swatantra bhardwaj bjp links- दलित शख्स की पिटाई के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज ने जहां अपने बयान से पलट गया, वहीं उसके बीजेपी नेताओं और मंत्रियों के साथ फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। ये फोटो साधारण नहीं हैं जो लोग अक्सर नेताओं के साथ खिंचवा लेते हैं।
जंतर मंतर प्रोटेस्टरों पर हमला करने का आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर दलित छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार पर कथित हमले का मामला अब सिर्फ पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। आरोपी बताए जा रहे हिंदुत्ववादी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज के कई बीजेपी नेताओं और मंत्रियों के साथ फोटो सामने आने के बाद राजनीतिक संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और फैक्ट-चेकर मोहम्मद जुबैर समेत विपक्षी नेताओं ने सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों और वायरल वीडियो को साझा कर बीजेपी से जवाब मांगा है।
क्या है पूरा मामला?
जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को CJP के प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट हुई थी। निशु का आरोप है कि इस हमले में स्वतंत्र भारद्वाज भी शामिल था। मामले में पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया है। मामला तब अचानक राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बन गया जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वीडियो वायरल हुआ। इसमें वह कथित तौर पर संजय कुमार का सिर फोड़ने की बात करता सुनाई देता है और दावा करता है कि इसके बावजूद उसे जेल नहीं जाना पड़ा। वह यह भी कहता है कि उसे कपिल मिश्रा जैसे बड़े नेताओं का समर्थन है। वो पीएम मोदी के विपक्ष को दिमागी नक्सल कहने वाले बयान का जिक्र करता है। जिसमें मोदी दिमागी नक्सल को चुन चुन कर ठिकाने लगाने का आह्वान करते हैं।कपिल मिश्रा के फोन का दावा
सबसे गंभीर सवाल दिल्ली के मंत्री और बीजेपी नेता कपिल मिश्रा को लेकर उठा है। वायरल वीडियो में भारद्वाज कथित तौर पर कहता है कि कपिल मिश्रा उसके "बड़े भाई" हैं और यह दावा भी करता है कि कपिल मिश्रा के फोन के बाद उसे छोड़ दिया गया। कपिल मिश्रा ने इस कथित फोन कॉल या राजनीतिक संरक्षण के आरोप की पुष्टि नहीं की है। PTI के अनुसार उनसे प्रतिक्रिया मांगी गई थी, लेकिन रिपोर्ट प्रकाशित होने तक जवाब नहीं मिला था।चिराग पासवान और दूसरे नेताओं के साथ तस्वीरें
मामले को और राजनीतिक रंग इसलिए मिला है क्योंकि स्वतंत्र भारद्वाज की सोशल मीडिया गतिविधियों में बीजेपी और एनडीए से जुड़े कई प्रमुख नेताओं के साथ तस्वीरें सामने आई हैं। Alt News और अन्य रिपोर्टों ने विशेष रूप से केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के साथ उनकी तस्वीर का उल्लेख किया है। Alt News के अनुसार भारद्वाज ने 1 जुलाई को चिराग पासवान के साथ फोटो पोस्ट की थी। सोशल मीडिया पर सामने आई पोस्टों में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, कपिल मिश्रा, चिराग पासवान और अन्य बीजेपी नेताओं के साथ भारद्वाज की तस्वीरों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।स्वतंत्र भारद्वाज की सोशल मीडिया गतिविधियां भी सवालों में
यह विवाद केवल संजय कुमार पर कथित हमले तक सीमित नहीं है। जुलाई में CJP प्रदर्शन के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बेहद आक्रामक वीडियो पोस्ट किए थे। Alt News ने रिपोर्ट किया कि भारद्वाज ने प्रदर्शनकारियों को "आतंकवादी" और "कॉकरोच" कहने वाले वीडियो पोस्ट किए और खुद जैसे कट्टर सनातनियों को एक दिन के लिए दिल्ली पुलिस में शामिल किए जाने की मांग की। एक अन्य वीडियो में उसने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की अपील की। इन वीडियो में से कुछ को लाखों बार देखा गया। इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या पुलिस-प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान ऐसे सोशल मीडिया पोस्ट और उनके संभावित प्रभाव को गंभीरता से लिया था।पुलिस का क्या कहना है?
राजनीतिक संरक्षण के आरोपों पर दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट रूप से इनकार किया है। पुलिस के मुताबिक संजय कुमार को गंभीर या खोपड़ी में फ्रैक्चर जैसी चोट लगने की बात मेडिकल रिकॉर्ड से समर्थित नहीं है। पुलिस का कहना है कि उन्हें हाथ में पहने कड़े से सिर में चोट लगी और मेडिकल जांच में चोटें साधारण प्रकृति की बताई गईं। पुलिस के अनुसार मामले में FIR दर्ज की गई, स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार से पूछताछ की गई तथा उन्हें कानून के मुताबिक नोटिस दिए गए। पुलिस ने यह भी कहा कि मामले में चार्जशीट जल्द अदालत में दाखिल की जाएगी और किसी तरह के अनुचित राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप "तथ्यात्मक रूप से गलत" है। स्वतंत्र ने भी बदला अपना बयान
विवाद बढ़ने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज ने अपने पॉडकास्ट में कही बातों को लेकर सफाई दी है। बाद की रिपोर्टों के मुताबिक उसने कहा कि नेताओं के संरक्षण और कपिल मिश्रा के फोन से संबंधित उसकी बातें व्यंग्य/मजाक के तौर पर कही गई थीं और वह राजनीतिक प्रभाव के कारण नहीं बचा। इसलिए फिलहाल दो अलग-अलग दावे सामने हैं—एक तरफ स्वतंत्र का वायरल वीडियो और उसमें राजनीतिक पहुंच का दावा, दूसरी तरफ उसका बाद का स्पष्टीकरण और दिल्ली पुलिस का राजनीतिक हस्तक्षेप से इनकार।मुस्लिम महिलाओं के फोटो
स्वतंत्र भारद्वाज ने एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) के जरिए कुछ मुस्लिम महिलाओं के अपने साथ फोटो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला है। इनमें मुस्लिम महिलाओं को गलत तरह से पेश किया गया है। दो महिलाओं को उसकी गोद में बैठा दिखाया गया है। इन महिलाओं ने हिजाब लगाया हुआ है।
विपक्ष का सवाल- अगर संरक्षण नहीं था तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मामले में सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लिया। उन्होंने पूछा कि आरोपी खुलेआम क्यों घूम रहा है और क्या उसे राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। AAP नेता अरविंद केजरीवाल और TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी मामले को लेकर बीजेपी और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का मूल सवाल यह है कि अगर आरोपी ने स्वयं राजनीतिक पहुंच का दावा किया और उसके खिलाफ मामला दर्ज था, तो उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?ये फोटो साधारण नहीं हैं
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मंत्रियों या नेताओं के साथ कोई भी फोटो खिंचवा लेता है। लेकिन स्वतंत्र भारद्वाज के फोटो में खास बात है। फोटो खिंचवाने वाले नेता या मंत्री को भी मालूम था कि स्वतंत्र भारद्वाज कौन है। उनके फोटो में नाटकीयता नहीं कहीं नहीं है। इसी तरह सोशल मीडिया पर उसके कुछ वीडियो भी वायरल हैं। जो कथित राष्ट्रीय चैनलों के हैं। जिनमें नेशनल टीवी पर उसे डिबेट कार्यक्रमों में बुलाया गया है। यानी नोएडा के चैनल जानते थे कि स्वतंत्र भारद्वाज कौन है और वे उसे डिबेट में क्यों बुला रहे हैं।