रोहित वेमुला को हॉस्टल से निकाला गया था। अंबेडकर की फोटो के साथ सबसे आगे रोहित
राजा वेमुला ने कहा- “क्लोजर रिपोर्ट से परिवार सदमे में है। तेलंगाना पुलिस की ज़िम्मेदारी यह जांच करना थी कि क्या मेरे भाई को इस हद तक परेशान किया गया कि उसने अपनी जान दे दी। इसके बजाय, वे फिर से उसकी जाति पर चले गए। हम इस मामले में चुप नहीं बैठेंगे, हम लड़ने जा रहे हैं।”
रोहित वेमुला और उनके साथी आंबेडकर छात्र संघ के बैनर तले यूनिवर्सिटी में आंदोलन चला रहे थे। एबीवीपी, बंडारू दत्तात्रेय, स्मृति ईरानी और राव के दबाव पर इन लोगों को न सिर्फ यूनिवर्सिटी से निलंबित किया गया, बल्कि इन्हें हॉस्टल से भी निकाल दिया गया। इसके बाद ये लोग भूख हड़ताल पर बैठ गए। रोहित वेमुला ने खुदकुशी करते हुए जो स्यूसाइड नोट छोड़ा था, उसी से सारी बातें साफ हो जाती हैं। इसमें उन्होंने एक दलित छात्र के संघर्ष का वर्णन किया था, और एक दलित के रूप में अपने जन्म को एक घातक दुर्घटना बताया था। रोहित वेमुला की मां और भाई ने पिछले दिनों बौद्ध धर्म स्वीकार किया था। इसी आधार पर पुलिस जांच अधिकारियों ने यह मान लिया कि रोहित वेमुला का परिवार दलित नहीं था और बाद में बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया। लेकिन इन लोगों को शायद यह नहीं मालूम है कि डॉ अंबेडकर ने भी बौद्ध धर्म स्वीकार किया था। इसी तरह कांशीराम और मायावती ने भी बौद्ध धर्म स्वीकार किया था। क्यों इन लोगों के बौद्ध धर्म स्वीकार करने से ये लोग दलित नहीं रहे। ज्यादातर दलित बौद्ध धर्म को ही स्वीकार करते हैं। दरअसल, यह साफ हो गया है कि तेलंगाना के कुछ पुलिस अफसरों ने पूरे मामले में खेल किया है। यह दलितों के खिलाफ कुत्सित मानसिकता का नतीजा है।