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चीन ने एलएसी पर गोला-बारूद जमा किया, भारत की भी तैयारी पूरी: राजनाथ सिंह

चीन के साथ सीमा पर चल रहे तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरूवार को राज्यसभा में बयान दिया है। सिंह ने कहा कि युद्ध की शुरुआत तो हमारे हाथ में होती है लेकिन उसका अंत हमारे हाथ में नहीं होता। उन्होंने कहा कि हम देश का मस्तक झुकने नहीं देंगे और ना ही हम किसी का मस्तक झुकाना चाहते हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने लोकसभा में भी अपनी बात रखी थी।

‘चीन ने की भड़काने वाली कार्रवाई’

राजनाथ सिंह ने कहा, ‘हम मौजूदा हालात का बातचीत के जरिये समाधान चाहते हैं। इसलिए हम चीन के साथ सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत कर रहे हैं। चीन की कथनी और करनी में अंतर है और बातचीत के बीच ही उसके द्वारा 29-30 अगस्त की रात को भड़काने वाली कार्रवाई की गई।’ उन्होंने कहा कि चीन द्वारा यथास्थिति को बदलने का प्रयास किया गया लेकिन भारतीय जवानों ने इसे विफल कर दिया। 

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रक्षा के अलावा देश का गृह मंत्रालय भी संभाल चुके राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी को भी सीमा की रक्षा के प्रति हमारे संकल्पों पर शक नहीं होना चाहिए। 

रक्षा मंत्री ने कहा, ‘लद्दाख में हम चुनौती के दौर से गुजर रहे हैं और मुझे पूरा भरोसा है कि हमारे जवान इस चुनौती पर खरा उतरेंगे।’

एलएसी का पालन करना ज़रूरी

उन्होंने कहा, ‘चीन द्वारा भारी संख्या में जवानों की तैनाती किया जाना 1993 और 1996 के समझौतों का उल्लंघन है। हमारी सेनाएं इसका पूरी तरह पालन करती हैं जबकि चीन की ओर से ऐसा नहीं हुआ है। चीन की कार्रवाई के कारण बॉर्डर पर समय-समय पर झड़प की स्थिति पैदा हुई है।’ उन्होंने कहा कि एलएसी का पालन किया जाना सीमा क्षेत्रों में शांति का आधार है। 

बॉर्डर विकास को प्राथमिकता 

सिंह ने कहा कि ताज़ा स्थिति के अनुसार, ‘चीन ने एलएसी और अपने अंदरूनी क्षेत्र में बड़ी संख्या में सैन्य टुकड़ियां, गोला-बारूद जमा कर रखा है। लेकिन भारत ने भी उचित संख्या में युद्ध के साजो-सामान की तैनाती की है।’ रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में सीमा पर बॉर्डर विकास को प्राथमिकता दी है और हमने इसके बजट को दोगुना कर दिया है।

रक्षा मंत्री ने कहा, ‘मैंने चीन के रक्षा मंत्री के साथ बातचीत में चीनी सेना की गतिविधियों को सामने रखा और यह भी स्पष्ट किया कि हम सीमा विवाद का हल शांतिपूर्वक बातचीत के जरिये चाहते हैं लेकिन भारत की संप्रभुता, अखंडता को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’
राजनाथ सिंह ने कहा कि विदेश मंत्री जयशंकर ने भी चीनी समकक्ष से मुलाक़ात की और कुछ बिंदुओं पर सहमति बनी। उन्होंने कहा कि इस बार की स्थिति पहले बनी स्थितियों से अलग है लेकिन हमारे जवान किसी भी स्थिति का मुक़ाबला करने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ हैं। 

देखिए, भारत-चीन तनाव पर क्या कहते हैं वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष- 

चीनी सैनिकों का जमावड़ा बढ़ा

लोकसभा में रक्षा मंत्री ने कहा था, ‘अप्रैल माह से पूर्वी लद्दाख की सीमा में चीनी सेनाओं की संख्या में वृद्धि देखी गई है। मई महीने की शुरुआत में चीनी सेना ने गलवान घाटी क्षेत्र में हमारे जवानों की पेट्रोलिंग में व्यवधान पैदा किया, इसके कारण झड़प की स्थिति पैदा हुई। मई महीने के मध्य में चीनी सेना ने लद्दाख के पश्चिमी क्षेत्र में गोगरा, पैंगोंग लेक का उत्तरी क्षेत्र शामिल है, इनमें घुसपैठ की कोशिश की और हमारी सेना ने इसके ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई की।’ 

राजनाथ सिंह ने कहा कि हमने चीन को बता दिया है कि इस तरह की गतिविधियां एलएसी पर यथास्थिति को बदलने का प्रयास है और यह भारत को किसी भी स्थिति पर मंजूर नहीं है।

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