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'अग्निपथ' से युवाओं के संयम की 'अग्निपरीक्षा' न लें, मोदी जी: राहुल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 'अग्निपथ' योजना की आलोचना की है। उन्होंने इस योजना में युवाओं के लिए भविष्य नहीं होने की बात कहते हुए कहा कि इसमें न तो कोई रैंक और और न ही कोई पेंशन है। इसके सहारे ही राहुल ने 'वन रैंक वन पेंशन' की याद दिलाई है। अप्रैल महीने में सैनिकों की पेंशन मिलने में देरी पर राहुल गांधी ने हमला करते हुए कहा था, "‘वन रैंक, वन पेंशन’ के धोखे के बाद अब मोदी सरकार ‘ऑल रैंक, नो पेंशन’ की नीति अपना रही है। सैनिकों का अपमान देश का अपमान है। सरकार को भूतपूर्व सैनिकों की पेंशन जल्द से जल्द देनी चाहिए।"

राहुल ने अब अग्निपथ योजना को लेकर भी कहा है कि 'सरकार का सेना के प्रति सम्मान नहीं है'। उन्होंने ट्वीट कर कहा, "देश के बेरोज़गार युवाओं की आवाज़ सुनिए, इन्हें 'अग्निपथ' पर चला कर इनके संयम की 'अग्निपरीक्षा' मत लीजिए, प्रधानमंत्री जी।"

राहुल गांधी की यह प्रतिक्रिया तब आई है जब 'अग्निपथ' योजना को लेकर बिहार में हिंसात्मक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। कई जिलों में ट्रेन कोचों में आग लगाने और सड़कों पर वाहनों में तोड़फोड़ करने के मामले आए हैं। एक जगह बीजेपी के कार्यालय में तोड़फोड़ की भी ख़बर है। गुरुवार को बिहार के जहानाबाद में छात्रों ने सड़क को जाम कर दिया और बक्सर में भी छात्र रेलवे ट्रैक पर उतर आए। 

मुंगेर, सहरसा, आरा और नवादा में भी छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया है। कैमूर में छात्रों ने एक ट्रेन में आग लगा दी है। छात्रों ने कई जगहों पर टायरों को भी जलाया है। बुधवार को भी अग्निपथ योजना के विरोध में मुजफ्फरपुर, बेगूसराय में छात्र सड़क पर उतरे थे।  

वैसे तो इस योजना को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, लेकिन युवाओं का मुख्य सवाल इस बात को लेकर है कि 4 साल के ठेके पर फौज में भर्ती देश की सुरक्षा के लिए सुखद संदेश नहीं है। चार साल की नौकरी के बाद भर्ती हुए युवाओं के भविष्य का क्या होगा?

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'अग्निपथ' योजना को लेकर आज ही कुछ घंटे पहले बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने ही कई सवाल उठाए हैं। इन सवालों को लेकर वरुण गांधी ने राजनाथ सिंह को ख़त लिखा है। उन्होंने उस ख़त में कहा है कि 'अग्निपथ' योजना को लेकर देश के युवाओं में कई सवाल हैं। 

बीजेपी सांसद ने दो पन्नों के ख़त को साझा करते हुए ट्वीट में लिखा है कि युवाओं को असमंजस की स्थिति से बाहर निकालने के लिए सरकार तुरंत योजना से जुड़े नीतिगत तथ्यों को सामने रख कर अपना पक्ष साफ़ करे।

उन्होंने लिखा है, 'सेना में 15 साल की नौकरी के बाद रिटायर हुए नियमित सैनिकों को कॉरपोरेट सेक्टर नियुक्त करने में ज़्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाते। ऐसे में 4 साल की अल्पावधि के उपरांत इन अग्निवीरों का क्या होगा? चार साल सेना में सेवा देने के दौरान इन युवकों की पढ़ाई बाधित होगी। साथ ही अन्य समकक्ष छात्रों की तुलना में ज़्यादा उम्रदराज होने के कारण अन्य संस्थानों में शिक्षा ग्रहण करने और नौकरी पाने में मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।'

उन्होंने सुरक्षा के मुद्दे को उठाते हुए कहा है, 'स्पेशल ऑपरेशन के समय सशस्त्र बलों में स्पेशलिस्ट काडर वाले सैनिकों की ज़रूरत होती है, ऐसे में महज 6 महीने की बेसिक ट्रेनिंग प्राप्त इन सैनिकों के कारण वर्षों पुरानी रेजिमेंटल संरचना बाधित हो सकती है।' उन्होंने कहा है कि इस योजना से प्रशिक्षण लागत की बर्बादी भी होगी, क्योंकि 4 साल के बाद सेना इन प्रशिक्षित जवानों में केवल 25 फ़ीसदी का उपयोग ही करेगी। वरुण गांधी ने कम सैलरी का मुद्दा भी उठाया है। 

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कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि मोदी सरकार भारतीय सेना की गरिमा, परंपरा, अनुशासन की परिपाटी से खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने कहा- 4 साल के ठेके पर फौज में भर्ती देश की सुरक्षा के लिए सुखद संदेश नहीं है। चार साल की नौकरी के बाद भर्ती हुए युवाओं के भविष्य का क्या होगा? सुरजेवाला ने सवाल किया, ‘एक तरफ पाकिस्तान की सीमा और दूसरी तरफ चीन की सीमा है तो क्या नियमित भर्ती पर पाबंदी लगाकर चार साल की ठेके की भर्ती करना देशहित में है?’ उन्होंने यह भी पूछा,‘चार साल के बाद 22 से 25 साल की उम्र में बगैर किसी अतिरिक्त योग्यता के ये युवा अपने भविष्य का निर्माण कैसे करेंगे?’
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