवाओं के बीच बेरोजगारी, भर्ती, परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर अभियान चला रही है। राहुल गांधी के अभियान छात्रों की गूंज की तर्ज पर यह कार्यक्रम था।
- पीएम मोदी के भाषण से साफ हो गया कि राहुल गांधी फैक्टर पीएम मोदी को कहीं न कहीं परेशान कर रहा है।