लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को पंजाब के संगरूर में कांग्रेस की 'इंसाफ रैली' को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमने-सामने बहस की फिर चुनौती दी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में काम कर रहे हैं और देश के हितों के बजाय कुछ उद्योगपतियों के हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उनसे बहस करने की हिम्मत नहीं दिखाएंगे। उन्होंने यहां तक दावा किया कि अगर दोनों के बीच पांच मिनट भी बहस हो जाए तो वह साबित कर देंगे कि मोदी 'देशद्रोही' हैं और ट्रंप उन्हें नियंत्रित कर रहे हैं। यह रैली केवल केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक हमला नहीं थी, बल्कि पंजाब की भगवंत मान सरकार को घेरने और 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस की राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश भी थी।

मोदी-ट्रंप और अमेरिकी समझौते पर गंभीर आरोप

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को बहस की चुनौती देते हुए कहा कि वह इस बहस के लिए किसी भी व्यक्ति को निर्णायक नियुक्त कर सकते हैं और अपनी पसंद की जगह भी तय कर सकते हैं। राहुल ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि प्रधानमंत्री उनके सामने बैठकर बहस नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और प्रधानमंत्री मोदी पर दबाव बनाया और अमेरिकी समझौते को लेकर धमकियों का इस्तेमाल किया। राहुल ने इस समझौते को उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिका में चल रहे मामले से भी जोड़ने की कोशिश की।
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राहुल गांधी का आरोप था कि अमेरिकी राष्ट्रपति के दबाव में भारत के हितों से समझौता किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री पर देश के बजाय बड़े उद्योगपतियों के हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।

पंजाब में नशे के मुद्दे पर भगवंत मान को घेरा

राहुल गांधी ने अपने भाषण का बड़ा हिस्सा पंजाब में नशे की समस्या और आम आदमी पार्टी की सरकार की विफलताओं पर केंद्रित रखा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कई साल पहले पंजाब में नशे के बढ़ते कारोबार और युवाओं में नशे की लत का मुद्दा उठाया था। उस समय कांग्रेस की चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया। अब स्थिति यह है कि नशा पंजाब के भविष्य के लिए बड़ा खतरा बन चुका है।
राहुल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर व्यक्तिगत हमला करते हुए संसद के दिनों का एक किस्सा सुनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भगवंत मान लोकसभा में उनके साथ बैठते थे तो सुबह 11 बजे तक उनके मुंह से शराब की गंध आती थी। राहुल ने कहा कि किसी व्यक्ति का शराब पीना उसका निजी मामला है। उन्हें इस पर आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि कोई मुख्यमंत्री नशे के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है तो उसे खुद भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब को ऐसे मुख्यमंत्री की जरूरत है जो नशे के खिलाफ गंभीरता से लड़ सके और राज्य के युवाओं तथा उनके परिवारों का दर्द समझ सके। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने पंजाब से नशा खत्म करने का वादा किया था, लेकिन जमीन पर स्थिति अलग है।

अमित शाह और केजरीवाल पर पंजाब सरकार चलाने का आरोप

राहुल गांधी ने पंजाब की भगवंत मान सरकार को स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने देने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य की सत्ता का रिमोट कंट्रोल दिल्ली में है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार पर दो तरफ से नियंत्रण है। एक तरफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दूसरी तरफ दिल्ली में बैठे आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल। 
राहुल ने कहा कि भगवंत मान मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं, लेकिन वास्तविक नियंत्रण उनके हाथ में नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाब जैसे महत्वपूर्ण राज्य को दिल्ली से नहीं चलाया जा सकता। पंजाब के फैसले पंजाब के लोगों और उनकी जरूरतों के हिसाब से होने चाहिए।राहुल ने नशे के कारोबार और संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने गुजरात में नशीले पदार्थों की बड़ी बरामदगी का हवाला देते हुए केंद्र की कार्रवाई और गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका पर सवाल उठाए।

अमित शाह के 2029 तक नशा मुक्त पंजाब के वादे पर भी निशाना

राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लक्ष्य पर भी सवाल उठाए। अमित शाह ने 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब समेत देश को नशे से मुक्त करने का लक्ष्य बताया था। राहुल ने इस समयसीमा पर सवाल उठाते हुए कहा कि तीन साल बाद अमित शाह गृह मंत्री नहीं रहेंगे। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा केंद्र सरकार भी एक साल से ज्यादा नहीं चलेगी। इस बयान के जरिए राहुल ने केंद्र सरकार की राजनीतिक स्थिरता और नशे के खिलाफ उसकी प्रतिबद्धता दोनों पर हमला किया।

सिद्धू मूसेवाला को याद कर भावुक हुए राहुल गांधी

रैली में राहुल गांधी ने दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला का भी जिक्र किया। उन्होंने मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह को मंच पर बुलाया और उनके बेटे को याद किया। राहुल ने बताया कि कुछ साल पहले उनकी मुलाकात सिद्धू मूसेवाला से उनके कार्यालय में हुई थी। उस समय वह मूसेवाला के संगीत से बहुत परिचित नहीं थे, लेकिन पहली मुलाकात में ही उन्हें वह बेहद प्रभावशाली, प्रतिभाशाली और ऊर्जावान युवा लगे थे।
राहुल ने बताया कि मूसेवाला कांग्रेस में शामिल होना चाहते थे। उन्होंने कहा कि जब सिद्धू राजनीति में आगे बढ़ रहे थे तो उन्हें महसूस हुआ था कि वह एक खतरनाक रास्ते पर जा रहे हैं। राहुल ने बलकौर सिंह के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी माता-पिता के लिए अपनी संतान को खोने से बड़ा दुख नहीं हो सकता। उन्होंने सिद्धू मूसेवाला की हत्या को पंजाब की बिगड़ती कानून-व्यवस्था और युवाओं की सुरक्षा से जोड़ते हुए चिंता जताई।

2027 के चुनाव का बिगुल, मुख्यमंत्री के गृह जिले में रैली

संगरूर में आयोजित इंसाफ रैली कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संगरूर मुख्यमंत्री भगवंत मान का गृह जिला है और आम आदमी पार्टी का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र भी माना जाता है। कांग्रेस ने इस रैली के जरिए 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए अपने अभियान की औपचारिक शुरुआत की है। रैली में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी मौजूद रहे। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेताओं ने भी इसमें हिस्सा लिया। रैली की तैयारियों में पंजाब कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। पार्टी नेतृत्व ने पहले ही पंजाब के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की तैयारी की थी। कांग्रेस ने रैली को पंजाब के अधिकार, न्याय, लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य से जुड़े मुद्दे उठाने का मंच बताया था।

खड़गे और चन्नी ने भी AAP सरकार को घेरा

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी रैली में आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा। चन्नी ने भगवंत मान पर हमला करते हुए उन्हें शराब पीने की आदत को लेकर घेरा। उन्होंने मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर सवाल उठाए और कहा कि पंजाब की जनता ने जिस सरकार से उम्मीदें लगाई थीं, वह उन पर खरी नहीं उतरी। रैली में चन्नी को संबोधन के लिए मंच पर पहुंचने पर भीड़ की ओर से जोरदार समर्थन मिला। कांग्रेस नेताओं ने पंजाब में नशे की समस्या, गैंगस्टरवाद, जबरन वसूली और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर मान सरकार को कठघरे में खड़ा किया।

कांग्रेस के सामने पंजाब में वापसी की चुनौती

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की यह रैली कई राजनीतिक संकेत देती है। पहला, कांग्रेस अब सीधे मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी को निशाने पर लेकर चुनावी लड़ाई शुरू करना चाहती है। दूसरा, पार्टी नशे और कानून-व्यवस्था को सबसे बड़े चुनावी मुद्दों में बदलने की कोशिश कर रही है। तीसरा, राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर भी हमला करके पंजाब के चुनाव को राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ने का प्रयास किया है।
कांग्रेस का संदेश है कि पंजाब को नशे, बेरोजगारी और अपराध से बाहर निकालने के लिए राजनीतिक बदलाव जरूरी है। राहुल गांधी ने किसानों के हितों की रक्षा, युवाओं के लिए रोजगार और नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई का वादा भी किया। इस तरह संगरूर की इंसाफ रैली में कांग्रेस ने एक साथ तीन राजनीतिक मोर्चे खोले हैं- केंद्र की मोदी सरकार, पंजाब की भगवंत मान सरकार और 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता वापसी की अपनी कोशिश।