राहुल और प्रियंका गांधी ने प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्री बनाने के लिए पीएम मोदी पर हमला किया। प्रल्हाद जोशी ने 2018 में बिलकिस बानो के दोषियों को पहले रिहा किए जाने पर कहा था कि दोषियों ने जेल में 'काफ़ी समय' बिताया था और उनकी रिहाई का प्रावधान था।
राहुल गांधी और प्रल्हाद जोशी
अब नये शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी अपने पुराने बयानों को लेकर बड़े विवाद में फँस गए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जोशी को शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर सवाल उठाते हुए उन्हें 'रेपिस्टों का रक्षक' बताया है। हाल ही में नीट-यूजी 2026 पेपर लीक को लेकर हुए छात्र आंदोलन के बाद पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया है और प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई।
संसद परिसर के बाहर पत्रकारों से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि देश के छात्र शिक्षा व्यवस्था को लेकर आंदोलन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया है जिसने बलात्कार के दोषियों का बचाव किया था। राहुल गांधी ने कहा, 'देश के युवा शिक्षा व्यवस्था के लिए लड़ रहे हैं। इतनी लड़कियां प्रदर्शन कर रही थीं, उन पर लाठीचार्ज हुआ। ऐसे समय बीजेपी ने उस व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया जो रेपिस्टों का बचाव करता है। इससे ज्यादा शर्मनाक क्या हो सकता है?' उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि मंत्रिमंडल में कई अन्य मंत्री मौजूद थे, लेकिन फिर भी उन्होंने प्रल्हाद जोशी को चुना।
बिलकिस बानो मामले का ज़िक्र
राहुल गांधी का इशारा बिलकिस बानो गैंगरेप मामले के 11 दोषियों की समय से पहले रिहाई पर 2022 में प्रल्हाद जोशी की उस टिप्पणी की ओर था, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोषियों की रिहाई कानून और राज्य सरकार की नीति के तहत हुई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के उस फैसले को रद्द करते हुए सभी दोषियों को दोबारा जेल भेजने का आदेश दिया था।
प्रियंका ने क्या कहा?
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने संसद में कहा कि 'प्रधानमंत्री मोदी ने एक ऐसे व्यक्ति को नया शिक्षा मंत्री के पद के लिए चुना जिसने एक गर्भवती महिला के बलात्कारियों की रिहाई पर अपनी सहमति व्यक्त की।' प्रियंका ने साफ़ साफ़ कहा कि नए वाले शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बिलकिस बानो के रेपिस्ट का बचाव किया था। ये बात सुनते ही बीजेपी सांसदों और मंत्रियों ने आपत्ति की और इस बयान को ऑथेंटिकेट करने की बात करने लगे। प्रियंका संसद में मंगलवार को पब्लिक एग्जामिनेशन यानी प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान बोल रही थीं।प्रल्हाद जोशी ने आरोपों को बताया झूठ
प्रियंका गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने लोकसभा में कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने कहा, 'प्रियंका गांधी को अपने बयान देने से पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए थी। मेरे खिलाफ गलत जानकारी फैलाई जा रही है। मैं इन सभी आरोपों का खंडन करता हूं। उन्हें माफी मांगनी चाहिए और इस तरह की गलतबयानी पर कार्रवाई होनी चाहिए।' उनके बयान के दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
प्रियंका गांधी ने पूछा- 'क्या छात्र आतंकवादी थे?'
लोकसभा में चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले वह दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल गई थीं, जहां पुलिस लाठीचार्ज में घायल एक छात्रा आईसीयू में भर्ती थी। प्रियंका ने कहा कि छात्रा की मां ने उनसे कहा कि वह अब किसी नेता से मिलना नहीं चाहती, क्योंकि जो लोग उसकी बेटी की इस हालत के जिम्मेदार हैं, वे भी केवल वीडियो बनाने अस्पताल पहुंचे थे।
इसके बाद प्रियंका गांधी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, 'मैं प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से पूछना चाहती हूं कि छात्रों पर आंसू गैस, लाठीचार्ज, पेलेट गन और AK-47 का इस्तेमाल क्यों किया गया? क्या छात्र आतंकवादी थे?'प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्राओं के कपड़े तक फाड़े गए और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के अधिकार का उल्लंघन किया गया।
शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
प्रियंका गांधी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में देश में 152 पेपर लीक हुए, जिससे लगभग 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक किसी बड़े पेपर लीक माफिया को सजा नहीं मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने 2024 में एंटी-पेपर लीक कानून बनाया, लेकिन उसके बाद भी किसी मामले में दोषसिद्धि नहीं हुई।
प्रियंका ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट की कार्यवाही का जिक्र करते हुए कहा कि पहली ही सुनवाई में सीबीआई का वकील अदालत में नहीं पहुंचा, जिससे सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़े होते हैं।
छात्रों की मांगें दोहराईं
प्रियंका गांधी ने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्र केवल छह प्रमुख मांगें उठा रहे थे- बार-बार होने वाले पेपर लीक पर रोक, परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक माफिया पर सख्त कार्रवाई, जिम्मेदार मंत्री का इस्तीफा, पुलिस कार्रवाई की जांच एवं शिक्षा और शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार की रक्षा। उन्होंने कहा कि पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को शर्मनाक परिस्थितियों में इस्तीफा देना पड़ा, लेकिन उनका स्वागत 'जिंदाबाद' के नारों से किया गया।एंटी-पेपर लीक विधेयक पर चर्चा
लोकसभा में मंगलवार को एंटी-पेपर लीक कानून में संशोधन संबंधी विधेयक पर करीब 10 घंटे तक चर्चा तय की गई। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार छात्रों के हितों की रक्षा और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि 2024 में लाया गया कानून परीक्षा में गड़बड़ियों पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम था और अब उसमें और सुधार किए जा रहे हैं।
दूसरी ओर विपक्ष ने आरोप लगाया कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, समयबद्ध जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।