पीएम मोदी पर हमला करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की हत्या के चंद दिन बाद - न अफ़सोस, न माफ़ी। उल्टा, अमेरिका ने आदेश देना जारी रखा है। उनके शब्द पढ़िए: 'अमेरिकी सेना के आदेश तुरंत मानें।' कोई उल्लंघन 'बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।'
राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी
भारतीय नाविकों की मौत के मामले में 'चेतावनी' वाले अमेरिकी बयान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर फिर से सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने उन्हें 'आज्ञाकारी नौकर जैसा' क़रार दिया है। उन्होंने कहा कि एक आजाद देश कभी भी ऐसी भाषा बर्दाश्त नहीं कर सकता, लेकिन हमारे 'कंप्रोमाइज्ड प्रधानमंत्री' चुप हैं।
राहुल गांधी ने रविवार को एक्स पर लिखा, "अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की हत्या के चंद दिन बाद - न अफ़सोस, न माफ़ी। उल्टा, अमेरिका ने आदेश देना जारी रखा है। उनके शब्द पढ़िए: 'अमेरिकी सेना के आदेश तुरंत मानें।' कोई उल्लंघन 'बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' उन्होंने आगे कहा, 'एक आज़ाद देश इस तरह की भाषा कभी नहीं सहेगा। लेकिन हमारे Compromised PM? चुप। एक आज्ञाकारी नौकर की तरह सुनते हैं, और आदेश मान लेते हैं। Compromised PM देश के सम्मान की रक्षा नहीं करेगा - क्योंकि जो देश का अपमान करते हैं, वो उन्हीं के वश में हैं।'
राहुल ने यह हमला तब किया है जब अमेरिकी हमलों की निंदा करने वाले एस जयशंकर के बयान के कुछ घंटे बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कड़ा जवाब दिया। डिप्टी प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि मार्को रुबियो ने जयशंकर से बात की और जोर दिया कि सभी व्यावसायिक जहाजों को अमेरिकी बलों के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए। टॉमी पिगॉट ने शनिवार को कहा, 'विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कल भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से बात की। दोनों अधिकारियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल की घटनाओं पर चर्चा की। विदेश मंत्री ने ज़ोर दिया कि सभी कमर्शियल जहाजों को अमेरिकी सेना के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए, क्योंकि वे इस जलडमरूमध्य में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल की अवैध ढुलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।'
थरूर ने की रुबियो के बयान की आलोचना
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारतीयों की मौत को लेकर अमेरिका की आलोचना की और वॉशिंगटन के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आधिकारिक बयान में अफ़सोस या संवेदना ज़ाहिर करने जैसी कोई बात नहीं थी। थरूर ने एक्स पर लिखा, "अमेरिका का यह आधिकारिक बयान पढ़ना बेहद चौंकाने वाला है, जिसमें बेगुनाह भारतीयों की जान जाने पर अफ़सोस या संवेदना ज़ाहिर करने जैसी कोई बात नहीं है। कोई 'दोस्त' और रणनीतिक साझेदार इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है?"उन्होंने कहा, "असल में इन अहम समुद्री इलाकों से गुज़रने वाले लगभग हर मर्चेंट जहाज़ पर भारतीय क्रू सदस्य होते हैं। क्या अब उन सभी को अमेरिकी मिसाइलों का निशाना माना जा रहा है? यह रवैया मंज़ूर नहीं है और मुझे उम्मीद है कि डॉ. एस. जयशंकर ने मार्को रुबियो से यह बात कही होगी।"
यह विवाद 10 जून को MT Settebello नाम के जहाज पर हुए हमले के बाद और तेज हो गया, जिसमें तीन भारतीय नाविक मारे गए। भारत ने दो बार अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय में बुलाकर विरोध दर्ज कराया है।
इधर, मारे गए नाविकों के शव नहीं लाए जाने का मामला भी तूल पकड़ रहा है। राहुल गांधी ने सरकार से मृत नाविकों के शव भारत लाने को कहा। उन्होंने एक वीडियो वाली पोस्ट को साझा करते हुए लिखा, 'कंप्रोमाइज़्ड पीएम के शासन में भारतीय होना मतलब पूरी तरह दुर्गति है। विदेशी ताक़त हमारे नागरिकों को मारती है। हमारी सरकार चुपचाप आज्ञाकारी नौकर की तरह चुप-चाप आदेश मान लेती है और हमारे नागरिक सड़ने के लिए छोड़ दिए जाते हैं। इस भारतीय को घर लाइए। अभी।'
पीएम मोदी निशाने पर क्यों?
10 जून को अमेरिकी हमले में तीन भारतीयों के मारे जाने पर मोदी सरकार की ओर से कड़ा विरोध नहीं किए जाने पर आलोचना की जा रही है। सवाल उठ रहे हैं कि भारतीय नागरिकों की मौत पर आख़िर पीएम मोदी ने खुले तौर पर अमेरिका का विरोध क्यों नहीं किया? राहुल गांधी ने दो दिन पहले ही कहा था 'Compromised PM भारत माता के बेटों की रक्षा नहीं कर सकते, क्योंकि जिन्होंने उन बेटों की जान ली उन्हें नाराज़ करने की इनमें न हिम्मत है, न ताकत।'
राहुल गांधी ने कहा था, 'जब कोई विदेशी ताकत किसी भारतीय की हत्या करे, तो प्रधानमंत्री को बोलना पड़ता है। लेकिन मजाल है जो ये एक शब्द बोल जाएं। अगले हफ्ते G7 में, हमारे नाविकों की हत्या के बस चंद दिनों बाद, मोदी जी मुस्कुराएंगे, गले मिलेंगे और समझौते करेंगे - मगर, उन तीन भारतीयों के लिए उनके पास एक शब्द भी नहीं होगा।'सोशल मीडिया पर लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं। सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि केंद्र में बीजेपी की सरकार है और वह खुद को 'राष्ट्रवादी' पार्टी और 'राष्ट्रवादी' सरकार होने का दावा करती रही है। राहुल गांधी ने भी संकेतों में यही सवाल करते हुए निशाना साधा है। राहुल ने साफ़ तौर पर कहा कि जब कोई विदेशी ताकत किसी भारतीय की हत्या करे, तो प्रधानमंत्री को बोलना पड़ता है।
G7 समिट के बीच विवाद
यह विवाद ठीक उसी समय सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस के G7 समिट में हिस्सा लेने वाले हैं। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय मुलाकात और व्यापार चर्चा होने की संभावना है। राहुल गांधी ने इस के मद्देनज़र भी सरकार पर निशाना साधा है। अभी तक प्रधानमंत्री मोदी या विदेश मंत्रालय की तरफ़ से राहुल गांधी के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
भारत और अमेरिका के बीच इस घटना को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। भारत ने अपने नाविकों की सुरक्षा पर जोर दिया है, जबकि अमेरिका ईरान पर लगाए गए ब्लॉकेड को सख्ती से लागू करने की बात कर रहा है। लेकिन इतने दबाव के बावजूद प्रधानमंत्री पीएम की ओर से इस पर प्रतिक्रिया नहीं आई है।