राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (AAP) के 7 राज्यसभा सांसदों के भाजपा के साथ विलय को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ AAP की राज्यसभा में ताकत 10 से घटकर मात्र 3 रह गई है, जबकि भाजपा की संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गई है। एनडीए की कुल ताकत अब 148 पहुंच गई है। हालांकि आम आदमी पार्टी ने सभापति को पत्र लिखकर इन सदस्यों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। 
राघव चड्ढा के नेतृत्व में ये 7 सांसद शुक्रवार (24 अप्रैल 2026) को AAP से अलग होकर भाजपा में शामिल हुए थे। उन्होंने दावा किया था कि AAP की राज्यसभा में 10 सदस्यों में से दो-तिहाई (7) का समर्थन होने के कारण संविधान की 10वीं अनुसूची (एंटी-डिफेक्शन कानून) के तहत विलय वैध है। उन्होंने सभापति को हस्ताक्षरित दस्तावेज सौंपे थे।

आम आदमी पार्टी की आपत्ति

आम आदमी पार्टी ने सात सांसदों के विलय पर पहले ही आपत्ति जता दी थी। सोमवार 27 अप्रैल के घटनाक्रम के बाद आप सांसद संजय सिंह ने एएनआई से कहा- "राज्यसभा अध्यक्ष का यह निर्णय भाजपा में विलय के लिए इन 7 सांसदों के पत्र पर आधारित है। लेकिन जब अध्यक्ष मेरे उस पत्र का संज्ञान लेंगे, जिसमें मैंने इन सांसदों की सदस्यता निलंबित करने की बात कही है, तो मुझे उम्मीद है कि वे संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपना निर्णय देंगे। अध्यक्ष के निर्णय के बाद हम इस पर और चर्चा करेंगे।"
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विलय में शामिल सांसद

  • राघव चड्ढा
  • संदीप पाठक
  • अशोक मित्तल
  • स्वाति मालीवाल
  • हरभजन सिंह
  • राजिंदर गुप्ता
  • विक्रमजीत सिंह साहनी
ये सांसद मुख्य रूप से पंजाब से चुने गए थे। राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि AAP अब ईमानदार राजनीति से भटक गई है और भ्रष्टाचार में लिप्त हो गई है। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी से मुलाकात भी की।

सभापति का फैसला और प्रभाव

राज्यसभा वेबसाइट के मुताबिक अब AAP के केवल 3 सांसद बचे हैं- संजय सिंह, एन.डी. गुप्ता और बलवीर सिंह सीचेवाल। भाजपा अब अकेले ही 123 की बहुमत संख्या के करीब पहुंच गई है। सभापति ने कानूनी राय लेने के बाद विलय को 10वीं अनुसूची के अनुरूप माना।
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने X पर लिखा: “माननीय राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन जी ने 7 AAP सांसदों के BJP के साथ विलय को स्वीकार कर लिया है। अब राघव चड्ढा जी, संदीप पाठक जी आदि BJP संसदीय दल के सदस्य हैं।”
AAP ने इस विलय को ‘ऑपरेशन लोटस’ बताया और सभापति को पत्र लिखकर 7 सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। पार्टी नेता संजय सिंह ने कहा कि विलय के लिए पहले पार्टी का विलय होना चाहिए, न कि केवल विधायी दल का। उन्होंने कपिल सिब्बल समेत विशेषज्ञों की राय ली है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी अपील करने की योजना है। AAP ने इसे पंजाब सरकार के खिलाफ साजिश बताया।
यह घटना राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के कुछ दिनों बाद हुई। चड्ढा ने AAP पर भ्रष्टाचार और सत्ता से भटकने का आरोप लगाया। यह AAP के लिए बड़ा झटका है, खासकर पंजाब विधानसभा चुनाव (2027) से पहले।
यह घटनाक्रम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह एंटी-डिफेक्शन कानून की व्याख्या पर नई बहस छेड़ सकता है। BJP ने इसे ‘राष्ट्र निर्माण’ की दिशा में स्वागत योग्य कदम बताया है।