प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए ग्लोबल अर्थव्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर दुनिया के मौजूदा संकटों का तुरंत हल नहीं निकाला गया तो पिछले कई दशकों की गरीबी खत्म करने की उपलब्धियां धुल जाएंगी और दुनिया की बड़ी आबादी दोबारा गरीबी में धकेल दी जाएगी।
नीदरलैंड्स की राजधानी हेग में भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “पहले कोरोना आया, फिर युद्ध शुरू हो गए और अब ऊर्जा संकट है। यह दशक दुनिया के लिए आपदाओं का दशक बनता जा रहा है।” पीएम मोदी अपने पांच देशों के यूरोपीय दौरे के दूसरे चरण में नीदरलैंड्स पहुंचे हैं। उन्होंने वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे संघर्षों, खासकर अमेरिका और इसराइल के ईरान पर हमलों के बाद पैदा हुए संकट का हवाला दिया। ईरान द्वारा होर्मुज बंद करने से वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, जहां से दुनिया के तेल व्यापार का करीब 20% तेल गुज़रता है।
उन्होंने इस दशक को कोविड महामारी, युद्धों और ऊर्जा संकट की वजह से ‘आपदा दशक’ करार दिया। मोदी ने विदेश में भारतीयों के बीच इस तरह का भाषण पहली बार दिया है। उन्होंने एक बार भी भारतीय अर्थव्यवस्था की चिन्ताजनक हालत का जिक्र नहीं किया। न ही भारतीय करंसी के डॉलर के मुकाबले गिरने का कोई उल्लेख किया। लेकिन पूरी दुनिया के हालात खराब होने को लेकर चिन्ता जरूर जताई।

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यूरोपीय दौरे से ठीक पहले हैदराबाद में 10 मई को प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीयों से फिजूलखर्ची रोकने और बचत करने की अपील की थी। उन्होंने घर से काम (Work from Home) करने, विदेश यात्राएं नहीं करने और गोल्ड की खरीदारी एक साल तक नहीं करने की सलाह दी। मोदी ने ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाना ‘देशभक्ति’ बताया।
उन्होंने सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल, कारपूलिंग और कम खाद इस्तेमाल करने को बढ़ावा देने की बात कही। कोविड काल का हवाला देते हुए कहा कि उस समय रिमोट वर्क सामान्य हो गया था और अब सरकार इसे डिमांड प्रबंधन का अस्थायी उपाय मान रही है। मोदी ने कहा कि “हमें केवल उतना ही इस्तेमाल करना चाहिए जितना जरूरी है, ताकि विदेशी मुद्रा बचाई जा सके और युद्ध संकट के प्रतिकूल प्रभावों को कम किया जा सके।” उनकी अपील का असर हुआ। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कम खाना बनाने की सलाह दे डाली। बिहार के सीएम अपने सरकार आवास से विधानसभा पैदल जाने लगे। कई जज साइकलों से अदालत पहुचने लगे। अमित शाह ने अपने काफिले की गाड़ियां घटा दीं। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ईरिक्शा में मंत्रालय आने जाने लगे। दिल्ली के मंत्री मेट्रो में सफर करते दिखे। लेकिन ये सारी गतिविधियां सिर्फ फोटो खिंचाने तक सीमित हैं।

सोशल मीडिया पर उड़ रहा मजाक

सोशल मीडिया पर पीएम मोदी और उनकी पार्टी के नेताओं, सरकार की बचत गतिविधियों का मजाक उड़ रहा है। लोग सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर अपनी बात लिख रहे हैं। राजस्थान में बीजेपी सरकार है। जयपुर का वीडियो वायरल है। वहां पुलिसकर्मियों को साइकल पर शहर में सुरक्षा जायजा लेते देखा गया। लोगों ने सोशल मीडिया पर पूछा कि अपराधी अगर वाहन से अपराध करने आए तो जयपुर पुलिस उनका पीछा क्या साइकल से करेगी। इसी तरह मोदी की मौजूदा विदेश यात्रा का औचित्य पूछा जा रहा है। पीएम मोदी ने यूएई से एलपीजी और पेट्रोल का सौदा किया है। जबकि ईरान युद्ध में यूएई पर भी हमले हुए और उसका काफी नुकसान हुआ है। वो भारत को पेट्रोल और एलपीजी सप्लाई करने की स्थिति में है या नहीं, समझौते के दौरान इस बात को साफ नहीं किया गया।
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पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ

15 मई को मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए। सरकारी तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) ने ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। दिल्ली में पेट्रोल ₹97.77 प्रति लीटर और डीजल ₹90.67 प्रति लीटर हो गया। देश के अन्य हिस्सों में स्थानीय करों के अनुसार अधिक है। हालांकि पांच राज्यों के चुनाव के दौरान नेता विपक्ष राहुल गांधी कह रहे थे कि चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल डीजल मंहगा हो जाएगा। लेकिन सरकार राहुल गांधी के बयानों का खंडन कर रही थी। लेकिन अब सच सामने आ गया।
प्रधानमंत्री मोदी के नीदरलैंड में दिए गए भाषण से एक बार फिर देश के लोगों का ध्यान खराब होती आर्थिक स्थिति, बढ़ती महंगाई और गिरते रुपये पर गया है। देश के औद्योगिक शहरों में मजदूर आंदोलन करने सड़क पर उतरते हैं तो उसे कुचल दिया जाता है और आंदोलनकारी मजदूरों को माओवादी या पाकिस्तानी एजेंट बता दिया जाता है। हाल ही में नोएडा के मजदूर आंदोलन को इसी तरह बदनाम किया गया था।