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प्रशांत भूषण अवमानना केस: 21 नेताओं ने कहा- बोलने की आज़ादी की रक्षा ज़रूरी

सुप्रीम कोर्ट अवमानना मामले में 1500 से ज़्यादा वकीलों और बार एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के बाद अब अलग-अलग राजनीतिक दलों के कम से कम 21 नेताओं ने प्रशांत भूषण के प्रति समर्थन जताया है। उन्होंने बयान जारी कर इस पर निराशा जताई है कि न्याय देने में आ रही दिक्कतों और लोकतांत्रिक संस्थाओं में गिरावट को लेकर उनके दो ट्वीट पर अवमानना की कार्रवाई की गई। उनकी यह प्रतिक्रिया तब आई है जब 20 अगस्त को सज़ा सुनाई जानी है और इस दौरान प्रशांत भूषण के समर्थन में प्रदर्शन होने की संभावना है।

बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, लोकतांत्रिक जनता दल के नेता शरद यादव, नेशनल कॉन्फ़्रेंस के फारूक अब्दुल्ला, कांग्रेस के शशि थरूर, सीपीएम नेता सीताराम येचुरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, सीपीआई नेता डी राजा सहित जनता दल यूनाइटेड, समाजवादी पार्टी आदि दलों के कई नेता शामिल हैं। 

नेताओं के इस बयान को प्रशांत भूषण ने ट्वीट किया है। 

नेताओं के इस बयान में कहा गया है, 'यह दुखद है कि माननीय न्यायालय ने यह ज़रूरी नहीं समझा कि रचनात्मक आलोचना और दुर्भावनापूर्ण बयान में अंतर करे। हम ऐसे एप्रोच के लिए वैध आधार को समझ नहीं पा रहे हैं क्योंकि यह एक आम व्यक्ति के लिए अपनी नागरिकता के उस दायित्व को निभाने में बाधा खड़ी करेगा जो दायित्व हमारे लोकतांत्रिक गणतंत्र के बारे में तथ्यपरक अभिव्यक्ति देने के रूप में है।' उन्होंने बयान में यह भी कहा है कि हमारा विश्वास है कि बोलने की आज़ादी की रक्षा की जाए और इसको बढ़ावा दिया जाए क्योंकि हमारे युवा लोकतंत्र में अलग-अलग नज़रिये की विविधता और सभी संस्थाओं के सार्थक होने के लिए मुस्तैदी ज़रूरी है। 

इससे पहले बार एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया ने भी गहरी चिंता जताई है। इस मामले में इसने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा है कि जैसे यह अवमानना कार्रवाई की गई है उससे संस्था की प्रतिष्ठा बने रहने से ज़्यादा नुक़सान पहुँचने की संभावना है। इसने कहा है कि कुछ ट्वीट से सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा को नुक़सान नहीं पहुँचाया जा सकता है। बार एसोसिएशन ने बयान में कहा है कि जब कोर्ट ने इस मामले को संज्ञान में लिया था तब इसने अपना पक्ष सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया था, लेकिन ग़लती से सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इसे शामिल नहीं किया। एसोसिएशन ने कहा है कि उसमें बार के बोलने की ड्यूटी से जुड़ी धारा का भी उल्लेख था। उसमें कहा गया है, 'न्यायपालिका, न्यायिक अधिकारियों व न्यायिक आचरण से संबंधित संस्थागत और संरचनात्मक मामलों पर टिप्पणी करना सामान्य रूप से न्याय प्रशासन और एक ज़िम्मेदार नागरिक के तौर पर भी वकीलों की ड्यूटी है।' 
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इससे पहले सुप्रीम कोर्ट अवमानना मामले में दोषी ठहराए गए प्रशांत भूषण के समर्थन में बार के वरिष्ठ सदस्य सहित देश भर के 1500 से ज़्यादा वकील सामने आए। उन्होंने प्रशांत भूषण के पक्ष में बयान जारी किया है और कोर्ट से अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है ताकि 'न्याय की हत्या' न हो। बयान में वकीलों ने कहा कि 'अवमानना ​​के डर से खामोश' बार से सुप्रीम कोर्ट की 'स्वतंत्रता' और आख़िरकर 'ताक़त' कम होगी। प्रशांत भूषण के ख़िलाफ़ अवमानना के दो मामले चल रहे हैं। एक मामला है सुप्रीम कोर्ट और पिछले चार जजों पर ट्वीट को लेकर और दूसरा मामला है 2009 में सुप्रीम कोर्ट के 16 में से आधे मुख्य न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने का। ट्वीट वाले ताज़ा मामले में प्रशांत भूषण को दोषी ठहराया गया है और 20 अगस्त को सज़ा सुनाई जानी है, जबकि दूसरे मामले में अभी सुनवाई जारी है।
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जिस मामले में प्रशांत भूषण को दोषी ठहराया गया है वह उनके दो ट्वीट से जुड़ा मामला है। एक ट्वीट में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट व भारत के पिछले 4 मुख्य न्यायाधीशों का ज़िक्र किया था और आरोप लगाया था कि उन्होंने लोकतंत्र को बचाने के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन के दौरान अदालतों को बंद रखने के लिए मुख्य न्यायाधीश बोबडे की आलोचना की थी। इस ट्वीट में एक फ़ोटो में सीजेआई बोबडे हार्ले डेविडसन बाइक पर बैठे नज़र आए थे।
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