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फोर्स फॉर गुड के रूप में और मजबूत होगी क्वाड की छवि: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को जापान के टोक्यो में क्वाड देशों के नेताओं की बैठक में भाग लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि क्वाड इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए एक कंस्ट्रक्टिव एजेंडा लेकर चल रहा है और इससे क्वाड की छवि फोर्स फॉर गुड के रूप में और भी मजबूत होती जाएगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड-19 की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमने वैक्सीन डिलीवरी, डिजास्टर रिस्पांस और आर्थिक सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में आपसी समन्वय बढ़ाया है। 

उन्होंने कहा कि इससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, समृद्धि और स्थिरता सुनिश्चित हो रही है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में जापान के प्रधानमंत्री को बेहतर आतिथ्य के लिए धन्यवाद भी दिया। 

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क्वाड के देशों की यह बैठक ऐसे वक्त में हुई है जब भारत के चीन के साथ रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं। गलवान में हुई हिंसक झड़प के बाद से ही दोनों देशों के रिश्ते सुधर नहीं सके हैं। इसके साथ ही रूस और यूक्रेन के युद्ध के कारण भी वैश्विक स्तर पर माहौल तनावपूर्ण है। 

क्वाड शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, जापानी प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा और ऑस्ट्रेलिया के नव-निर्वाचित प्रधान मंत्री एंथनी अल्बनीज भी शामिल हुए हैं। 

क्या है क्वाड?

चार देशों भारत, अमेरिका, आस्ट्रेलिया और जापान के समूह को क्वाड नाम दिया गया है। 12 नवम्बर, 2017 को मनीला में आसियान शिखर बैठक के दौरान पहली बार चीन के रुख से परेशान चार ताक़तवर देशों के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों की बैठक के दौरान क्वाड यानी क्वाड्रीलेटरल डायलॉग की नींव डाली गई थी तो इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय सामरिक हलकों में काफी अटकलें लगी थीं। 

कहा गया था कि चार देश अमेरिका, भारत, जापान और आस्ट्रेलिया चीन के ख़िलाफ़ लामबंद हो रहे हैं।

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टोक्यो की अपनी दो दिवसीय यात्रा के पहले दिन भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा था कि भारत और जापान 'स्वाभाविक साझेदार' हैं और जापानी निवेश ने भारत की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने आगे कहा कि जापान के साथ भारत के संबंध आध्यात्मिकता, सहयोग और अपनेपन के हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने हमेशा हर समस्या का समाधान खोजा है, चाहे वह कितनी भी बड़ी क्यों न हो। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान जब अनिश्चितता का माहौल था, भारत ने अपने करोड़ों नागरिकों को 'मेड इन इंडिया' टीकों की आपूर्ति की और इसे 100 से अधिक देशों में भी भेजा

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