SIR Punjab Raghav Chadha Jharkhand Probe: एसआईआर में 6 करोड़ से ज्यादा वोटरों के नाम हटने के बाद अब पंजाब और झारखंड में विवाद हो रहा है। पंजाब में बीजेपी सांसद राघव चड्ढा का नाम गायब है तो झारखंड में जांच का आदेश दिया गया है।
चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पंजाब में आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। वहीं झारखंड के गोड्डा जिले में एक बूथ पर 25 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए जमा किए गए Form 7 को लेकर प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
इन दोनों घटनाओं ने SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया, उसकी पारदर्शिता और राजनीतिक दुरुपयोग की आशंकाओं पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
राघव चड्ढा का नाम क्यों हटाया
पंजाब में 13 अगस्त को प्रकाशित SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम उन मतदाताओं की सूची में शामिल है, जिनके नाम Absent, Shifted, Deceased and Duplicate (ASDD) श्रेणी के तहत हटाए गए हैं। चड्ढा के नाम के सामने कारण ‘permanently shifted’ यानी स्थायी रूप से ट्रांसफर दर्ज है।
चड्ढा ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। उनका कहना है कि वह पंजाब से निर्वाचित राज्यसभा सांसद हैं और SIR के दौरान चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किए जाने चाहिए थे।
चड्ढा ने कहा कि अगर उनके नाम को लेकर कोई सवाल या आपत्ति थी तो उन्हें ड्राफ्ट सूची में शामिल कर दावों और आपत्तियों की अवधि के दौरान आवश्यक दस्तावेज लेने चाहिए थे। उनके मुताबिक, ऐसा नहीं किया गया और उनके मामले में आयोग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि यह महज क्लेरिकल गलती नहीं बल्कि “राजनीतिक प्रतिशोध” का मामला है।
चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का हवाला
चड्ढा ने SIR के लिए 24 जून 2025 को जारी विस्तृत दिशा-निर्देशों के पैराग्राफ 4(d) का हवाला दिया है। इसमें कहा गया था कि न्यायपालिका के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों, घोषित पदों पर बैठे लोगों तथा कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल और सार्वजनिक सेवा जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोगों के नाम, यदि वे पहले से चुनावी डेटाबेस में चिन्हित हों, तो ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किए जाएं ताकि दावों और आपत्तियों की अवधि में आवश्यक दस्तावेज लिए जा सकें।राघव चड्ढा के तर्क
चड्ढा का तर्क है कि वह पंजाब से मौजूदा सांसद हैं और इसलिए उनके नाम को ड्राफ्ट सूची से बाहर नहीं किया जाना चाहिए था। हालांकि, पंजाब सरकार ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है। एक वरिष्ठ पंजाब सरकार अधिकारी ने कहा कि SIR चुनाव आयोग की प्रक्रिया है और राज्य सरकार की इसमें नाम जोड़ने या हटाने में कोई भूमिका नहीं है। अधिकारी के मुताबिक, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त अधिकारी हैं।
- AAP ने भी चड्ढा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह दिल्ली में रह रहे हैं और अगर उन्होंने पंजाब की मतदाता सूची में अपना पंजीकरण बनाए रखा या स्थानांतरित किया, तो इसकी जिम्मेदारी उन्हीं की थी।
पहले पंजाब, अब दिल्ली में भी नाम नहीं मिलाः चड्ढा की मतदाता स्थिति को लेकर एक और सवाल तब उठा जब 2 सितंबर को चुनाव आयोग के Voter Services Portal पर उनके Voter ID विवरण से खोज करने पर दिल्ली और पंजाब दोनों जगह उनका रिकॉर्ड नहीं मिला।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में राज्यसभा चुनाव के समय चड्ढा ने अपने हलफनामे में दिल्ली के राजेंद्र नगर के बूथ नंबर 52 में मतदाता के रूप में पंजीकृत होने की जानकारी दी थी। बाद में पंजाब से राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उन्होंने अपना मतदाता पंजीकरण पंजाब में स्थानांतरित किया और 1 जून 2024 को लोकसभा चुनाव में मोहाली के एक बूथ पर मतदान किया था।
चड्ढा ने कहा है कि वह SIR के तहत उपलब्ध दावे-आपत्ति की प्रक्रिया का इस्तेमाल कर अपना नाम अंतिम मतदाता सूची में वापस दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं।
पंजाब की अंतिम SIR मतदाता सूची 12 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित होने वाली है। ड्राफ्ट सूची में जिन लोगों के नाम हटे हैं, उन्हें 13 अगस्त से 12 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल करने का अवसर दिया गया है।
पंजाब में 20.66 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से हटे
राघव चड्ढा का नाम हटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह पंजाब में SIR के दौरान ड्राफ्ट सूची से हटाए गए करीब 20.66 लाख मतदाताओं, यानी SIR से पहले के कुल मतदाताओं के लगभग 9.7 प्रतिशत, में शामिल हैं। देशभर में पिछले एक साल में SIR के तहत तैयार ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से अनुमानतः 13.37 करोड़ नाम हटाए गए हैं। यही बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की प्रक्रिया SIR को लेकर राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनी हुई है।
झारखंड में Form 7 को लेकर नया विवाद
SIR को लेकर दूसरा गंभीर मामला झारखंड के गोड्डा जिले के बसंतराय प्रखंड के महेशटिकरी गांव के बूथ नंबर 9 से सामने आया है। यहां मतदाताओं के नाम हटाने के लिए Form 7 जमा किए गए थे। मामले की खबर सामने आने के बाद जिला निर्वाचन अधिकारियों ने रिपोर्ट मांगी और जांच शुरू कर दी है। बसंतराय के प्रखंड विकास अधिकारी और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी श्रीमन मरांडी ने बताया कि जिला उप निर्वाचन अधिकारी ने रिपोर्ट मांगी है और एक प्रखंड पंचायती राज अधिकारी को महेशटिकरी भेजकर मौके पर जांच कराई गई है। रिपोर्ट गुरुवार को आने की उम्मीद है।
- प्रशासन ने फिलहाल जांच को बूथ नंबर 9 तक सीमित रखा है। स्थानीय स्तर पर दो-तीन अन्य स्थानों को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन उनके संबंध में प्रशासन को अभी लिखित शिकायत नहीं मिली है।
25 मतदाताओं के नाम हटाने के फॉर्म
बूथ नंबर 9 पर बीजेपी के बूथ लेवल एजेंट (BLA) संजीव कुमार रोशन की ओर से 25 मतदाताओं के खिलाफ Form 7 जमा किए गए थे। Form 7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने की आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। लेकिन स्थानीय स्तर पर जांच के दौरान महत्वपूर्ण बात सामने आई।
- प्रशासन के मुताबिक, इन 25 लोगों में से 24 मतदाता गांव में मौजूद थे और स्थायी निवासी थे। 25वां व्यक्ति भी गांव का रहने वाला था, लेकिन रोजगार के सिलसिले में दो-तीन महीने के लिए बाहर गया हुआ था। BLO ने प्रशासन को बताया कि वह इन लोगों को नियमित रूप से देखती हैं और वे गांव के स्थायी निवासी हैं।
- इससे यह सवाल उठता है कि अगर ये मतदाता वास्तव में अपने गांव में रह रहे हैं, तो उनके नाम हटाने के लिए Form 7 किस आधार पर जमा किए गए? हालांकि, प्रशासन ने अंतिम निष्कर्ष देने से पहले औपचारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कही है।
दूसरे बूथ पर 75 Form 7, BLA ने मौके पर जला दिए
गोड्डा मामले को और गंभीर बनाने वाली घटना पड़ोसी बूथ से सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, वहां बीजेपी का एक BLA 75 Form 7 लेकर पहुंचा था। BLO द्वारा सवाल पूछे जाने पर उस BLA ने कथित तौर पर उन फॉर्म को मौके पर ही जला दिया। इसी तरह झारखंड के कम से कम चार बूथों पर BLOs ने Form 7 के आवेदन स्वीकार करने से इनकार किया था। इन अधिकारियों ने फॉर्म को वास्तविक या निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना था। रिपोर्ट के मुताबिक, इन फॉर्म को बीजेपी के BLAs लेकर पहुंचे थे और जिन मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई थी, उनमें बड़ी संख्या अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की थी।