टीएमसी के बागी सांसदों ने आख़िरकार त्रिपुरा की एक छोटी-सी पार्टी नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी में विलय करने की घोषणा कर दी। काकोली घोष के नेतृत्व में टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने रविवार को लोकसभा स्पीकर से मिलकर विलय के लिए उनको एक पत्र सौंपा। बागी सांसदों ने विलय के अलावा बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देने का फ़ैसला लिया है। इधर, TMC नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर कहा कि TMC को एक ही राजनीतिक पार्टी माना जाए और पार्टी के किसी भी कथित अलग गुट या धड़े को कोई मान्यता या सुविधा न दी जाए।

टीएमसी में यह बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात के बाद विलय की घोषणा की। बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को जो पत्र सौंपा है उसमें उन्होंने कहा है कि उनके लिए संसद में अलग से बैठने की व्यवस्था दी जाएगा। काकोली घोष ने कहा है, 'हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है। हम एनडीए का हिस्सा बनेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम करेंगे।'
बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा, 'हम नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी में शामिल हो गए हैं। यह एक मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी है। अब अदालत तय करेगी कि असली TMC कौन है।'

क्यों लिया विलय का फ़ैसला?

मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि अलग गुट बनाने में क़ानूनी अड़चनें आ रही थीं। इसलिए बागियों ने एक मौजूदा छोटी पार्टी में विलय का रास्ता चुना।

ममता के करीबी भी बागी बने

ममता बनर्जी के पुराने और करीबी नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने भी विद्रोही गुट को बड़ा समर्थन दिया। उन्होंने शनिवार को गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि बागी सांसदों और विधायकों की अपील से वे प्रभावित हुए। TMC के कुल 28 लोकसभा सांसद हैं, इसलिए 20 सांसदों के अलग होने से पार्टी काफी कमजोर हो गई है। मॉनसून सत्र से पहले विपक्ष की ताकत भी घट जाएगी।

पहले टीएमसी नेता मिले थे स्पीकर से

तृणमूल की सागरिका घोष और कीर्ति आज़ाद ने ओम बिड़ला से मुलाक़ात की और पार्टी के नंबर दो नेता और संसदीय दल के प्रमुख अभिषेक बनर्जी का एक पत्र सौंपा। इस पत्र में उनसे बागी गुट को स्वीकार न करने का आग्रह किया गया था, क्योंकि हमेशा राजनीतिक पार्टी ही सर्वोपरि होती है, न कि विधायी दल।

पत्र में लिखा, 'लोकसभा में विधायी दल का अस्तित्व राजनीतिक पार्टी से ही बनता है और वह उसी का एक हिस्सा होता है... कोई भी सदस्य या सदस्यों का समूह अपनी मर्ज़ी से उसी पार्टी का कोई समानांतर समूह या गुट नहीं बना सकता और सदन के भीतर स्वतंत्र मान्यता का दावा नहीं कर सकता।' 

अदालत के एक आदेश का हवाला देते हुए टीएमसी के पत्र में कहा गया है कि कानून किसी राजनीतिक पार्टी के प्रतिस्पर्धी समूहों में बंटने को स्वीकार्य मामला नहीं मानता है।

पत्र में लिखा है, 'स्पीकर राजनीतिक पार्टी को मान्यता देते हैं, न कि विरोधी गुटों को। अदालत ने कहा है कि जब दो या दो से अधिक गुट खुद को राजनीतिक पार्टी होने का दावा करते हैं तो स्पीकर को यह तय करना होता है कि दसवीं अनुसूची के पैरा 2(1) के तहत अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करने के मकसद से असली राजनीतिक पार्टी कौन सी है। इस तरह, यह प्रक्रिया एकमात्र असली राजनीतिक पार्टी की पहचान करने पर केंद्रित है- न कि किसी गुट को स्वतंत्र मान्यता देने पर।'

TMC में बदलाव

पार्टी में बगावत के बीच ममता बनर्जी ने संगठनात्मक बदलाव भी किए हैं। काकोली घोष दस्तीदार, सौगत रॉय और सुदीप बंद्योपाध्याय को महत्वपूर्ण पदों से हटा दिया गया है। अर्नब बनर्जी को तृणमूल यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया।
विधायक अलिफा अहमद को महिला विंग प्रमुख बनाया गया। कुणाल घोष को उत्तर कोलकाता जिला अध्यक्ष बनाया गया। सौगत रॉय को लोकसभा विंग का मुख्य सलाहकार बनाया गया।

बहरहाल, टीएमसी में बगावत की यह घटना हालिया चुनावी नतीजों के बाद आई है, जिसमें पार्टी को बड़ा झटका लगा। काकोली घोष दस्तीदार समेत कई नेताओं ने पार्टी की आंतरिक व्यवस्था, भ्रष्टाचार और नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। अब सबकी नज़रें इस पर हैं कि लोकसभा स्पीकर इस मामले में क्या फ़ैसला लेते हैं और क्या कुछ सांसदों की सदस्यता पर कोई कार्रवाई होती है। वैसे, सोशल मीडिया पर कई लोग कह रहे हैं कि नतीजा क्या निकलेगा, यह पहले से तय है। ताज़ा घटनाक्रम बंगाल की राजनीति में बहुत बड़ा भूकंप माना जा रहा है। TMC की अंदरूनी कलह ने अब पार्टी के टूटने की शक्ल ले ली है।