सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर की सजा को बहाल कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर को जमानत दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने उसे रद्द कर दिया। उसने हाईकोर्ट को दो महीने के भीतर सेंगर की अपील पर फैसला करने का निर्देश दिया।
उन्नाव रेप केस में मुजरिम पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर
सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा को बहाल कर दिया है। यानी मुजरिम को जेल में ही रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सेंगर की सजा को निलंबित कर उन्हें जमानत पर रिहा किया गया था।
चीफ जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सीबीआई की अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट मुख्य अपील का फैसला दो महीने के अंदर लेने की कोशिश करे। अगर अपील में देरी होती है तो सजा निलंबन के नए आवेदन पर पुनर्विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होने से पहले उचित आदेश पारित करने को कहा।
कोर्ट ने आदेश में कहाः “हम अपील स्वीकार करते हैं। आदेश रद्द किया जाता है। हाईकोर्ट मुख्य अपील को दो महीने के अंदर तय करने का प्रयास करे। अगर अपील जल्द सुनवाई योग्य नहीं है तो सजा निलंबन के आवेदन पर नया आदेश पारित किया जाए। हम मेरिट पर कोई राय नहीं व्यक्त कर रहे हैं और न ही सजा निलंबन के आवेदन पर इस आदेश का प्रभाव पड़ेगा।”
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट की उस टिप्पणी पर नाराजगी जताई, जिसमें उसने कहा था कि POCSO एक्ट के तहत बहुत गंभीर यौन अपराध (*aggravated penetrative sexual assault) का मामला सेंगर पर नहीं बनता, ऐसा प्रथम दृष्टया माना गया था। aggravated penetrative sexual assault का आसान अर्थ यह है कि शरीर के प्राइवेट पार्ट के अंदर कोई चीज डालकर यौन शोषण करना।
जस्टिस बागची ने कहा, “हम हाईकोर्ट के हाइपर-टेक्निकल निष्कर्ष का समर्थन नहीं करते। यह एक दंडात्मक कानून है जो बच्चों को यौन शोषण से बचाता है।”
सेंगर की ओर से वरिष्ठ वकील एन. हरिहरन ने तर्क दिया कि पीड़िता नाबालिग नहीं थी। उन्होंने कहा, “मैं साबित कर सकता हूं कि पीड़िता नाबालिग नहीं है। AIIMS बोर्ड की रिपोर्ट सेंगर के पक्ष में है, फिर भी वह जेल में है।”
मामला क्या है?
यह मामला 2017 का है। 17 वर्षीय लड़की का कथित तौर पर अपहरण कर 11 से 20 जून 2017 के बीच रेप किया गया। फिर उसे 60 हज़ार रुपये में बेच दिया गया। पुलिस ने उसे माखी क्षेत्र से बरामद किया था। पीड़िता ने रिपोर्ट दर्ज कराना चाही तो तत्कालीन बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के निर्देश पर पुलिस अधिकारियों ने उसे चुप रहने की धमकी दी। एफआईआर भी दर्ज नहीं की गई। लेकिन अदालत के दखल पर सेंगर के खिलाफ रेप, अपहरण, आपराधिक धमकी और POCSO एक्ट की धाराओं के तहत FIR दर्ज हुई। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर उसकी गिरफ्तारी हुई थी।
2019 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप से जुड़े चार मामलों की सुनवाई दिल्ली ट्रांसफर कर दी और इसे रोजाना आधार पर 45 दिनों में पूरा करने का आदेश दिया। दिसंबर 2019 में ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा और ₹25 लाख का जुर्माना लगाया। सेंगर ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की, जो अभी लंबित है।
दिसंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उनकी अपील लंबित रहते सजा निलंबित कर दी और शर्तें लगाईं कि वे पीड़िता के 5 किलोमीटर के दायरे में नहीं जाएंगे और दिल्ली में रहेंगे। सीबीआई ने इसी अंतरिम आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर शुक्रवार को फैसला आया। यह फैसला उन्नाव रेप मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें पीड़िता की सुरक्षा और POCSO कानून के सख्ती से पालन पर जोर दिया गया है।