सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर कहा गया है कि चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया, वोटर लिस्ट से नाम हटाने जैसे मुद्दों के ख़िलाफ राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की याचिका पर CJI सूर्यकांत की पीठ सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई कर सकती है।
एसआईआर के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च (फाइल फोटो)
चुनाव आयोग के SIR, फॉर्म-6, वोटर लिस्ट, EVM की समीक्षा जैसे 10 मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन की याचिका पर आज यानी गुरुवार को सुनवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक मामले को गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ इस मामले पर सुनवाई कर सकती है। इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। विपक्ष ने SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने, हटाए गए मतदाताओं की बूथवार सूची जारी करने और एक स्वतंत्र समिति से मतदाता सूची के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
राहुल गांधी सहित INDIA गठबंधन के 11 नेताओं ने चुनाव आयोग के SIR से जुड़े फ़ैसलों को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की है। विपक्षी नेताओं ने अदालत से चुनाव आयोग के फैसलों से जुड़े सभी आंतरिक रिकॉर्ड और दस्तावेज मंगाने की मांग की है। उनका कहना है कि मतदाता सूची में नाम हटाने और उसमें बदलाव करने की प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी मतदाता का नाम बिना उचित प्रक्रिया के नहीं हटाया जाए।
SIR की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि मामले में उठाए गए सवालों पर अंतिम फैसला आने तक चल रही SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई जाए। विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने और उसमें संशोधन करने से जुड़े फैसलों की जांच जरूरी है। इसलिए अदालत को इस प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड तलब करके यह देखना चाहिए कि चुनाव आयोग ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल किस तरह किया।
याचिका में चुनाव आयोग के विवादित फैसलों से संबंधित सभी आंतरिक दस्तावेज और रिकॉर्ड अदालत में पेश कराने की मांग भी की गई है।
हटाए गए वोटरों की सूची सार्वजनिक हो
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की बूथवार सूची प्रकाशित की जाए। याचिका में कहा गया है कि सूची में यह भी बताया जाना चाहिए कि प्रत्येक मतदाता का नाम किस कारण हटाया गया। इसके साथ ही संबंधित मतदाताओं के जनसांख्यिकीय विवरण भी सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
विपक्ष का जोर इस बात पर है कि नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। यदि किसी मतदाता का नाम सूची से हटाया जाता है, तो उसके पीछे का कारण स्पष्ट होना चाहिए, ताकि प्रभावित व्यक्ति उस फैसले को समझ सके और जरूरत पड़ने पर उसे चुनौती दे सके। मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की बूथवार सूची प्रकाशित करने की मांग का उद्देश्य मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों की निगरानी को आसान बनाना है। बूथवार जानकारी सार्वजनिक होने से यह पता लगाया जा सकेगा कि किन क्षेत्रों में कितने नाम हटाए गए और इसके लिए क्या कारण बताए गए।
बिना नोटिस और सुनवाई के नाम नहीं हटाने की मांग
याचिका में यह भी मांग की गई है कि किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे नोटिस दिया जाए और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले। विपक्षी नेताओं ने अदालत से ऐसे निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है, जिनसे यह सुनिश्चित हो कि किसी मतदाता को बिना सूचना दिए और उसकी बात सुने बिना मतदाता सूची से बाहर न किया जाए।यह मांग इसलिए अहम है क्योंकि मतदाता सूची में नाम दर्ज होना चुनाव में मतदान करने के लिए जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति का नाम सूची से हट जाता है, तो वह संबंधित चुनाव में वोट देने के अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। याचिका में इस प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों की जांच करने और यह सुनिश्चित करने की मांग की गई है कि मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले।
स्वतंत्र समिति मतदाता सूची का ऑडिट करे
विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से एक स्वतंत्र समिति गठित करने का भी अनुरोध किया है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपने की मांग की गई है। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य सदस्यों को भी शामिल करने का प्रस्ताव है।याचिका के मुताबिक, समिति को मतदाता सूची के डेटाबेस में नाम हटाने और बदलाव करने की प्रक्रिया का ऑडिट करना चाहिए। इसमें ECINET और ERONET जैसे चुनावी डेटाबेस की जांच भी शामिल होनी चाहिए। इस मांग का उद्देश्य यह पता लगाना है कि मतदाता सूची में किए गए बदलाव किस प्रक्रिया के तहत हुए और क्या उन बदलावों में किसी तरह की गड़बड़ियाँ हुईं।
ECI के संवैधानिक अधिकारों पर भी सवाल
याचिका में चुनाव आयोग के फैसलों की संवैधानिक वैधता की भी जांच करने की मांग की गई है। विपक्षी नेताओं ने अदालत से यह देखने का अनुरोध किया है कि आयोग के फ़ैसले संविधान के अनुच्छेद 324 और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति तथा सेवा शर्तों से जुड़े 2023 के कानून के अनुरूप हैं या नहीं।
संविधान का अनुच्छेद 324 चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी चुनाव आयोग को सौंपता है। याचिका में इस प्रावधान के संदर्भ में आयोग के अधिकारों और उसके फैसलों की जांच की मांग की गई है। विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के टी.एन. शेषन मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया है। याचिका में अदालत से यह जाँचने का अनुरोध किया गया है कि चुनाव आयोग के मौजूदा फैसले संबंधित कानूनी और संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप हैं या नहीं।
ECI से जुड़े इन मुद्दों पर अदालत की सुनवाई महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि मामला केवल मतदाता सूची में बदलाव तक सीमित नहीं है। इसमें चुनाव आयोग के अधिकारों, उसकी कार्यप्रणाली और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवाल भी शामिल हैं।
चुनाव आयोग के आंतरिक रिकॉर्ड मंगाने की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से चुनाव आयोग के उन सभी आंतरिक रिकॉर्ड और दस्तावेजों को तलब करने की मांग की गई है, जिनके आधार पर विवादित फैसले लिए गए। विपक्षी नेताओं का अनुरोध है कि इन रिकॉर्डों की जांच से यह स्पष्ट हो सके कि मतदाता सूची से नाम हटाने और संशोधन करने के फैसले किस आधार पर लिए गए। यदि अदालत दस्तावेज मंगाने का आदेश देती है, तो सुनवाई के दौरान इन रिकॉर्डों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिका पर संभावित सुनवाई से SIR को लेकर चल रही बहस को नया कानूनी मोड़ मिल सकता है। विपक्ष की मांगें मुख्य रूप से चार मुद्दों पर केंद्रित हैं—SIR पर अंतरिम रोक, हटाए गए मतदाताओं की बूथवार सूची और कारणों का प्रकाशन, स्वतंत्र समिति से डेटाबेस का ऑडिट और नाम हटाने से पहले नोटिस तथा सुनवाई का अवसर सुनिश्चित करना। इसके अलावा, चुनाव आयोग के संवैधानिक अधिकारों और उसके फैसलों की वैधता पर भी अदालत से विचार करने का अनुरोध किया गया है।