सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर इंडिया गठबंधन के मार्च में राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ ही पीएम मोदी, अमित शाह और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर बड़ा हमला बोला। राहुल गांधी ने इन पर लोकतंत्र को बर्बाद करने और 'वोट चोरी' का आरोप लगाया। राहुल ने कहा, "मेरे भारत के साथ जो किया गया है, वो देशद्रोह है। चाहे वो नरेंद्र मोदी हो, अमित शाह हो, ज्ञानेश कुमार हो या मोहन भागवत हो - कोई बच कर नहीं भाग पाएगा।"
आकाशवाणी भवन में धरने पर बैठे राहुल गांधी पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि करीब 300 लोकसभा और राज्यसभा सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों से मिलने आए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। उन्होंने कहा कि 'हम देश के प्रतिनिधि हैं। हम देश की आवाज हैं। मुझे समझ नहीं आता कि 300 सांसदों को क्यों रोका गया और फिर हमें यहां बैठा दिया गया। चुनाव आयोग मुश्किल से 50 गज दूर है, लेकिन हमें जाने नहीं दे रहे।'

वोट चोरी से देश को हाइजैक किया: राहुल

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी, शाह और भागवत ने 'वोट चोरी' के ज़रिए देश को हाइजैक कर लिया है और ज्ञानेश कुमार उनकी मदद कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा, 'हम सिर्फ उनका विरोध नहीं कर रहे, हम उन्हें तबाह कर देंगे। मुझे बीजेपी क्या कहती है, इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। मैं यहां भारत में लोकतंत्र बचाने के लिए खड़ा हूं। मेरे साथ 300 सांसद भी आए हैं, जो लोकतंत्र बचाना चाहते हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'हमारे देश के साथ जो किया गया है, उसे देशद्रोह कहते हैं। कोई भी नहीं बचेगा।'
ताज़ा ख़बरें
इंडिया गठबंधन के सांसदों और कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद से निर्वाचन सदन की ओर मार्च निकाला। विपक्षी सांसदों का आरोप है कि एसआईआर में गड़बड़ी हुई है। इनके मार्च को देखते हुए क्षेत्र में धारा 163 यानी निषेधाज्ञा लागू की गई थी। आकाशवाणी भवन में घुसे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।

हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारी

पुलिस ने इंडियन यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं से वहाँ खाली करने को कहा और चेतावनी दी कि नहीं मानने पर उन्हें हिरासत में लिया जाएगा। बाद में हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को बस में बिठाकर बाहर ले जाया गया। इसके बाद चुनाव आयोग मुख्यालय के बाहर तनाव बढ़ गया।

कांग्रेस कार्यकर्ता और इंडिया गठबंधन के समर्थक निर्वाचन सदन में घुसने की कोशिश कर रहे थे, जिसके चलते सुरक्षा कर्मियों से झड़प हुई। राहुल गांधी और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा को चुनाव आयोग परिसर में घुसने से रोक दिया गया। इसके बाद इंडिया गठबंधन के सांसदों ने चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर धरना दिया और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पुलिस की भारी तैनाती की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपने से रोका जा रहा है। खेड़ा ने कहा, 'चुनाव आयोग ठीक बगल में है, लेकिन देश के विपक्ष के नेता को जाने नहीं दे रहे। उन्हें रोक दिया गया है। आप देख सकते हैं, राहुल गांधी जी, प्रियंका गांधी जी और हम सब आकाशवाणी के अंदर धरने पर बैठे हैं। चुनाव आयोग यहां से मुश्किल से 100 मीटर दूर है।' उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार डर गई है और राजधानी में लोकतंत्र की स्थिति पर सवाल उठाया। सीपीआई (एम) के सांसद जॉन ब्रिटास और वी. शिवदासन को भी हिरासत में लिया गया। सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने कहा कि शुरुआत से ही भारी सुरक्षा बल की वजह से विपक्षी सांसदों को आगे बढ़ने नहीं दिया गया।

बीजेडी भी पहुंची प्रदर्शन में

सीपीआई सांसद ने कहा कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर मिलकर काम कर रहे हैं और किसी की अलग रणनीति नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजू जनता दल ने भी इस दिन विपक्ष के प्रदर्शन में हिस्सा लिया, जबकि वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है। इससे प्रदर्शन को केवल औपचारिक INDIA गठबंधन की गतिविधि के बजाय चुनावी प्रक्रिया से जुड़े व्यापक विपक्षी विरोध के रूप में पेश करने की कोशिश भी दिखाई दी।

SIR को लेकर क्या है विवाद?

इस पूरे विरोध का केंद्र चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया है। विपक्ष लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि SIR के दौरान मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए और पात्र मतदाताओं के नाम भी सूची से बाहर हो सकते हैं।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव का असर मतदान के अधिकार पर पड़ सकता है और इसलिए चुनाव आयोग को पूरी प्रक्रिया और आंकड़ों में पारदर्शिता बरतनी चाहिए। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेता इसी मुद्दे को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
देश से और खबरें

आयोग विपक्ष से सीधे बात क्यों नहीं कर रहा?

प्रदर्शन में राहुल गांधी का सबसे प्रमुख सवाल यही रहा कि विपक्षी सांसदों को चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही। विपक्ष का कहना है कि क़रीब 300 सांसद आयोग के सामने अपनी शिकायतें और मांगें रखने के लिए आए थे और उन्हें केवल ज्ञापन सौंपने तथा चुनाव आयुक्तों से मिलने की अनुमति दी जानी चाहिए थी।
राहुल गांधी ने कहा कि सांसद देश के प्रतिनिधि हैं और उन्हें चुनाव आयोग तक जाने से रोकना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े करता है। इसके जवाब में पुलिस ने क्षेत्र में लागू निषेधाज्ञा और सुरक्षा व्यवस्था का हवाला दिया।