सोनिया गांधी की किताब ‘Belonging’ को लेकर कांग्रेस नेताओं ने पेंगुइन इंडिया रैंडम हाउस पर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा Penguin India मोदी, RSS और चीन से जुड़े हिस्से हटाना चाहता था। बहरहाल, किताब का eBook संस्करण अमेजन पर प्रीऑर्डर के लिए उपलब्ध है।
सोनिया गांधी की किताब अमेजन पर ईबुक के रूप में प्रीऑर्डर के लिए उपलब्ध
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संस्मरण ‘Belonging: A Journey of Love’ के भारत में प्रकाशन को लेकर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया है कि प्रकाशक Penguin Random House India पर दबाव था कि वह किताब की पांडुलिपि से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और मोदी सरकार के कार्यकाल में चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर कथित कब्जे से जुड़े हिस्सों को हटाए।
यह विवाद उस खबर के एक दिन बाद सामने आया है जिसमें बताया गया था कि Penguin Random House India भारत में सोनिया गांधी की किताब प्रकाशित नहीं करेगा। इससे पहले अमेरिकी प्रकाशक Alfred A. Knopf, जो Knopf Doubleday Publishing Group का हिस्सा है और Penguin Random House से जुड़ा है, ने किताब के 10 नवंबर 2026 को रिलीज होने की घोषणा की थी।
कांग्रेस का आरोप- सरकार के दबाव पर पीछे हटा पेंगुइन
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने The Indian Express से बातचीत में दावा किया कि प्रकाशक की मुख्य आपत्ति किताब में चीन, नरेंद्र मोदी और RSS से संबंधित हिस्सों को लेकर थी। गहलोत ने कहा कि प्रकाशक जिन हिस्सों को संपादित या हटाना चाहता था, उनमें चीन, मोदी और RSS से जुड़े विषय प्रमुख थे। उनके मुताबिक इसके पीछे सरकार का हस्तक्षेप है और इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करना है।गहलोत ने कहा कि सोनिया गांधी कोई सामान्य कहानी नहीं लिख रही हैं, बल्कि अपने जीवन और अनुभवों के बारे में तथ्य लिख रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी व्यक्ति को अपने जीवन के अनुभव और तथ्यों को लिखने से कैसे रोका जा सकता है।
हालांकि, गहलोत ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने सोनिया गांधी की पांडुलिपि नहीं देखी या पढ़ी है और न ही इस मुद्दे पर सोनिया गांधी से उनकी बातचीत हुई है। इसलिए उनके दावे प्रत्यक्ष रूप से पांडुलिपि देखने पर आधारित नहीं हैं। इससे पहले अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी इस विवाद को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसी कौन-सी वजह या दबाव है जिसके कारण दुनिया के दूसरे हिस्सों में प्रकाशित होने वाली सामग्री को भारत में प्रकाशित नहीं किया जा सकता। गहलोत ने सोनिया गांधी के राजनीतिक जीवन की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका जीवन त्याग और समर्पण का उदाहरण है तथा जिस गरिमा और निष्ठा के साथ उन्होंने देश की सेवा की, वह अनुकरणीय है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सोनिया गांधी देश की एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता रही हैं और उनके अनुभवों पर आधारित संस्मरण को प्रकाशित करने में सेंसरशिप नहीं होनी चाहिए।
लोकसभा में विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई ने पेंगुइन के बयान को कमजोर बताया और आरोप लगाया कि सरकार में कुछ लोग सोनिया गांधी की किताब के भारत में पढ़े जाने से चिंतित हैं। कांग्रेस और उसके संगठनों ने सोशल मीडिया पर भी पेंगुइन के खिलाफ अभियान छेड़ दिया।
कमलनाथ ने भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने भी इस पूरे विवाद पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि Penguin का फैसला “अत्यंत चिंता का विषय” है। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रकाशक यह तय करेगा कि सोनिया गांधी जैसी वरिष्ठ राजनीतिक हस्ती क्या लिखेंगी और क्या नहीं लिखेंगी। कमलनाथ ने यह सवाल भी उठाया कि क्या प्रकाशक अपने स्तर पर यह निर्णय ले रहा है या उस पर किसी तरह का दबाव है। कमलनाथ ने मांग की कि सोनिया गांधी की आत्मकथा जल्द प्रकाशित होनी चाहिए।भारत में अब दूसरा प्रकाशक लाएगा किताब
Penguin Random House India के इस विवाद से बाहर होने के बाद अब कई भारतीय प्रकाशकों की इस किताब को प्रकाशित करने में दिलचस्पी बताई जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, HarperCollins भारत में किताब के प्रकाशन और वितरण के समझौते को अंतिम रूप देने के करीब है। ऐसे में Penguin के साथ विवाद के बावजूद भारत में किताब का प्रकाशन रुकने की संभावना नहीं दिख रही है।ईबुक/किंडल संस्करण के लिए कहां करे प्रीऑर्डर
सोनिया गांधी की किताब को यूके में HarperCollins UK के imprint William Collins ला रहा है। वहां भी किताब 10 नवंबर 2026 को आएगी। लेकिन Amazon India पर किताब का eBook भी प्री-ऑर्डर के लिए सूचीबद्ध है।
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- अमेजन पर प्रीऑर्डर में किताब के किंडल एडिशन का दाम 2615 रुपये है।
- किताब के विवरण में इसे एक ऐसी संस्मरणात्मक रचना बताया गया है जिसमें निजी जीवन और राजनीति को एक साथ बुना गया है। इसमें प्रेम, परिवार और भारत की कहानी को सोनिया गांधी के व्यक्तिगत अनुभवों के जरिए पेश किया गया है। किताब का केंद्रीय सवाल यह है कि इटली के एक छोटे से गांव से आने वाली एक लड़की कैसे भारत आई, भारतीय राजनीति में एक प्रमुख नेता बनी और दुनिया भर में पहचानी जाने लगी।
संपादकीय अधिकार बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल
सोनिया गांधी की किताब को लेकर उठा विवाद अब केवल एक पुस्तक के प्रकाशन का मामला नहीं रह गया है। इसके केंद्र में यह सवाल है कि प्रकाशक को तथ्य-जांच और संपादकीय संपादन के अधिकार की सीमा कहां तक होनी चाहिए और राजनीतिक रूप से संवेदनशील सामग्री के मामले में लेखक की स्वतंत्रता कितनी सुरक्षित रहनी चाहिए।Penguin का कहना है कि तथ्य-जांच और संपादकीय सुझाव प्रकाशन प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। लेकिन वो ये बताने को तैयार नहीं है कि आखिर किस तरह का बदलाव वो करना चाहता था। उसका यह कहना कि उसकी और लेखिका के बीच बातचीत हुई है लेकिन वो बातें सीक्रेट (गुप्त) हैं, इसलिए सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। यहां पर सवाल फिर ये उठता है कि भारत से बाहर पेंगुइन इसे बिना किसी काट-छांट के फिर कैसे प्रकाशित कर रहा है। अमेरिका में भी किताब 10 नवंबर को आएगी। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मोदी, RSS और चीन से संबंधित सामग्री को हटाने की कोशिश के पीछे सरकारी दबाव है। अभी तक किताब की लेखिका सोनिया गांधी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यह विवाद सिर्फ एक किताब का नहीं है
सोनिया गांधी की किताब पर विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत में राजनीतिक रूप से संवेदनशील किताबों के प्रकाशन और वितरण को लेकर पहले भी बहस होती रही है। द इंडियन एक्सप्रेस ने याद दिलाया कि इस साल पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब ‘Four Stars of Destiny’ को लेकर भी पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की भूमिका विवाद में रही थी। इसी तरह लेखक और ग्राफिक नॉवेलिस्ट जो सैको की मुजफ्फरनगर दंगों पर आधारित किताब ‘The Once and Future Riot’ को भी पेंगुइन ने कानूनी जांच के दौरान उठे कंटेंट संबंधी मुद्दों के बाद आगे प्रकाशित नहीं किया था।सोनिया गांधी ने क्या लिखा है, पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं
सोनिया गांधी की किताब की पूरी पांडुलिपि सार्वजनिक नहीं हुई है। इसलिए मोदी, RSS और चीन से संबंधित कथित अंशों में वास्तव में क्या लिखा गया है और प्रकाशक ने किन विशिष्ट हिस्सों में बदलाव का सुझाव दिया था, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है। विवाद की शुरुआत उस रिपोर्ट से हुई जिसमें कहा गया था कि Penguin Random House India ने पांडुलिपि के एक हिस्से में “editorial changes and deletions” की मांग की थी। सोनिया गांधी इन बदलावों के लिए तैयार नहीं हुईं। इसके बाद भारत में Penguin के जरिए किताब के प्रकाशन पर स्थिति बदल गई।एक नज़र इस पर भी
किताब: Belonging: A Journey of Love
लेखक: सोनिया गांधी
रिलीज: 10 नवंबर 2026
अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक: William Collins, HarperCollins UK
भारत में संभावित प्रकाशक: HarperCollins