कर्नाटक की शृंगेरी सीट पर 2023 में जीतने वाले कांग्रेस उम्मीदवार टीडी राजेगौड़ा हैं। लेकिन हाल में दोबारा वोट काउंटिंग में बीजेपी उम्मीदवार को जीता बताया गया। राजेगौड़ा ने अपील की तो स्टे लग गया। अब वोट काउंटिंग वीडियो पेश करने को कहा गया।
SIR पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला
कर्नाटक की शृंगेरी सीट पर वोट काउंटिंग का वीडियो गायब होने पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक की शृंगेरी विधानसभा सीट पर 2023 के वोट गिनती का वीडियो रिकॉर्ड गायब होने का बहाना नहीं चलेगा। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर अगली तारीख तक रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया तो आयोग के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
कांग्रेस बनाम बीजेपी उम्मीदवार
मामला शृंगेरी सीट का है। 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार टीडी राजेगौड़ा ने बीजेपी उम्मीदवार डीएन जीवराज को 201 वोटों से हराया था। बाद में बीजेपी उम्मीदवार ने चुनाव याचिका दायर की। कर्नाटक हाईकोर्ट ने अप्रैल में पोस्टल बैलट की दोबारा गिनती और 279 खारिज किए गए पोस्टल बैलट की दोबारा जाँच का आदेश दिया। इसके बाद 3 मई 2026 को रिटर्निंग ऑफिसर ने संशोधित नतीजा जारी किया। इसमें राजेगौड़ा के वोट 255 कम बताए गए और जीवराज को विजेता घोषित कर दिया गया। राजेगौड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। मई में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि याचिका के लंबित रहने तक राजेगौड़ा ही विधायक बने रहेंगे।
अब जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने बुधवार को मामले की सुनवाई की। कांग्रेस विधायक राजेगौड़ा मूल वोट गिनती और हालिया दोबारा गिनती का ऑब्जर्वर रिपोर्ट तथा वीडियो रिकॉर्डिंग देखना चाहते हैं। जब कोर्ट ने चुनाव आयोग से ये दस्तावेज और वीडियो पेश करने को कहा तो आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि 2023 के वोट गिनती का वीडियो खोजने में असमर्थ हैं।
ECI से रिकॉर्ड कैसे खो गया: SC
इस पर कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कड़ी टिप्पणी की। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने कहा, "चुनाव आयोग यह कैसे कह सकता है कि उसका रिकॉर्ड खो गया है? आपका पूरा काम चुनाव कराना है और उसके दस्तावेज रखने हैं। ‘हम खोजने की कोशिश कर रहे हैं’ कहने का सवाल ही नहीं उठता। आपने चुने हुए उम्मीदवार को दे दिया। रिकॉर्ड की कोई कस्टडी नहीं है। जो भी है, अगली तारीख तक पेश करें। नहीं तो हम आपके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकालेंगे। हम इस तरह के कमजोर बहाने स्वीकार नहीं करेंगे।”
कोर्ट ने साफ कहा कि जो भी रिकॉर्ड उपलब्ध है उसे अगली सुनवाई तक पेश किया जाए। अन्यथा आयोग के खिलाफ प्रतिकूल राय बनाई जा सकती है। अगली सुनवाई के लिए 15 फरवरी 2027 की तारीख़ तय की गई।
279 खारिज डाक मतपत्रों की जांच का था आदेश
इस विवाद में डाक मतपत्र सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा हैं। डाक मतपत्र उन मतदाताओं के लिए मतदान का एक तरीका हैं, जो निर्धारित नियमों के तहत सामान्य मतदान केंद्र पर जाकर वोट नहीं डालते और डाक के जरिए अपना मत देते हैं। कर्नाटक हाईकोर्ट ने 6 अप्रैल को डाक मतपत्रों की दोबारा गिनती का आदेश दिया था। इसमें पहले खारिज किए गए 279 डाक मतपत्रों का फिर से सत्यापन भी शामिल था।
राजेगौड़ा का आरोप
राजेगौड़ा की दलील है कि हाईकोर्ट का आदेश इन 279 खारिज मतपत्रों की पुनः जांच तक सीमित था। उनके मुताबिक, रिटर्निंग ऑफिसर ने इसके बाद 562 वैध डाक मतपत्रों पर भी दोबारा विचार किया, जो पहले उनके पक्ष में गिने गए थे। राजेगौड़ा ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा है कि वैध घोषित किए जा चुके मतपत्रों की दोबारा जांच करने का अधिकार आदेश में नहीं दिया गया था।बीजेपी नेता पर डाक मतपत्रों से छेड़छाड़ का केस
इस विवाद का एक और पहलू डीएन जीवराज से जुड़ा आपराधिक मामला है। जीवराज के खिलाफ डाक मतपत्रों से छेड़छाड़ से संबंधित एक आपराधिक मामला भी दर्ज है। हालांकि, कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस साल मई में उनके खिलाफ चल रहे उस मामले पर रोक लगा दी थी।
यह मामला शृंगेरी सीट के चुनाव विवाद से जुड़ी परिस्थितियों के कारण चर्चा में है। लेकिन किसी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। मामले में आरोपों और कानूनी कार्रवाई की स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट में चल रही मौजूदा याचिका का प्रमुख मुद्दा मूल मतगणना के रिकॉर्ड, डाक मतपत्रों की दोबारा जांच और संशोधित चुनाव परिणाम की वैधता है।
चुनावी पारदर्शिता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
शृंगेरी सीट का विवाद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें चुनाव परिणाम दोबारा मतगणना के बाद बदल गया है और अब मूल मतगणना का वीडियो उपलब्ध होने पर सवाल उठ रहा है। चुनाव में इस्तेमाल किए गए मतपत्रों की गिनती और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखने के लिए रिकॉर्ड का सुरक्षित रहना और जरूरत पड़ने पर अदालत के सामने पेश किया जाना अहम है।इस मामले में अभी यह साबित नहीं हुआ है कि मतगणना का वीडियो जानबूझकर गायब किया गया या चुनाव प्रक्रिया में किसी ने गलत काम किया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी से यह साफ है कि वह रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के जवाब को सामान्य बात मानकर स्वीकार करने को तैयार नहीं है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2023 की मूल मतगणना का वीडियो कहां है और क्या उसे अगली सुनवाई तक अदालत के सामने पेश किया जा सकेगा। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट को यह भी तय करना है कि 279 खारिज डाक मतपत्रों की जांच के आदेश के बावजूद 562 वैध मतपत्रों पर दोबारा विचार करने की राजेगौड़ा की शिकायत में कितना दम है। इन सवालों के जवाब से शृंगेरी विधानसभा सीट के चुनाव विवाद की आगे की दिशा तय हो सकती है।