Rahul Gandhi education system- राहुल गांधी ने फिर से शिक्षा व्यवस्था पर हमला किया है। उन्होंने कहा कि ‘जिस पीढ़ी को आगे बढ़ाना था, वही सिस्टम उसे पीछे धकेल रहा है।’ राहुल गांधी ने छात्रों से इस मुद्दे पर राय मांगी है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली उस युवा पीढ़ी को ही निराश कर रही है, जिसे आगे बढ़ाने और बेहतर भविष्य देने के लिए यह व्यवस्था बनाई गई थी। राहुल गांधी ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से पूछा है कि आखिर उन्होंने शिक्षा व्यवस्था से उम्मीद क्यों खो दी है।
राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली की कमियों को दूर करने की शुरुआत उन्हीं लोगों की बात सुनने से होनी चाहिए, जो रोजाना इन समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
‘पेपर लीक, भारी फीस और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर’
राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि देश में पेपर लीक, बेहद महंगी फीस और जर्जर बुनियादी ढांचा छात्रों के सामने बड़ी चुनौतियां बन गए हैं। उन्होंने कहा कि लाखों युवा ईमानदारी से मेहनत करते हैं, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था उन्हें निराश करती है। राहुल गांधी के मुताबिक, शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य युवाओं को उनके भविष्य के लिए तैयार करना था, लेकिन मौजूदा स्थिति में यही व्यवस्था युवा पीढ़ी के भविष्य पर सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से सीधे सवाल करते हुए कहा कि वे अपने अनुभव साझा करें और बताएं कि आखिर उन्होंने शिक्षा प्रणाली से उम्मीद क्यों खो दी है।अनुभव, सबूत और सुझाव मांगे
राहुल गांधी ने केवल शिक्षा व्यवस्था की आलोचना करने तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने छात्रों, माता-पिता और शिक्षकों से अपने अनुभव, सबूत और सुझाव ऑनलाइन साझा करने की अपील की है। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सबसे पहले उन लोगों को सुनना जरूरी है, जो इसके कामकाज और इसकी कमियों का प्रत्यक्ष अनुभव कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि सामूहिक प्रयास के जरिए शिक्षा व्यवस्था में फिर से उम्मीद पैदा की जा सकती है।‘छात्रों की गूंज’ अभियान से जोड़कर देखा जा रहा बयान
राहुल गांधी का यह बयान उनके ‘छात्रों की गूंज’ (Chhatron Ki Goonj) अभियान के अगले चरण से पहले आया है। इस अभियान के तहत राहुल गांधी देश के अलग-अलग शहरों में छात्रों से संवाद कर रहे हैं और शिक्षा, परीक्षा, रोजगार तथा युवाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी राय सुन रहे हैं। इस अभियान का पांचवां कार्यक्रम 19 सितंबर को मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित किया जाएगा। राहुल गांधी पहले ही इस बात पर जोर दे चुके हैं कि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए देश के हर छात्र की आवाज सुनना जरूरी है।कोटा से शुरू हुआ था अभियान
‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत राहुल गांधी अब तक कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में छात्रों से संवाद कर चुके हैं। इस अभियान का पहला कार्यक्रम 17 जून को राजस्थान के कोटा में हुआ था। इसके बाद देहरादून और प्रयागराज में कार्यक्रम हुए। अभियान का पिछला कार्यक्रम 22 अगस्त को पुणे में छात्राओं के लिए आयोजित किया गया था।पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था पर पहले भी सवाल
शिक्षा व्यवस्था को लेकर राहुल गांधी इससे पहले भी लगातार केंद्र सरकार पर निशाना साधते रहे हैं। जुलाई में उन्होंने भारतीय शिक्षा प्रणाली को बेहद कठोर शब्दों में निशाना बनाते हुए इसे छात्रों और उनके परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव डालने वाली व्यवस्था बताया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से लाखों छात्रों की वर्षों की मेहनत प्रभावित होती है और छात्रों को अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव और सुधार की जरूरत बताई थी। प्रयागराज में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले भी राहुल गांधी ने पेपर लीक, रुकी हुई भर्तियों और वर्षों तक नियुक्तियों का इंतजार करने वाले युवाओं का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में युवाओं के सामने भविष्य को लेकर गंभीर संकट है।युवाओं की आवाज को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश
राहुल गांधी की ताजा अपील को उनके छात्र और युवा केंद्रित अभियान की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस नेता लगातार शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक, बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी का जोर इस बात पर है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल सरकारी फैसलों से नहीं हो सकता, बल्कि छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की वास्तविक समस्याओं और अनुभवों को भी नीति निर्माण में शामिल करना होगा। उनकी ताजा अपील का मूल संदेश यही है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की शुरुआत छात्रों की बात सुनने से होनी चाहिए। अब देखना होगा कि 19 सितंबर को इंदौर में होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्र किन समस्याओं और सुझावों को राहुल गांधी के सामने रखते हैं।