धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद अब देश के गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफ़े की मांग हो गई है। वह भी लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा। उन्होंने 20 जुलाई को जंतर मंतर प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस की बर्बरता के लिए अमित शाह को ज़िम्मेदार ठहराया। राहुल गांधी ने कहा कि या तो अमित शाह ने पुलिस कार्रवाई का आदेश दिया, जिससे वे 'दोषी' ठहराए जा सकते हैं, या फिर उन्हें पता ही नहीं था कि सड़कों पर क्या हो रहा है, जिससे वे 'अक्षम' साबित होंगे। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के पीछे यही दो संभावित कारण हो सकते हैं।

राहुल गांधी ने कहा, 'हमने सदन में पूछा कि छात्रों पर हमला किसने करवाया, ये किसके आदेश पर हुआ? छात्रों पर पैलेट गन और लीथल फोर्स का इस्तेमाल गृह मंत्री के आदेश के बिना नहीं किया जा सकता। ऐसे में दो संभावनाएं हैं- गृह मंत्री ने छात्रों को मारने का ऑर्डर दिया या गृह मंत्री को मालूम नहीं था कि छात्रों पर फायरिंग होगी। इन दोनों हालातों में गृह मंत्री अमित शाह को पद से हटाया जाना चाहिए।'

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल ने कहा, 'आज अमित शाह लोकसभा में नहीं आए, क्योंकि वे दोषी हैं। अगर दोषी नहीं होते तो.. सदन में आकर जवाब दे देते। इसलिए हम कह रहे हैं कि इन्हें गृह मंत्री के पद से हटना होगा।'
उन्होंने कहा, 'छात्रों पर हिंसा दिल्ली पुलिस और आरएएफ़ यानी रैपिड एक्शन फोर्स ने की है- ये दोनों ही गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करते हैं। मैंने 25 जुलाई को गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर पूछा था- क्या आपने छात्रों पर लीथल फोर्स इस्तेमाल करने के ऑर्डर दिए? सादे कपड़ों में छात्रों को लाठियों से मारने वाले लोग कौन थे? लेकिन सवालों का कोई जवाब नहीं मिला।'

राहुल ने कहा, 'आज नहीं तो कल, छात्रों को न्याय जरूर मिलेगा। ऐसे में मोदी सरकार को हमारी सलाह है- अमित शाह को गृह मंत्री के पद से हटाइए और दिल्ली में छात्रों पर किए गए बर्बर हमले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय कमिटी जांच करे।'

'अमित शाह को पुलिस अधिकारियों से बात करते देखा'

राहुल गांधी ने दावा किया कि उन्होंने संसद भवन के पास स्वयं अमित शाह को पुलिस अधिकारियों से बातचीत करते देखा था।

उन्होंने कहा, 'मैंने अपनी आंखों से अमित शाह को पुलिस अधिकारियों को बुलाते देखा। मैंने देखा कि जितेंद्र सिंह को अमित शाह के लगातार फोन आ रहे थे। इससे साफ़ था कि सड़क पर क्या हो रहा था, इसकी पूरी जानकारी उन्हें थी।' राहुल गांधी ने कहा कि इसी वजह से वह गृह मंत्री को पुलिस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार मानते हैं।

पैलेट गन चलाने का लगाया आरोप

राहुल गांधी ने अपने आरोप दोहराते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पैलेट गन चलाई गई। उन्होंने दावा किया कि एक छात्र की आंख की रोशनी जाने का खतरा है। राहुल गांधी ने कहा,
एक छात्र की आंख में पैलेट लगी है और उसकी आंख की रोशनी जाने की आशंका है। मैंने एम्स का मेडिकल प्रमाणपत्र देखा है, जिसमें लिखा है कि उसे पैलेट लगी थी।
राहुल गांधी
लोकसभा में विपक्ष के नेता
हालांकि सरकार और दिल्ली पुलिस पहले ही इन आरोपों से इनकार कर चुकी है।

'कीलों वाली लाठियां और शॉक बैटन का इस्तेमाल हुआ'

राहुल गांधी ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कीलों लगी लाठियों और शॉक बैटन का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि महिलाओं और नाबालिग छात्रों तक को नहीं बख्शा गया। राहुल गांधी ने सवाल उठाया, 'पुलिस को महिलाओं और नाबालिगों पर कीलों वाली लाठियां चलाने का विचार कहां से आया? मैंने खुद एक पुलिस अधिकारी को प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते देखा।'

'छात्रों के साथ हुई बर्बरता सबसे बड़ा मुद्दा'

राहुल गांधी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष होने के नाते देश के अहम मुद्दों को उठाना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ जो हुआ, वही इस समय देश का सबसे बड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए आज सबसे अहम मुद्दा यह है कि हमारे छात्रों के साथ बर्बरता हुई। वे युवा, जो सवाल पूछते हैं और खुलकर सोचते हैं, उन्हें बेरहमी से पीटा गया।'

'बीजेपी या आरएसएस से कभी माफी नहीं मांगूंगा'

राहुल गांधी ने यह भी साफ़ कर दिया कि वह लोकसभा में दिए गए अपने बयान के लिए किसी भी क़ीमत पर माफी नहीं मांगेंगे।

लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें सदन में अपनी बात पूरी करने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें यह भरोसा दिलाया गया था कि यदि वह अपने बयान पर माफी मांग लेंगे तो उन्हें आगे बोलने दिया जाएगा, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया।

राहुल गांधी ने कहा, 'मुझे बार-बार बोलने से रोका गया। राजनाथ सिंह और किरेन रिजिजू को कई बार बोलने का मौका दिया गया। मुझसे कहा गया कि अगर मैं माफी मांग लूं तो मुझे फिर बोलने दिया जाएगा। मैं बीजेपी या आरएसएस से कभी माफी नहीं मांगूंगा।'

लोकसभा में भी लगाए थे आरोप

इससे पहले लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान भी राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि छात्रों पर बल प्रयोग गृह मंत्री के निर्देश पर हुआ। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध किया।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने की मांग की। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी कहा कि सदन में लगाए जाने वाले आरोप तथ्यों के आधार पर होने चाहिए।

सरकार ने आरोपों को बताया गलत

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि छात्र आंदोलन के दौरान किसी प्रकार की गोली नहीं चलाई गई थी। उन्होंने कहा कि केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था और गोली चलाने का कोई आदेश नहीं दिया गया।
सरकार का कहना है कि राहुल गांधी के आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं, जबकि कांग्रेस लगातार दावा कर रही है कि छात्र आंदोलन के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। राहुल गांधी के ताज़ा बयान से साफ़ है कि नीट पेपर लीक, छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक टकराव का बड़ा विषय बना रहेगा।

एक ओर कांग्रेस गृह मंत्री अमित शाह से माफी और इस्तीफे की मांग कर रही है, वहीं केंद्र सरकार विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए उन्हें राजनीति से प्रेरित करार दे रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बहस और तेज होने की संभावना है।