संसद के मानसून सत्र के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव चरम पर पहुंच गया है। एक तरफ लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्र विरोध प्रदर्शनों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोला है, तो दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ सांसद अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का नोटिस थमा दिया है।

राहुल गांधी का हमला: "पहले हड्डियां तोड़ीं, अब FIR दर्ज कर रहे हैं"

संसद भवन के बाहर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को युवाओं ('Gen Z') की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए कड़ी चेतावनी दी: "पीएम मोदी और अमित शाह- आप Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते। पहले आपने उनकी हड्डियां तोड़ीं। अब आप FIR दर्ज कर रहे हैं और उनके सोशल मीडिया अकाउंट हटा रहे हैं।"

मोदी जी, आप भारत का अतीत हैंः राहुल

राहुल गांधी ने आगे कहा, "आप भारत का अतीत हैं। भारत के भविष्य के साथ आप कैसा व्यवहार करते हैं, इसको लेकर सावधान रहें।" जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक उच्च स्तरीय समिति (SC-monitored Committee) गठित करने की मांग दोहराई। 
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पेपर लीक के खिलाफ विपक्ष का मकर द्वार पर प्रदर्शन

संसद परिसर में मकर द्वार के समक्ष विपक्षी दल 'INDIA' गठबंधन के सांसदों ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान की कथित चोरी के मुद्दे तथा NEET पेपर लीक पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, सपा सांसद अवधेश प्रसाद, धर्मेंद्र यादव और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। सांसदों ने हाथ में 'अमित शाह सदन से गायब क्यों?' का बैनर लेकर गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे और सदन में उनकी उपस्थिति की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की।
विरोध प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने एक प्रतीकात्मक नाटक भी प्रस्तुत किया, जिसमें भगवा वस्त्र पहने सांसद पप्पू यादव मकर द्वार की सीढ़ियों पर दान पात्र लेकर बैठे। इसके बाद राहुल गांधी समेत अन्य सांसदों ने दान पात्र में पैसे डाले, जिन्हें पप्पू यादव द्वारा जेब में रखते हुए दिखाया गया ताकि राम मंदिर में दान की कथित चोरी का सांकेतिक चित्रण किया जा सके। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार छात्रों और युवाओं पर पुलिस बल का प्रयोग कर उनकी आवाज दबा रही है और साथ ही मंदिर के दान में हुई धांधली पर जवाब देने से बच रही है।

बीजेपी का पलटवार: विशेषाधिकार हनन का नोटिस

राहुल गांधी के बयानों और 29 जुलाई को लोकसभा में दी गई टिप्पणी के जवाब में पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को नियम 222 और 223 के तहत तीन पन्नों का विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का नोटिस सौंपा है।
असंसदीय भाषा का आरोप: अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने चर्चा के दौरान अंससदीय एवं अपमानजनक शब्दों (जैसे 'idiot' और 'andhbhakt') का इस्तेमाल किया और नागरिकों तथा राजनीतिक विरोधियों को अपमानित किया। नोटिस में कहा गया कि गृह मंत्री अमित शाह पर बिना पूर्व सूचना और बिना किसी ठोस सबूत के गंभीर आरोप लगाए गए, जो लोकसभा के प्रक्रियात्मक नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। अनुराग ठाकुर ने मांग की कि इस मामले को विशेषाधिकार समिति (Committee of Privileges) के पास भेजा जाए और राहुल गांधी को सदन तथा गृह मंत्री से बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया जाए।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के खिलाफ भी विशेषाधिकार हनन का नोटिस

केरल से कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का नोटिस दिया है। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री ने छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पर बात करते हुए संसद में यह दावा करके 'सफेद झूठ' बोला कि प्रदर्शनकारियों पर "कोई गोलीबारी (firing) नहीं हुई थी।" सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस कदम की जानकारी देते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने सदन को गुमराह किया है, जो कि संसद की गरिमा और विशेषाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।
यह तनातनी हाल ही में संसद द्वारा पास किए गए 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' (Public Examinations Amendment Bill, 2026) पर बहस के दौरान शुरू हुई। जहां सरकार का कहना है कि यह कड़ा कानून पेपर लीक माफिया पर लगाम लगाएगा, वहीं विपक्ष का आरोप है कि सरकार नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं का विरोध कर रहे छात्रों और युवाओं की आवाज को दबा रही है।

पीएम मोदी की लोकप्रियता जेन ज़ी में क्यों घट रही है

भारत की युवा पीढ़ी यानी जेन ज़ी (Gen Z) के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सत्ता पक्ष के प्रति बढ़ते असंतोष के पीछे कई आर्थिक और सामाजिक कारक काम कर रहे हैं। इस पीढ़ी का मुख्य सरोकार करियर, शिक्षा और भविष्य की स्थिरता है। हाल के दिनों में नीट (NEET) जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी की ऊंची दर और सरकारी विभागों में जवाबदेही की कमी ने युवाओं को गहरा आघात पहुँचाया है। वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद जब युवाओं का भविष्य अंधकार में दिखता है, तो उनका निराशाजनक गुस्सा किसी राजनीतिक व्यक्ति या सरकार के शीर्ष नेतृत्व की ओर सीधा लक्षित होता है।
सोशल मीडिया पर इस गुस्से के तेवर आक्रामक और कभी-कभी अभद्र होने के पीछे इंटरनेट संस्कृति और भाषा के बदलाव की बड़ी भूमिका है। जेन ज़ी का संचार माध्यम मुख्य रूप से इंस्टाग्राम, डार्क ह्यूमर (Dark Humor), मीम्स और रील संस्कृति है। अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने के लिए यह पीढ़ी पारंपरिक भाषणों या ज्ञापनों के बजाय व्यंग्य, मॉर्फ्ड तस्वीरें, एआई-जनरेटेड कंटेंट और कटाक्ष भरे शब्दों का सहारा लेती है। डिजिटल स्पेस में बिना किसी प्रत्यक्ष डर के तुरंत ध्यान आकर्षित करने की चाहत और वायरल होने की होड़ में अक्सर राजनीतिक विरोध और अश्लीलता/अभद्रता के बीच की लाइन धुंधली हो जाती है।
दूसरा मुख्य कारण लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के पार पारंपरिक रास्तों का बंद होना या बेअसर महसूस होना है। मुख्यधारा के मीडिया (टीवी न्यूज चैनलों) को लेकर युवाओं में एक बड़ा अविश्वास पैदा हुआ है, जहाँ उन्हें लगता है कि उनके वास्तविक मुद्दों (जैसे नौकरी, पेपर लीक, महंगाई) की अनदेखी की जाती है। जब युवाओं को लगता है कि संस्थागत स्तर पर उनकी सुनवाई नहीं हो रही या उनकी आवाज़ को दबाया जा रहा है, तो वे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ही अपना हथियार बना लेते हैं। मुख्यमंत्रियों या मंत्रियों के स्तर पर कार्रवाई न होने की स्थिति में वे सीधे प्रधानमंत्री को ही सत्ता का अंतिम प्रतीक मानकर निशाने पर लेते हैं।
हालाँकि, इस आक्रोश में सीमा पार करना या व्यक्तिगत स्तर पर अपशब्दों का प्रयोग करना इंटरनेट की स्वाभाविक उग्रता (Online Disinhibition Effect) को दर्शाता है। ऑनलाइन दुनिया में नाम छिपाने (अनाम रहने) की सुविधा और तुरंत प्रतिक्रिया देने का माहौल युवाओं को उत्तेजित करता है। जब किसी एक मुद्दे पर सामूहिक आक्रोश (Digital Mob Mentality) बनता है, तो लोग अक्सर बिना दूरगामी परिणाम सोचे मर्यादा की सीमाएं लांघ जाते हैं। जहाँ एक तरफ यह युवाओं के वास्तविक अधिकारों और जवाबदेही मांगने का जरिया है, वहीं दूसरी ओर भाषा का गिरता स्तर डिजिटल संवाद में बढ़ती आक्रामकता को भी स्पष्ट रूप से उजागर करता है।