भारत अमेरिका ट्रेड डील पर क्या गतिरोध टूटने वाला है? विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मार्को रुबियो से बातचीत की और दोनों ने ‘संपर्क में बने रहने’ पर सहमति जताई। दोनों के बीच अच्छी बातचीत का क्या संकेत है?
विदेश मंत्री एस जयशंकर और मार्को रुबियो। (फाइल फोटो)
भारत में अमेरिका के नये राजदूत सर्जियो गोर ने एक दिन पहले जिस ट्रेड डील पर नयी उम्मीद जगाई थी क्या अब वह अंतिम रूप लेने के बेहद क़रीब है? क्या इसका संकेत भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के ताज़ा बयान से मिलता है? विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की। उन्होंने खुद इसकी जानकारी दी और कहा कि दोनों नेताओं के बीच अच्छी बातचीत हुई है।
जयशंकर के अनुसार दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका के बीच कई अहम क्षेत्रों पर चर्चा की, जिसमें व्यापार, क्रिटिकल मिनरल्स, न्यूक्लियर एनर्जी, रक्षा और ऊर्जा शामिल हैं। जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट करके कहा, 'मार्को रुबियो से अच्छी बातचीत हुई। व्यापार, क्रिटिकल मिनरल्स, न्यूक्लियर सहयोग, रक्षा और ऊर्जा पर चर्चा की। इन मुद्दों और अन्य पर संपर्क में रहने पर सहमति हुई।'
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चर्चा में चल रहे व्यापार समझौते की पहली फेज पर बातचीत अंतिम चरण में होने के कयास लगाए जा रहे हैं। दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना से ज्यादा करके 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखते हैं, लेकिन अभी तक डील फाइनल नहीं हुई है।
जयशंकर और रुबियो की यह बातचीत व्यापार समझौते में अटके मुद्दों को सुलझाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार को ही नई दिल्ली में कहा था कि दोनों सरकारें व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में सक्रिय रूप से जुटी हैं।
सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका के लिए भारत सबसे अहम साझेदार है और अमेरिका के लिए कोई भी देश भारत जितना महत्वपूर्ण नहीं है।
ट्रंप और मोदी की दोस्ती असली: सर्जियो गोर
गोर ने बताया कि वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ दुनिया भर में घूम चुके हैं और वे पक्के तौर पर कह सकते हैं कि ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती असली है। गोर ने बताया कि पिछले हफ्ते उन्होंने ट्रंप से मुलाकात की, जहां ट्रंप ने फरवरी 2020 में भारत दौरे और मोदी के साथ अपनी दोस्ती के बारे में बात की। उन्होंने उम्मीद जताई कि ट्रंप जल्द ही, शायद अगले एक-दो साल में भारत आएंगे।
लुटनिक ने कहा था- मोदी ने फोन नहीं किया
हालाँकि, भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में कुछ तनाव भी है। अमेरिका ने पिछले साल अगस्त में भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया था। इसमें 25% सामान्य टैरिफ है और 25% अतिरिक्त पेनल्टी रूसी तेल खरीदने के कारण लगाया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्ती बरती है। इस बीच, अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने पहले कहा था कि ट्रेड डील में देरी इसलिए हुई क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप को फोन नहीं किया। लेकिन भारत के विदेश मंत्रालय ने इस दावे को गलत बताया और कहा कि मोदी और ट्रंप ने 2025 में 8 बार फोन पर बात की थी।
भारत पर भारी टैरिफ़
अभी भारत अमेरिकी बाजार में सबसे ज्यादा टैरिफ वाले देशों में शामिल है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए चुनौती है। खासकर टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे सेक्टर प्रभावित हुए हैं। लेकिन भारत अन्य देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर काम तेजी से कर रहा है। ओमान और न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ हाल ही में समझौते हुए हैं।
रुबियो से बातचीत का संदेश क्या?
जयशंकर की यह बातचीत रुबियो के साथ पहली प्रमुख बातचीत है, जो दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का संकेत देती है। दोनों पक्षों ने इन मुद्दों पर आगे संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई है। आने वाले दिनों में व्यापार समझौते की प्रगति पर नजर रहेगी, क्योंकि यह भारत-अमेरिका संबंधों का एक बड़ा अहम हिस्सा है।
यह बातचीत ईरान से जुड़े नए टैरिफ ख़तरे के बीच हुई है, जहां ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ की घोषणा की है। यदि यह नया टैरिफ़ लगता है तो भारत पर कुल टैरिफ 75% तक पहुंच सकता है। लेकिन यदि भारत और अमेरिका के बीच यह ट्रेड डील हुई तो भारत इस टैरिफ़ के दायरे से बाहर निकल सकता है।