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रफ़ाल विमान खरीद सौदे में कब क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट ने रफ़ाल लड़ाकू विमान खरीदने के मामले में तमाम पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर दी हैं। उसने इसके साथ ही मामले की और जाँच कराने से इनकार कर दिया है। तीन अलग-अलग  याचिकाओं में कहा गया था कि सौदे की जाँच कराने से इनकार करने के फ़ैसले पर एक बार फिर से विचार किया जाए। क्या हुआ था इस मामले में, जानिए : 

2007 : यूपीए सरकार ने भारतीय वायु सेना की माँग पर 126 लड़ाकू हवाई जहाज़ खरीदने से जुड़ी निविदाएं जारी कीं। 

जनवरी, 2012 : फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एवियेशन ने सबसे कम कीमत की निविदा डाली। जिन 126 लड़ाकू जहाजों की आपूर्ति की बात कही गई थी, तय हुआ था कि उनमें से 18 जहाज़ तैयार कर फ़्लाई अवे स्थिति में फ्रांस से उड़ा कर भारत लाया जाएगा। दसॉ शेष 108 लड़ाकू जहाज़ भारत में सरकारी कंपनी हिन्दुस्तान एअरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ मिल कर बनाएगी। 

2014 : दसॉ और एचएएल ने एक समझौते पर दस्तख़त किए। बातचीत पूरी हो गई, पर अंतिम क़रार नहीं हुआ था। 

जून 2015 : रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर 126 लड़ाकू विमान खरीदने की निविदा वापस ले ली। 

अप्रैल 2015 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेरिस के दौरे पर गए और वहीं 36 रफ़ाल विमान खरीदने का एलान कर दिया। 

जनवरी 2016 : तत्कालीन फ़्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद गणतंत्र दिवस पर भारत आए, रफ़ाल विमान खरीदने के मुद्दे पर भारत और फ्रांस के बीच सहमति पत्र पर दस्तख़त हुआ। 

नवंबर 2018 : रफ़ाल विमान खरीद के मुद्दे पर लंबी सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुआई में बने खंडपीठ ने फ़ैसला सुरक्षित रखा। 

14 दिसंबर, 2018 : रफ़ाल लड़ाकू विमान खरीद मामले में कोर्ट की देखरेख में जाँच कराने की माँग की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि लड़ाकू जहाज़ की कीमत तय करना उसका काम नहीं है। 

मई, 2019 : सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और मशहूर वकील प्रशांत भूषण की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई पूरी कर फ़ैसला सुरक्षित रखा। 

अक्टूबर, 2019 : भारत को पहला रफ़ाल विमान मिला। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फ्रांस में एक कार्यक्रम में इसे स्वीकार किया। 

नवंबर, 2019 : सुप्रीम कोर्ट ने तमाम पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर दीं। 

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