राहुल गांधी के सवाल ने पूरे विवाद को एक और दिशा दे दी है। मुद्दा यह है कि अगर ऑनलाइन Form 6 में बदलाव तकनीकी रूप से TCS ने लागू किया, तो उसके पीछे प्रशासनिक और कानूनी आदेश किसका था।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार चारों तरफ से घिरते जा रहे हैं। राहुल गांधी का नया हमला
Form 6 में किए गए बदलाव को लेकर चुनाव आयोग पर उठे विवाद के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अब सीधे यह सवाल उठाया है कि आखिर इस बदलाव का आदेश किसने दिया था और इसे लागू करने के लिए Tata Consultancy Services (TCS) को किसने कहा था। उन्होंने यह भी पूछा कि TCS में इस बदलाव को मंजूरी किस अधिकारी ने दी और क्या कंपनी पर ऐसा करने के लिए कोई दबाव बनाया गया था।
राहुल गांधी ने 1 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ऑनलाइन Form 6 में बदलाव अवैध तरीके से किया गया था और चुनाव आयोग के अपने ही दो चुनाव आयुक्तों ने इस पर आपत्ति दर्ज की थी। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग में किसने TCS को Form 6 बदलने का निर्देश दिया और TCS में किसने उस बदलाव को मंजूरी दी।
राहुल गांधी ने TCS को लेकर क्यों उठाया सवाल?
राहुल गांधी के सवाल का केंद्र केवल Form 6 में हुए बदलाव पर नहीं, बल्कि इस बदलाव की पूरी जिम्मेदारी और लगातार दिये गये आदेश पर है।
उन्होंने पूछा:
- 1. चुनाव आयोग में किसने TCS को Form 6 बदलने का आदेश दिया?
- 2. TCS में इस बदलाव को मंजूरी किसने दी?
- 3. क्या TCS के अधिकारियों पर ऐसा बदलाव करने के लिए दबाव डाला गया था?
यानी राहुल गांधी यह जानना चाहते हैं कि निर्णय किस स्तर पर लिया गया, उसे किस अधिकारी ने अधिकृत किया और चुनाव आयोग तथा उसके तकनीकी सेवा प्रदाता के बीच इस प्रक्रिया में जिम्मेदारी किसकी थी।
दो चुनाव आयुक्तों ने बदलाव पर जताई थी आपत्ति
यह पूरा विवाद इसलिए गंभीर हुआ क्योंकि चुनाव आयोग के दो सदस्यों—चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने इस बदलाव पर आपत्ति दर्ज की थी। The Indian Express की जांच के मुताबिक नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच दोनों चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इन आपत्तियों में मतदाता सूची, वोटरों के नाम जोड़ने और हटाने, चुनावी डेटा तक पहुंच तथा Form 6 में किए गए बदलाव जैसे मुद्दे शामिल थे। Form 6 को लेकर चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने मई 2026 में कहा था कि यह फॉर्म Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित है और इसमें बदलाव केवल नियमों में औपचारिक संशोधन के जरिए किया जा सकता है। उनके अनुसार, इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजना उचित कानूनी रास्ता था। सुखबीर सिंह संधू ने भी 19 मई को जोशी की स्थिति से सहमति जताई थी। इसके बावजूद जुलाई में ऑनलाइन Form 6 में नया SIR-संबंधी घोषणा-पत्र दिखाई देने लगा। बाद में 13 अगस्त को संधू ने कथित तौर पर इसे “अनधिकृत” और “अवैध” बताते हुए तत्काल हटाने की मांग की।
Form 6 क्या है?
Form 6 नए मतदाताओं के रूप में मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले नागरिक और वे वयस्क जो अब तक मतदाता सूची में पंजीकृत नहीं हुए हैं, इस फॉर्म के जरिए अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन करते हैं। Form 6 में नाम, जन्मतिथि, पता, उम्र और अन्य निर्धारित जानकारियां मांगी जाती हैं।
विवाद ऑनलाइन Form 6 में जुलाई 2026 में किए गए एक अतिरिक्त बदलाव को लेकर है। ECINET पोर्टल पर Form 6 में SIR यानी Special Intensive Revision से जुड़ी एक नई घोषणा जोड़ी गई।
इसमें आवेदक को तीन विकल्पों में से एक चुनना था—
- उसका अपना नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में था;
- उसके माता-पिता या दादा-दादी में से किसी का नाम उस सूची में था; या
- न तो उसका और न ही उसके माता-पिता का नाम उस सूची में था।
यह हिस्सा अलग से अनिवार्य घोषित नहीं था, लेकिन ऑनलाइन फॉर्म आगे बढ़ाने और जमा करने के लिए आवेदक को इसका जवाब देना जरूरी था।
आयोग का दावा- फॉर्म बदलाव पर विवाद बाद में उठा
EC के अधिकारियों का कहना है कि 24 जून 2025 को बिहार के लिए, 27 अक्टूबर 2025 को दूसरे चरण के राज्यों के लिए और 14 मई 2026 को तीसरे चरण के 19 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जारी SIR आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से मंजूर हुए थे। आयोग के मुताबिक Form 6 से जुड़ी आपत्ति बाद में उठाई गई। दूसरी ओर, The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों चुनाव आयुक्तों ने Form 6 में बदलाव की कानूनी प्रक्रिया पर पहले ही आपत्ति दर्ज कर दी थी। यही विरोधाभास अब विवाद का मुख्य हिस्सा बन गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी संदर्भ
इस विवाद के बीच 27 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के SIR संबंधी फैसले का भी हवाला दिया गया है। चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि अदालत ने आयोग की ओर से मतदाता प्रक्रिया में ऐसी घोषणा शामिल करने की शक्ति को स्वीकार किया था। आयोग के अनुसार, इसी आधार पर घोषणा को SIR प्रक्रिया में शामिल किया गया। हालांकि, Form 6 में बदलाव की कानूनी प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल अलग हैं। दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति यही थी कि यदि Form 6 वैधानिक नियमों के तहत निर्धारित फॉर्म है, तो उसमें बदलाव किस कानूनी प्रक्रिया के तहत किया गया।