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एचडी कुमारस्वामी

अग्निपथ की आड़ में नाजी आंदोलन शुरू करना चाहता है संघः कुमारस्वामी

अग्निपथ को लेकर कर्नाटक के पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी का बीजेपी और आरएसएस पर तीखा हमला जारी है। सोमवार को उन्होंने फिर कहा कि अग्निपथ योजना भारतीय सेना पर नियंत्रण करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का एक छिपा हुआ एजेंडा है। अग्निवीर सेना के अंदर और बाहर भी आरएसएस कार्यकर्ता बन जाएंगे। सेवा समाप्त होने के बाद वो संघ के सैनिक रहेंगे। बीजेपी ने कुमारस्वामी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे सेना का अपमान बताया है।

पूर्व सीएम कुमारस्वामी ने कहा, क्या आरएसएस के नेता अब सेना में भर्ती होंगे? जिन 10 लाख लोगों की भर्ती की जाएगी, आरएसएस कार्यकर्ताओं को सेना में घुसाने की योजना है। वे 2.5 लाख आरएसएस कार्यकर्ताओं को सेना में भेज सकते हैं और उनका छिपा एजेंडा यह है कि 75% जिन्हें 11 लाख रुपये के साथ बाहर भेजा जाएगा, वे पूरे देश में फैलेंगे और संघ कार्यकर्ता बन जाएंगे। 
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कुमारस्वामी ने कहा, "अंदर और बाहर के लोग आरएसएस के होंगे। दरअसल, वे सेना पर आरएसएस के अधिग्रहण की योजना बना रहे हैं।

इस योजना को "आरएसएस का अग्निपथ" करार देते हुए कुमारस्वामी ने याद किया कि आरएसएस की स्थापना जर्मनी में हिटलर के नाजी शासन के समय की गई थी। शायद वे (आरएसएस) हमारे देश में उस (नाजी शासन) को लागू करना चाहते हैं, जिसके लिए उन्होंने अग्निपथ या अग्निवीर बनाया है।
यह दावा करते हुए कि आरएसएस भारत में "नाजी आंदोलन" चलाने की कोशिश कर रहा है, कुमारस्वामी ने कहा, इसलिए, वे अग्निपथ के साथ आए हैं और अग्निपथ देश को बना रहे हैं। 2.5 लाख लोग जिन्हें अग्निपथ में रखा गया है, वे तब आरएसएस के कार्यकर्ता होंगे। यही आरएसएस का छिपा हुआ एजेंडा है, और शेष 75% जो 4 साल बाद बाहर भेजे जाते हैं, उन्हें शेष भारत में फैला दिया जाएगा।

सशस्त्र बलों का अपमान:बीजेपी

बीजेपी नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, कहा, यह एक चौंकाने वाली और घृणित टिप्पणी है। यह आरएसएस या बीजेपी के लिए नहीं, बल्कि सेना और सशस्त्र बलों के अपमान के मकसद से की गई है।

पूनावाला ने कहा कि क्या इस देश के सशस्त्र बल अपने संस्थानों से इस तरह से समझौता करने देंगे? ये वही लोग हैं जिन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 बालाकोट एयरस्ट्राइक पर सवाल उठाया था। कुमारस्वामी ने जो कहा है वह इस देश के सशस्त्र बलों और संस्थानों का सीधा अपमान है।
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