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रमज़ान: उलेमा बोले- लॉकडाउन का सख़्ती से करें पालन, घर पर ही करें इबादत

देश में फिलहाल 3 मई तक लॉकडाउन है। तेलंगाना में इसे 7 मई तक बढ़ाने का एलान कर दिया गया है। देश के बाक़ी हिस्सों में भी इसके बढ़ने के आसार हैं। ऐसे में भारत के मुसलमानों के सामने रमज़ान के दौरान इबादत का मसला खड़ा हो गया है। रमज़ान के पूरे महीने मुसलमान रोज़ा रखते हैं और सामूहिक इफ्तार का भी आयोजन होता है। रात को मसजिदों में तरावीह की विशेष नमाज़ पढ़ी जाती है। लेकिन देश में तेज़ी से फैलते कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन ने रमज़ान की इन रौनकों को फीका कर दिया है।

इसलामिक इदारों ने दिया फतवा 

देश के जाने-माने उलेमा और मुसलिम बुद्धिजीवियों ने मुसलमानों को रमज़ान के दौरान घर पर ही रहकर इबादत करने की सलाह दी है। दुनिया भर में अपनी अलग साख़ रखने वाले दारुल उलूम देवबंद और लखनऊ के नदवातुल उलूम समेत कई और इसलामिक इदारों ने फतवा जारी कर मुसलमानों से रमज़ान के दौरान लॉकडाउन का सख़्ती से पालन करते हुए घर पर ही इबादत करने को कहा है। मुसलमानों को सलाह दी गई है कि कि वे रोज़ाना की नमाज़ सामूहिक रूप से न पढ़ें। 

गले भी नहीं मिल सकेंगे

भारत में माहे रमज़ान 23 या 24 अप्रैल से शुरू होगा। इसके ठीक एक महीने बाद ईद-उल फ़ितर का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन हर शहर में ईदगाह पर ईद की विशेष नमाज़ होती है। मुसलमान एक-दूसरे के गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देते हैं। एक-दूसरे के घर जाते हैं और घर पर बनी शीर, सेंवई के साथ ही दूसरे पकवान भी खाते हैं। लेकिन कोरोना से बचने के लिए अपनाई जा रही सोशल डिस्टेंसिंग के चलते इस बार न ईद की नमाज़ होगी और न गले मिला जाएगा। शायद इतिहास में पहली बार ईद-उल फ़ितर पारंपरिक तरीक़े से नहीं मनाई जाएगी।

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मुसलमानों के लिए गाइडलाइन जारी

लॉकडाउन के चलते देश भर की सभी मसजिदें बंद हैं। भारत के मुसलिम बुद्धिजीवियों ने उलेमाओं से सलाह-मशविरा करके भारतीय मुसलमानों के लिए गाइडलाइन जारी की है, जिसकी प्रमुख बातें ये हैं - 

  • मुसलमान मसजिदों के बजाय अपने घरों में नमाज़ पढ़ें और लॉकडाउन के दौरान मसजिदों से लाउडस्पीकर के जरिये अज़ान करना भी बंद कर दें।
  • रोज़ा खोलने के बाद रात में पढ़ी जाने वाली नमाज़ और तरावीह (रोज़ा खोलने के बाद की एक अहम नमाज़) भी घरों में ही पढ़ें। 
  • मसजिदों में इफ़्तार पार्टी का आयोजन न करें। 
  • रमज़ान की ख़रीदारी के लिए घरों से बाहर न निकलें। 

दिल्ली में मुसलिम बुद्धिजीवियों की संस्था ‘इंडियन मुसलिम्स फ़ॉर इंडिया फ़र्स्ट’ ने मौलवियों-इमामों की निगरानी में ये गाइडलाइन तैयार की है। इस संस्था के एक सदस्य और आयकर विभाग के पूर्व कमिश्नर सैयद ज़फ़र महमूद कहते हैं, ‘भेदभाव करना इंसान की फ़ितरत में है। हाँ, मुसलमानों के साथ (कोरोना वायरस के फ़ैलाव को लेकर) भेदभाव हुआ है। हम सब को इस पर काबू पाने की ज़रूरत है और मुझे लगता है कि यह एक वक़्ती चीज़ है।’

इसी संस्था से जुड़े पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. क़ुरैशी कहते हैं, ‘जो लोग आम दिनों में मसजिदों में नहीं जाते, वे रमज़ान में ऐसा करते हैं। उन्हें लगता है कि इस मुबारक महीने में मसजिद नहीं गए तो गुनाह होगा। इस गाइडलाइन से उन्हें ये समझाने की कोशिश की गई है कि अगर मक्का (सऊदी अरब) में कुछ दिनों के लिए ताला लग सकता है, तो इसके सामने मसजिद तो छोटी सी चीज़ है।’

भारतीय अल्पसंख्यक आर्थिक विकास एजेंसी के अध्यक्ष एम.जे. ख़ान ने कहा, ‘यह एक बहुत ही सराहनीय क़दम है और यह दर्शाता है कि कोरोना वायरस फ़ैलने से बचाने के लिए समुदाय के नेता सार्थक क़दम उठा रहे हैं।’

सऊदी अरब की शीर्ष धार्मिक परिषद ने भी दुनिया भर के मुसलमानों से रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान मसजिदों में जाकर नमाज़ न पढ़ने की अपील की है।

परिषद ने कहा है कि मुसलमानों को जमात के साथ नमाज़ पढ़ने से बचना चाहिए। बता दें कि लॉकडाउन के चलते सऊदी अरब ने भी अपनी सभी मसजिदें बंद कर दीं हैं। जिनमें दुनिया की सबसे पवित्र कही जाने वाली मक्का का हरम शरीफ़ यानी काबा और मदीना की मसजिद नबवी भी शामिल हैं। सऊदी अरब में लॉकडाउन का सख़्ती से पालन हो रहा है।

ईरान का फरमान

ईरान की इसलामी सरकार ने भी मुसलमानों से रमज़ान के महीने में घर पर रहकर ही इबादत करने की अपील की है। ईरान की सरकार ने तो यहां तक कह दिया है कि अगर मुसलमान लॉकडाउन की वजह से रमज़ान में रोज़े न रखना चाहें तो कोई हर्ज़ नहीं। ईरान शिया बहुल देश है। शिया मुसलमानों में रमज़ान को लेकर सुन्नी मुसलमानों के मुक़ाबले कुछ लचीले नियम हैं।   

देश में कोरोना वायरस के तेज़ी से फैलने की वजह से अब मुसलिम समुदाय काफ़ी सतर्क है। देश भर की कई मसजिदों से रमज़ान के महीने में लॉकडाउन का सख़्ती से पालन करने के एलान किए जा रहे हैं।

दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मसजिद के इमाम सैयद अहमद बुख़ारी और फतेहपुरी मसजिद के इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने भी बाक़ायदा बयान जारी करके देश के मुसलमानों से रमज़ान के महीने में घर पर रहकर ही इबादत करने की अपील की है। हर शहर में बड़ी मसजिदों से इसी तरह के एलान किए जा रहे हैं। 

मुसलमानों के साथ भेदभाव 

मार्च के महीने में दिल्ली के निज़ामुद्दीन इलाक़े में तब्लीग़ी जमात के सालाना धार्मिक कार्यक्रम में हज़ारों लोग जुटे थे। इनमें से कई लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इसके बाद मीडिया के बड़े हिस्से और सोशल मीडिया में भारत में फैल रहे कोरोना वायरस के मामलों के लिए तब्लीग़ी जमात और मुसलमानों को ज़िम्मेदार ठहराया जाने लगा। इसकी वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों से मुसलमानों के साथ भेदभाव की शिकायतें आ रहीं हैं। 

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भेदभाव को लेकर मुसलिम समुदाय की तरफ से पुलिस में शिकायतें भी दर्ज कराई जा रही हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने कोरोना को लेकर मुसलमानों को बदनाम करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की घोषणा भी की है। रविवार को ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बयान दिया, ‘कोविड-19 जाति, धर्म, रंग, पंथ, भाषा या सीमाओं को नहीं देखता। इसलिए हमारी प्रतिक्रिया और आचरण में एकता और भाईचारे को प्रधानता दी जानी चाहिए। इस परिस्थिति में हम एक साथ हैं।’

 

कुछ दिन पहले अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नक़वी ने भी बाक़ायदा बयान जारी करके मुसलमानों से रमज़ान के दौरान भी लॉकडाउन का सख़्ती से पालन करने और घर पर रहकर ही इबादत करने की अपील की थी। 

सरकार, उलेमा और बुद्धिजीवियों की अपील के बाद लगता है कि मुसलिम समुदाय रमज़ान के दौरान भी लॉकडाउन का सख़्ती से पालन करेगा। वैसे भी तब्लीग़ी जमात के प्रकरण के बाद मुसलिम समुदाय दबाव में भी है। कुछ मुसलिम संगठनों ने सरकार से मई के पूरे महीने तक लॉकडाउन बढ़ाने की अपील है ताकि रमज़ान की वजह से लॉकडाउन के उल्लंघन की गुंजाइश ही ख़त्म हो जाए। 

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यूसुफ़ अंसारी
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