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सुप्रीम कोर्ट ने परमबीर सिंह से कहा- जो लोग शीशे के घरों में रहते हैं…

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान बेहद अहम टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने परमबीर सिंह से कहा, “30 साल से ज़्यादा वक़्त तक पुलिस बल में नौकरी करने के बाद भी क्या आपको महाराष्ट्र पुलिस पर भरोसा नहीं है। यह बेहद हैरान करने वाली बात है।” 

शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया। परमबीर सिंह ने अपनी याचिका में उनके ख़िलाफ़ दर्ज किए गए सभी मामलों को सीबीआई को ट्रांसफ़र करने की मांग की थी। 

 

कुछ महीने पहले उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटक मिलने के मामले में महाराष्ट्र सरकार ने परमबीर सिंह को मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हटा दिया था। 

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परमबीर सिंह का उद्धव को पत्र 

इसके बाद परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि देशमुख ने मुंबई पुलिस के पूर्व अफ़सर सचिन वाजे को हर महीने बार और रेस्तरां से 100 करोड़ रुपये की उगाही करने के लिए कहा था। हालांकि देशमुख ने कहा था कि उन्होंने कुछ भी ग़लत नहीं किया है लेकिन उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था। 

परमबीर सिंह ने दावा किया था कि उनकी ओर से देशमुख के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। अपनी याचिका में परमबीर सिंह ने शीर्ष अदालत से मांग की थी कि उनके ख़िलाफ़ चल रहे मामलों को सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया जाए। 

Supreme Court in Param Bir Singh case - Satya Hindi

वकील की दलील 

सुनवाई के दौरान परमबीर सिंह के वकील महेश जेठमलानी ने शीर्ष अदालत से कहा कि एक जांच अफ़सर उनके मुवक्किल पर अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ जारी किए गए पत्र को वापस लेने के लिए दबाव बना रहा है। जेठमलानी ने कहा कि इस जांच अफ़सर ने कहा है कि वरना वह परमबीर सिंह के ख़िलाफ़ और केस दर्ज कर देगा। 

जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस वी.रामासुब्रमण्यन ने उनकी इस दलील के जवाब में कहा, “यह आम कहावत है कि जो लोग शीशे के घरों में रहते हैं, उन्हें दूसरे के घरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए।” 

‘कहानियां बनाना बंद करिए 

जब महेश जेठमलानी ने अदालत को बताया कि पैसे उगाहने का काम जारी है, जिसके बारे में परमबीर सिंह ने पत्र जारी कर बताया था तो शीर्ष अदालत की ओर से तीख़ा जवाब दिया गया। अदालत ने कहा, “उस वक़्त आप पुलिस आयुक्त थे, आपने इसे रोकने के लिए क्या क़दम उठाए थे। अगर डीजीपी की रैंक के किसी शख़्स पर दबाव बनाया जा सकता है तो फिर ऐसा कोई नहीं है जिस पर दबाव न बनाया जा सके। आप कहानियां बनाना बंद करिए।” 

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अदालत ने महेश जेठमलानी द्वारा उनके मुवक्किल के ख़िलाफ़ दर्ज मामलों को ट्रांसफ़र करने की मांग पर कहा, “ये दो अलग-अलग बातें हैं। पूर्व मंत्री के ख़िलाफ़ जांच अलग है और पुलिस आयुक्त के ख़िलाफ़ जो जांच चल रही है, वह अलग है। आपने पुलिस बल में 30 साल तक नौकरी की है, आपको उस पर शक नहीं होना चाहिए। आप अब यह नहीं कह सकते कि आप चाहते हैं कि इन मामलों की जांच राज्य से बाहर की जाए।” 
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