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फ़ाइल फ़ोटो

कृषि विधेयक: आरएसएस से जुड़ा संगठन विरोध में, कहा- जटिल हो जाएगा किसानों का जीवन

जिन कृषि विधेयकों की मोदी सरकार और बीजेपी खुलकर हिमायत कर रही है, उन्हें इसे लेकर अपने मातृ संगठन यानी आरएसएस के किसान संगठन के विचार भी ज़रूर सुन लेने चाहिए। क्योंकि बीजेपी इस मसले पर न तो धूप और कोरोना महामारी के दौरान सड़कों पर बैठे किसानों की बात सुनने के लिए तैयार है और न ही अपनी सबसे पुरानी सहयोगी- शिरोमणि अकाली दल की। 

वह सिर्फ़ ख़ुद को सही मान रही है और जम्हूरियत में बातचीत का जो रास्ता है, उस पर भी आने के लिए तैयार नहीं है। कम से कम वह किसान संगठनों से बात कर उनके शक-सुबहों को दूर कर सकती है लेकिन शायद किसानों से बात करने की सोच उसे नागवार गुजर रही है। 

किसानों के अलावा आरएसएस का किसान संगठन यानी भारतीय किसान संघ (बीकेएस) भी इन कृषि विधेयकों को लेकर बेहद निराश है। उसका साफ कहना है कि इनसे किसानों को बहुत ज़्यादा फायदा नहीं होगा और ये उनके जीवन को जटिल ही बनाएंगे। 

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बीकेएस के महासचिव बद्री नारायण चौधरी ने इंडिया टुडे के साथ बातचीत में कहा कि ये विधेयक कॉरपोरेट के पक्ष में ज़्यादा हैं। उन्होंने कहा, ‘हम इस मुद्दे पर किसानों के साथ हैं। बीकेएस सुधारों के ख़िलाफ़ नहीं है लेकिन किसानों की कुछ वाजिब चिंताए हैं।’ 

उन्होंने कहा, ‘ये विधेयक व्यापारियों के लिए काफ़ी उदार हैं। अब कोई भी शख़्स जिसके पास पैन कार्ड हो, वह व्यापारी बन सकता है और किसानों से उनकी उपज खरीद सकता है। इस क़ानून में यह व्यवस्था होनी चाहिए कि उसकी उपज की ख़रीद होते ही उसे भुगतान कर दिया जाएगा वरना सरकार को उसका गारंटर बनना चाहिए।’ 

चौधरी ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ये विधेयक कॉरपोरेट्स के व्यापार को आसान करने के लिए लाए जा रहे हैं। इंडिया टुडे की ओर से यह पूछे जाने पर कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने संसद में कहा है कि वर्तमान एमएसपी व्यवस्था जारी रहेगी, आरएसएस नेता ने कहा कि तो उन्हें इस बात को कागज पर लाना चाहिए। 
संघ से जुड़े नेता ने कहा कि देश में लगभग 80 फ़ीसदी किसान छोटे या हाशिए वाले वर्ग के हैं, ऐसे में एक भारत-एक मार्केट की नीति उनके लिए किसी काम की साबित नहीं होगी। यह या तो बड़े निगमों या फिर बड़े किसानों के लिए काम करेगी।

नौकरशाहों पर हमलावर

चौधरी ने कहा कि ये विधेयक छोटे किसानों की मुसीबतों के बारे में बात नहीं करता। चौधरी ने सवाल पूछा कि एनडीए सरकार 22 हज़ार नई मंडियों की बात कर रही है, लेकिन वे कहां हैं। संघ के नेता ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कृषि और खाद्य मंत्रालय को नौकरशाह चला रहे हैं और उन्हें ज़मीनी हालात के बारे में कोई जानकारी नहीं है। 

इस मुद्दे पर शिरोमणि अकाली दल के एनडीए छोड़ने को लेकर बीकेएस नेता ने कहा कि उनके संगठन का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि बीकेएस किसानों का संगठन है और हमेशा किसानों के मुनाफे की बात करता है। 

विरोध में प्रस्ताव पास 

उन्होंने कहा कि देश भर से 50 हज़ार किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर कहा है कि वे इस क़ानून को इसके वर्तमान रूप में नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि बीकेएस की गांव में काम करने वाली कई स्थानीय इकाइयों ने इसके विरोध में प्रस्ताव पास किया है और इस बारे में आरएसएस, बीजेपी से जुड़े लोगों और सरकार में बैठे नेताओं को भी बता दिया है। 

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विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे 

इंडिया टुडे द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें सरकार की ओर से कोई आश्वासन मिला है, चौधरी ने कहा कि सरकार में बैठे नेताओं के साथ उनकी इस मसले पर बैठक हुई है और हमने उनसे इनमें बदलाव करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि उनका संगठन किसानों के विरोध प्रदर्शन में शामिल होगा लेकिन हम हिंसक या उग्र नहीं होंगे। 

सवाल यह है कि जब आरएसएस से जुड़े संगठनों को इस बिल में आपत्तियां नज़र आ रही हैं, जब बीजेपी और मोदी सरकार उन्हें ही यह नहीं समझा पा रही है, तो वह किसानों को कैसे समझा पाएगी। लेकिन वह यह बताने पर तुली हुई है कि ये विधेयक किसानों के हित में ही हैं। 

बता दें कि कृषि विधेयकों को लेकर पंजाब और हरियाणा में किसान तपती सड़कों पर धरने पर बैठे हुए हैं। इन विधेयकों को काला क़ानून बताते हुए उन्होंने इन्हें वापस लेने की मांग की है और सरकार इन्हें उनके फ़ायदे वाला क़ानून बता रही है। 

किसान आंदोलन पर देखिए, क्या कहते हैं वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह। 

कृषि विधेयकों को लेकर संसद के दोनों सदनों के अलावा सड़क पर भी जोरदार विरोध हो रहा है। किसानों का कहना है कि वे इन विधेयकों को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे। 

मोदी बोले- किसान हितैषी हैं विधेयक 

भले ही बीकेएस इन विधेयकों के विरोध की बात कर रहा हो लेकिन सरकार अभी भी इन्हें किसान हितैषी ही बता रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को एक बार फिर कहा, ‘नए कृषि सुधारों ने किसान को ये आजादी दी है कि वो किसी को भी, कहीं पर भी अपनी फसल अपनी शर्तों पर बेच सकता है। उसे अगर मंडी में ज्यादा लाभ मिलेगा, तो वहां अपनी फसल बेचेगा। मंडी के अलावा कहीं और से ज्यादा लाभ मिल रहा होगा, तो वहां बेचने पर भी मनाही नहीं होगी।’

‘एमएसपी की व्यवस्था बनी रहेगी’

प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा, ‘मैं देश के प्रत्येक किसान को इस बात का भरोसा देता हूं कि एमएसपी की व्यवस्था जैसे पहले चली आ रही थी, वैसे ही चलती रहेगी। इसी तरह हर सीजन में सरकारी खरीद के लिए जिस तरह अभियान चलाया जाता है, वो भी पहले की तरह चलता रहेगा।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि कई जगह ये भी सवाल उठाया जा रहा है कि कृषि मंडियों का क्या होगा। उन्होंने इस सवाल के जवाब में कहा कि कृषि मंडियां कतई बंद नहीं होंगी। 

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