कॉकरोच जनता पार्टी ने 9-10 जुलाई को नेता विपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस को पत्र लिखकर समर्थन मांगा और जंतर मंतर पर बुलाया। आज 14 जुलाई तक उधर से कोई प्रतिक्रिया या जवाब नहीं आया। राहुल और कांग्रेस का ऐसा स्टैंड क्यों है, यह जानना ज़रूरी है।
राहुल गांधी और सोनम वांगचुकः मुद्दा एक लेकिन मंच अलग-अलग
मशहूर पर्यावरणवादी सोनम वांगचुक, कॉकरोच जनता पार्टी और नेता विपक्ष राहुल गांधी नीट पेपर लीक और छात्रों के मुद्दों पर एकजैसा आंदोलन चला रहे हैं। दोनों का मंच अलग-अलग है। वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी के मंच पर आमरण अनशन कर रहे हैं। आज मंगलवार 14 जुलाई को उनके आमरण अनशन का 17वां दिन है और उनकी हालत वाकई खराब है। 14 जुलाई को सोशल मीडिया पर अचानक इस तरह की पोस्ट और ट्वीट की बाढ़ आ गई, जिसमें यह मांग या सलाह दी जा रही थी कि नेता विपक्ष राहुल गांधी को जंतर मंतर पर जाकर सोनम वांगचुक का आमरण अनशन खत्म कराना चाहिए। दोनों का मुद्दा एकजैसा है।
14 जुलाई को ही कॉकरोच जनता पार्टी, प्रवक्ता सौरव दास और संस्थापक अभिजीत दिपके ने बताया कि पार्टी ने 9-10 जुलाई को नेता विपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस पार्टी, बीजेपी समेत तमाम राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर अपील की कि वे जंतर मंतर आकर आंदोलन का समर्थन करें। सोनम वांगचुक का अनशन खत्म कराएं। राहुल या कांग्रेस ने 14 जुलाई को इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं दिया। सीजेपी का कहना है कि सोनम वांगचुक का आंदोलन शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा घोटालों और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवाल उठा रहा है, इसलिए विपक्ष को खुलकर इसके साथ खड़ा होना चाहिए।
कांग्रेस का जवाब: हम पहले से लड़ रहे हैं
सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को लेकर हुए सवालों का जवाब राहुल के नज़दीक माने जाने वाले गुजरात प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी ने दिया। जिग्नेश ने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी सोनम वांगचुक या आंदोलनकारी युवाओं की आलोचना नहीं की। सोनम वांगचुक शिक्षा के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए सम्मानित व्यक्ति हैं और उनका स्वास्थ्य सभी के लिए चिंता का विषय है। कांग्रेस उनके उद्देश्य, लद्दाख के अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग के साथ खड़ी है। लेकिन यह कहना गलत है कि कांग्रेस इस मुद्दे से दूर रही है। हम साफ करना चाहेंगे कि एनएसयूआई और भारतीय युवक कांग्रेस लंबे समय से पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के खिलाफ देशभर में आंदोलन कर रही हैं। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने आंदोलन का नेतृत्व किया। मध्य प्रदेश में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज हुआ। राजस्थान सहित कई राज्यों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस कार्रवाई का सामना किया।'छात्रों की गूंज' अभियान का जिक्र
जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' अभियान शुरू किया, जिसके तहत देश के 28 प्रमुख छात्र शहरों में युवाओं से संवाद, बैठकें और प्रदर्शन आयोजित किए गए। उनका दावा है कि यह अभियान परीक्षा प्रणाली में सुधार, रोजगार और शिक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर चलाया जा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा, नीट प्रभावित छात्रों से मुलाकात, किसानों, हिंसा पीड़ित परिवारों और विभिन्न त्रासदियों से प्रभावित लोगों के बीच पहुंचने का भी उल्लेख किया और कहा कि कांग्रेस "दिखावे की राजनीति" नहीं बल्कि लगातार लोगों के साथ खड़े रहने में विश्वास करती है। मेवाणी ने कहा कि कांग्रेस सोनम वांगचुक के अनशन, एनएसयूआई और युवा कांग्रेस के आंदोलनों तथा युवाओं के सभी लोकतांत्रिक संघर्षों को एक-दूसरे का पूरक मानती है, न कि प्रतिस्पर्धी।
उत्तराखंड में 17 को रैली, अभी तक सरकार की अनुमति नहीं
कांग्रेस का कहना है कि पेपर लीक और नीट सहित शिक्षा संबंधी मुद्दों पर उसका अभियान जारी है। इसी क्रम में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 17 जुलाई को देहरादून में 'छात्र गूंज' आंदोलन के तहत छात्रों की एक रैली को संबोधित करने वाले हैं। हालांकि, उत्तराखंड कांग्रेस का आरोप है कि प्रशासन ने अब तक इस रैली की अनुमति नहीं दी है। प्रदेश कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे लगातार पुलिस और प्रशासन से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने साफ कर दिया है कि राहुल गांधी की 17 जुलाई को राहुल ज़रूर होगी। कोई रोक नहीं सकता।
कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर इतना संदेह क्यों है
सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी के मुद्दे का समर्थन किया और उनके मंच पर आमरण अनशन शुरू कर दिया। दूसरी तरफ सीजेपी को लेकर कांग्रेस समेत तमाम लोगों के दिमाग में कई सवाल हैं। उन सवालों के जवाब सीजेपी नहीं दे पा रही है। वरिष्ठ पत्रकार राजू पुरुलेकर जैसे बुद्धिजीवी इस मुद्दे पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवालः सोनम वांगचुक तो लद्दाख के मुद्दे पर भी आमरण अनशन कर चुके हैं। लेकिन सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके उनके साथ आमरण अनशन पर क्यों नहीं बैठे। क्या वांगचुक और दिपके इसे क्रमिक भूख हड़ताल में बदलकर आंदोलन को लंबा नहीं खींच सकते थे।
सीजेपी को लेकर खास बातें और सवाल
- अभिजीत दिपके पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं।
- क्या आम आदमी पार्टी "आरएसएस का सेफ्टी वाल्व" नहीं है। आप और कॉकरोच जैसे आंदोलनों के ज़रिए कांग्रेस की राजनीतिक जमीन को सीमित करने की कोशिश नहीं हो रही है।
- लद्दाख आंदोलन के दौरान गिरफ्तार होकर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) का सामना करने वाले सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति कैसे मिल गई। वो अभी-अभी छह महीना कैद में रहकर आए हैं।
- जब दूसरे आंदोलनों पर "जीरो टॉलरेंस" का रवैया सरकार अपनाए हुए है, तब सीजेपी को प्रशासन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपेक्षाकृत अधिक सहूलियत क्यों मिल रही है। सोशल मीडिया बैन हट चुका है।
- उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा जैसे आरोपियों के मुद्दे पर सीजेपी चुप क्यों है। यूएपीए जैसे काले कानून के खिलाफ सैकड़ों लोग जेलों में हैं। सीजेपी ने कभी उन पर कुछ नहीं कहा।
- पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई भी लंबे समय से आंदोलन कर रहा है, लेकिन उसके साथ पुलिस और मीडिया का व्यवहार अलग क्यों।
- अन्ना आंदोलन और लोकपाल-लोकायुक्त जैसे मुद्दों का बाद में क्या हुआ। इतिहास पहले त्रासदी और फिर प्रहसन के रूप में दोहराया जाता है। आज खुद अन्ना हजारे और अरविन्द केजरीवाल लोकपाल मुद्दे का जिक्र नहीं करना चाहते।
जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के धरना-प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस अवैध घोषित कर चुकी है। लेकिन जिन महिला पहलवानों के आंदोलन को बल प्रयोग करके खत्म करा दिया गया, उसी जगह कॉकरोचों को दिल्ली पुलिस हटा नहीं पा रही है। अभिजीत दिपके के भारत पर जिस तरह दिल्ली एयरपोर्ट पर उन्हें दिल्ली पुलिस ने अनुमति दी थी, उसकी भी खासी चर्चा रही है।
सोनम वांगचुक के आमरण अनशन के बीच विपक्षी राजनीति में यह बहस तेज हो गई है कि विभिन्न छात्र और जन आंदोलनों के बीच विपक्षी दलों की भूमिका क्या होनी चाहिए। एक ओर सीजेपी कांग्रेस नेतृत्व से खुलकर समर्थन मांग रही है। क्योंकि उसे कांग्रेस की ताकत मालूम है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि वह पहले से ही शिक्षा, पेपर लीक, रोजगार और युवाओं के मुद्दों पर देशव्यापी अभियान चला रही है और सोनम वांगचुक के उद्देश्य के साथ भी उसकी सहमति है। लेकिन कांग्रेस क्यों चाहेगी कि कोई उनका इस्तेमाल कर अपनी ज़मीन मज़बूत करे।
सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस में नेताओं का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो चाहता है कि राहुल गांधी जंतर मंतर जाकर सोनम वांगचुक का आमरण अनशन खत्म कराएं। ऐसे नेताओं का मानना है कि हमारी चिन्ता सोनम वांगचुक हैं, कॉकरोच नहीं हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, आप प्रमुख अरविन्द केजरीवाल समेत तमाम नेताओं ने वांगचुक और सीजेपी के आंदोलन का समर्थन किया है। ऐसे में राहुल गांधी और कांग्रेस को पीछे नहीं रहना चाहिए।
अखिलेश यादव की सोनम वांगचुक से अपील
सोनम वांगचुक से आमरण अनशन तोड़ने की अपील करते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि जिस भाजपा सरकार को जगाने के लिए वो आमरण अनशन पर हैं वो तो एक सिद्धांतहीन, भ्रष्ट तंत्र है, उसकी असंवेदनशीलता और हृदयहीनता में किसी के भी त्याग का कोई महत्व नहीं है अत: भाजपाइयों से सदाचार और हृदय-परिवर्तन की कोई भी अपेक्षा निरर्थक है। भाजपाइयों के लिए किसी के जीवन का कोई भी मोल नहीं है। उनके लिए धन ही प्रधान है। वो भ्रष्टाचार से कमाए पैसों के घमंड में चूर हैं। उनमें बदलाव की आशा करना ही व्यर्थ है। जिनमें अहंकार होता है उनमें परिष्कार नहीं होता। ‘सत्याग्रह’ का महत्व वो क्या जानें जो ‘सत्ताग्रह’ के लालच में मंदिर तक लूट ले रहे हैं। उन्हें न युवाओं के भविष्य से कुछ लेना-देना है, न उनके माता-पिता और अन्य परिजनों के सपनों से, वो तो ख़ुदगर्ज़ लोग हैं।
20 जुलाई के संसद मार्च पर लोगों की नज़रें
सीजेपी ने इस मुद्दे पर 20 जुलाई को संसद मार्च घोषित किया है। ज़ाहिर सी बात है कि दिल्ली पुलिस उन्हें रोकेगी। लाठीचार्ज हो सकता है। उसी दिन संसद सत्र है। इस बार संसद में अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी और नीट पेपर लीक का मुद्दा गरम रहेगा। ऐसे में सीजेपी को प्रचार का पूरा मौका मिलेगा।
सोनम वांगचुक का आमरण अनशन खत्म होना चाहिए
बहरहा, सोनम वांगचुक का आमरण अनशन खत्म होना चाहिए। उसके लिए राहुल गांधी या कांग्रेस के किसी भी बड़े नेता का इंतज़ार क्यों। जिस तरह सोनम ने शुरुआत की थी, उसी तरह खत्म भी कर सकते हैं। उनके सामने लद्दाख और पर्यावरण जैसे बड़े मुद्दे हैं। नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के लिए सीजेपी और कांग्रेस काफी हैं।