संसद के मानसून सत्र शुरू होने से पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम को खत लिखकर राम मंदिर चंदा 'चोरी' मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। दोनों नेताओं का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था और विश्वास के साथ मंदिर निर्माण के लिए दान दिया था, लेकिन अब पैसे के कथित हेरफेर की खबरों से लोगों का भरोसा टूट रहा है। राहुल गांधी और खड़गे ने प्रधानमंत्री से कहा कि इस मामले में उनकी चुप्पी सही नहीं है और सरकार को पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने संयुक्त पत्र में लिखा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हजारों करोड़ रुपये के कथित दुरुपयोग के आरोप सामने आए हैं। उनका कहना है कि लाखों श्रद्धालुओं ने अपनी मेहनत की कमाई श्रद्धा और विश्वास के साथ दान की थी, लेकिन अब वे स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। राहुल गांधी ने उस पत्र की एक कॉपी को एक्स पर साझा और प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए लिखा है, 'ट्रस्ट के हर सदस्य को आपकी सरकार ने चुना था। इस चंदा चोरी पर आपकी चुप्पी अस्वीकार्य है। तत्काल स्वतंत्र जांच कराइए, पूरा हिसाब सार्वजनिक कीजिए और दोषियों को कानून के कटघरे में लाइए। आपकी सरकार की विश्वसनीयता अब आपकी कार्रवाई पर निर्भर है।'
पत्र में कहा गया कि ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री ने संसद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर घोषित किया था, लेकिन उसके सभी सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार ने की। कांग्रेस नेताओं ने यह भी दावा किया कि ट्रस्ट के कई सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद यानी वीएचपी और उससे जुड़े संगठनों से जुड़े रहे हैं।

स्वतंत्र जांच और सार्वजनिक रिपोर्ट की मांग

राहुल गांधी और खड़गे ने प्रधानमंत्री से मांग की कि ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच में नकद दान, सोना, चांदी और अन्य चढ़ावे के उपयोग की भी पूरी पड़ताल होनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि जांच पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट और ट्रस्ट के खातों को सार्वजनिक किया जाए ताकि देश के श्रद्धालु जान सकें कि उनके द्वारा दिया गया दान किस तरह खर्च किया गया।
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जयराम रमेश ने भी उठाया सवाल

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से प्रतिक्रिया देने की मांग की। उन्होंने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी और खड़गे का पत्र साझा करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2020 में संसद में स्वयं इस ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी, इसलिए अब कथित गड़बड़ियों पर उन्हें जवाब देना चाहिए। रमेश ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले पर प्रधानमंत्री की चुप्पी सही नहीं है।

वेणुगोपाल ने भी लिखा था ख़त

राहुल व खड़गे का पत्र इस महीने प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा गया दूसरा पत्र है। इससे पहले कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने मोदी को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि प्राथमिक जांच में पता चला है कि इस घोटाले के पीछे एक 'सुनियोजित गिरोह' काम कर रहा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की थी। कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल ने आगे बढ़कर ट्रस्ट भंग करने, चंपत राय की गिरफ्तारी और शंकराचार्यों व संतों वाली नई ट्रस्ट बनाने की मांग की थी। गोहिल ने 18 करोड़ में खरीदी गई जमीन का भी मुद्दा उठाया था, जिसकी पहले क़ीमत सिर्फ 2.93 करोड़ रुपये बताई गई थी।

इससे पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव और आप सांसद संजय सिंह ने अयोध्या में एक और जमीन डील का मुद्दा उठाया था। आरोप था कि 2 करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन कुछ ही मिनटों में 18.5 करोड़ में बेच दी गई थी। उन्होंने सीबीआई और ईडी जांच की मांग की थी। ट्रस्ट ने इन आरोपों को राजनीतिक और गलत बताया था।
सीपीआई एम सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्र से कहा कि ट्रस्ट को सूचना का अधिकार कानून के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण मानना चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

यह विवाद राज्यों तक भी पहुंच गया है। कर्नाटक में कांग्रेस ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए प्रस्ताव पास किया। आरोप लगाया कि ट्रस्ट ने सही हिसाब-किताब नहीं रखा और कुछ ट्रस्टी व कर्मचारियों ने मंदिर निर्माण के लिए आए पैसे को गलत कामों में लगाया। ट्रस्ट और बीजेपी की उत्तर प्रदेश सरकार ने इन आरोपों का विरोध किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के आरोपों को अयोध्या और राम जन्मभूमि को बदनाम करने की साजिश बताया।

बता दें कि क़रीब एक महीने पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर में चढ़ावे और दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया था।
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शुरुआती जाँच रिपोर्ट मिलने के बाद 25 जून को उत्तर प्रदेश पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज की। इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एफ़आईआर में कई लोगों के नाम शामिल हैं और उनके ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सरकार ने क्या कहा?

अब तक केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालाँकि, उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर चुकी है और पुलिस की जांच जारी है।

अब कांग्रेस इस मामले को श्रद्धालुओं की आस्था और पारदर्शिता से जोड़कर सरकार को घेर रही है। वहीं बीजेपी की ओर से अभी इस पत्र पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस मुद्दे के संसद के आगामी मानसून सत्र में भी जोरदार ढंग से उठने की संभावना जताई जा रही है, जिससे सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।