केंद्र सरकार ने वार्षिक और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुटे स्कूली छात्रों से ‘विकसित भारत’ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी स्कूली गतिविधियों में भाग लेने को कहा है। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परीक्षा तनाव पर केंद्रित कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ (पीपीसी) से पहले की जा रही है। इसी वजह से छात्र और टीचर पसोपेश में हैं कि सालाना परीक्षा की तैयारी ज़रूरी है या फिर इस तरह की गतिविधियों से सरकार का प्रचार करें और इसी महीने होने वाली परीक्षा पे चर्चा 2026 की तैयारी करें। 
शिक्षा मंत्रालय के निर्देशानुसार, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने सोमवार को अपने सभी 31,000 संबद्ध विद्यालयों को पत्र लिखकर 12 से 23 जनवरी तक विभिन्न गतिविधियों का आयोजन करने को कहा। पीएम मोदी का कार्यक्रम 'परीक्षा पे चर्चा' (पीपीसी) इसी महीने के अंतिम सप्ताह में आयोजित किया जाएगा। सीबीएसई ने स्कूलों से इन गतिविधियों में शिरकत करने और उनकी तस्वीरें व संक्षिप्त विवरण सोशल मीडिया पर #SwadeshiPPC हैशटैग के साथ साझा करने का आग्रह किया है।
इन गतिविधियों की शुरुआत सोमवार को ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ से हुई, जिसे आत्मनिर्भरता के लिए एक दौड़ के रूप में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान छात्रों से ‘लोकल फॉर वोकल’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘एक जिला, एक उत्पाद’ जैसी राष्ट्रीय पहलों के समर्थन का संकल्प दिलाया गया।
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स्कूलों में जो संकल्पपत्र भेजा गया, उसमें कहा गया है कि “समर्पण और राष्ट्रीय गौरव के साथ, मैं माननीय प्रधानमंत्री के एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत 2047 के विज़न को साकार करने में योगदान देने का संकल्प लेता/लेती हूं।” स्कूलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे 23 जनवरी को चुने हुए छात्रों को जिले के नामित केंद्रीय विद्यालयों में भेजें, जहां ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आधारित क्विज प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
सीबीएसई के पत्र में कहा गया है, “आपसे अनुरोध है कि छात्रों को सभी गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें और कार्यक्रम की समाप्ति के बाद आयोजित गतिविधियों की रिपोर्ट पेश करें…।” अन्य प्रस्तावित गतिविधियों में वंदे मातरम् का पाठ, खो-खो, कबड्डी और शतरंज जैसे खेलों का आयोजन, परीक्षा तनाव और कौशल विकास से जुड़े लघु नाटकों का मंचन, योग सत्र, तथा भारत की सांस्कृतिक विरासत पर गद्य और कविता प्रतियोगिताएं शामिल हैं।

इसके अलावा, स्कूलों से यह भी अपेक्षा की गई है कि वे ‘परीक्षा पे चर्चा’ के “पॉजिटिव प्रभाव” पर छात्रों के विचारों वाले छोटे वीडियो तैयार करें।

हालांकि, कुछ शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन ने इन गतिविधि की वजह से बढ़ते बोझ पर चिंता जताई है। एक निजी स्कूल के प्राचार्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “सरकार की ओर से निर्देशित कार्यक्रमों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे पढ़ाई का समय प्रभावित हो रहा है। स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े कुछ कार्यक्रम उपयोगी होते हैं, लेकिन हर सप्ताह इस तरह के आयोजन कराना स्कूलों और छात्रों दोनों के लिए बड़ा बोझ बनता जा रहा है।”
एक केंद्रीय विद्यालय के शिक्षक ने बताया कि कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं फरवरी के मध्य से शुरू होनी हैं। उन्होंने कहा, “छात्रों को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए समय चाहिए। अगर 23 जनवरी तक उन्हें इन सभी गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाएगा, तो उनकी एकाग्रता प्रभावित होना तय है।”