मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रोटेस्ट करने वालों को हिरासत में लेने और उन्हें सड़क पर घसीटने की खबरों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीक़े से विरोध कर रहे लड़के-लड़कियों को सड़कों पर घसीटा जा रहा है और सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया है। दरअसल, गांधी जयंती के मौक़े पर गुरुवार को दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देश के कई शहरों में वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए।

राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में कहा कि उनका कसूर सिर्फ इतना है कि उन्होंने वोट चोरी पर सवाल उठाया। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, 'ज्ञानेश कुमार जाएंगे। और जिस सिस्टम ने उन्हें बिठाया है, वो भी जाएगा।'

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की नेहा वोरा सहित कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। आरोप है कि पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को घसीटते हुए हिरासत में लिया। यूथ कांग्रेस के नेताओं को भी हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली में 1100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिए जाने की खबर है।
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वोट चोरी पर सवाल पूछना ही कसूर: राहुल

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपने बयान में गांधी जयंती और प्रदर्शन के दिन को जोड़ते हुए कहा कि हजारों नौजवान वोट चोरी के खिलाफ शांतिपूर्वक और बिना हिंसा के अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं।

राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा, 'आज गांधी जयंती है। और आज ही, हजारों नौजवान वोट चोरी के खिलाफ सड़कों पर हैं- शांतिपूर्वक, बिना हिंसा के, अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए। उनकी मांग साफ है: ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। लोकतंत्र बचाओ। और मोदी-शाह सरकार का जवाब? लड़के-लड़कियों को सड़कों पर घसीटा जा रहा है। सैकड़ों हिरासत में हैं। उनका कसूर सिर्फ यह कि उन्होंने वोट चोरी पर सवाल पूछा। बापू ने यही सिखाया था- सच बोलो, शांति से लड़ो। और यही सरकार को सबसे ज्यादा डराता है। क्योंकि लाठी से भीड़ रोकी जा सकती है, सवाल नहीं। ज्ञानेश कुमार जाएंगे। और जिस सिस्टम ने उन्हें बिठाया है, वो भी जाएगा।'
राहुल गांधी का यह बयान तब आया है जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दलों और नागरिक समूहों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा और SIR प्रक्रिया को रद्द करना शामिल है।

प्रदर्शन करने वाले 1100 लोग हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ छात्र संगठनों और नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान योगेंद्र यादव, AISA की नेहा वोरा और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह सहित कई लोगों को हिरासत में लिया गया। यूथ कांग्रेस के नेताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया।

प्रदर्शनकारियों को घसीटकर ले जाने की खबरों ने पुलिस की कार्रवाई और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर सवाल खड़े किए हैं। दिल्ली में 1100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई है। लखनऊ में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की खबर है।

मुंबई में सीजेपी का प्रदर्शन

मुंबई में भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ। इस दौरान सीजेपी नेता अभिजीत दिपके ने कहा कि यह आंदोलन जारी रहेगा और प्रदर्शनकारी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से कम कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे।

दिपके ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने वोट चुराने और लोगों के अधिकारों पर हमला करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि देशभर से बड़ी संख्या में लोग इस आंदोलन में शामिल होंगे और पुलिस की बैरिकेडिंग उन्हें रोक नहीं पाएगी। उन्होंने आंदोलन के लंबे चलने का संकेत देते हुए कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो विरोध जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन में बोरियत से बचने के लिए मजे-मस्ती के पल भी शामिल होंगे, लेकिन इससे आंदोलन की मांगों और उसके जारी रहने के संकल्प पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दिपके के बयान से आंदोलन के आयोजकों की रणनीति का संकेत मिलता है कि वे इसे एक दिन के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखना चाहते।

दिल्ली पुलिस अधिकारी पर दिपके की टिप्पणी

दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देने वाले डीसीपी सचिन शर्मा के बयान को लेकर भी अभिजीत दिपके ने प्रतिक्रिया दी। दिपके ने दावा किया कि कुछ पुलिस अधिकारी उन्हें बता रहे थे कि सचिन शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े विचारों वाले हैं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पसंदीदा हैं। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। दिपके ने पुलिस अधिकारी को संबोधित करते हुए कहा, 'अगर तुम संघी हो तो खाकी शॉर्ट्स पहनो, पुलिस की वर्दी मत पहनो!'
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उनकी यह टिप्पणी पुलिस की निष्पक्षता और राजनीतिक विचारधारा से जुड़े आरोपों के संदर्भ में थी। पुलिस अधिकारी या दिल्ली पुलिस की ओर से इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया इस विवरण में शामिल नहीं है।

शबाना आजमी क्या बोलीं?

मुंबई में आयोजित सभा को अभिनेत्री शबाना आजमी ने भी संबोधित किया। उन्होंने मतदान के अधिकार को लोकतंत्र की बुनियादी ताकत बताते हुए कहा कि वोट डालना हर व्यक्ति का अधिकार और उसकी आवाज है। शबाना आजमी ने सवाल उठाया कि अगर किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से काट दिया जाए तो वह क्या करेगा? उन्होंने खुद ही इसका जवाब देते हुए कहा, 'हम विरोध करेंगे! यह हमारा अधिकार है।'

उन्होंने सभा में मौजूद लोगों की भागीदारी को लोकतंत्र की जीत बताया। शबाना आजमी ने कहा कि लोगों ने अपनी ताकत पहचान ली है और अन्याय को बर्दाश्त न करने का संकल्प लिया है। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि मतदान का अधिकार नागरिकों को मिला हुआ हक है। उनके मुताबिक, संविधान ने इस अधिकार की गारंटी दी है और किसी व्यक्ति के वोट देने के अधिकार पर सवाल उठने पर विरोध करना भी लोकतांत्रिक अधिकार का हिस्सा है।
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वोटर लिस्ट और SIR को लेकर क्यों हो रहा है विरोध?

इस आंदोलन के केंद्र में मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया है। प्रदर्शनकारी आरोप लगा रहे हैं कि इस प्रक्रिया के जरिए मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से वे चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

विपक्षी नेताओं और आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी या नाम हटाए जाने की आशंका का समाधान पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि किसी भी पात्र नागरिक का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो।