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मणिपुर वायरल वीडियो की पीड़िताओं के परिजनों से मिलीं स्वाति मालीवाल 

दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने सोमवार को मणिपुर यौन हिंसा के वायरल वीडियो की पीड़िता दो महिलाओं के परिवार से मुकाकात की है। 19 जुलाई को घटना का वीडियो वायरल होने के बाद देश भर में लोग आक्रोशित हो गए थे। डीसीडब्ल्यू सदस्य वंदना सिंह के साथ मणिपुर का दौरा करने वाली मालीवाल ने वीडियो में एक महिला की मां और दूसरे के पति से मुलाकात की है। 
इस मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि पीड़ित गहरे सदमे में हैं। वे लगातार भयावह क्षणों को याद कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उनके परिवारों ने बताया कि आज तक न तो मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह और न ही किसी कैबिनेट मंत्री या राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे मुलाकात की है। 
उन्होंने कहा कि उन्हें अब तक सरकार से कोई परामर्श, कानूनी सहायता या मुआवजा नहीं मिला है। बातचीत में परिजनों ने बताया कि इस घटना में  किसी भी पुलिस अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 
डीसीडब्ल्यू प्रमुख स्वाति मालीवाल ने मोइरांग, चुराचांदपुर और इंफाल में स्थित राहत शिविरों का भी दौरा किया।मालीवाल ने आरोप लगाया है कि उन्हें मणिपुर में प्रवेश के लिए कोई सरकारी सहायता नहीं मिली। कहा कि वायरल वीडियो ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया और मैं हर कीमत पर बचे लोगों से मिलना चाहती थी। मुझे स्थानीय लोगों ने बताया कि यह बहुत मुश्किल है। फिर भी मैंने बिना किसी सुरक्षा के बावजूद वहां जाने का फैसला किया। किसी तरह से मैं उनसे मिलने में कामयाब रही, मालीवाल ने कहा है कि, यह जानकर बहुत दुख हुआ कि न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई सरकारी अधिकारी उन पीड़िताओ से मिले हैं। अब तक, सरकार द्वारा उन्हें कोई सहायता नहीं दी गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि महिलाओं को परामर्श, कानूनी सहायता और मुआवजा क्यों नहीं मिला है? 
इस मुलाकात के बाद स्वाति मालीवाल ने ट्विटर पर लिखा है कि , मणिपुर की जिन दो बेटियों के साथ बर्बरता की गई मैं उनके परिवारों से मिली। एक लड़की के पति ने फौजी रहते हुए देश की सीमाओं की रक्षा की। उन्होंने मुझे बोला कि अब तक उनसे मिलने तक कोई नहीं आया है, मैं उनके पास पहुंचने वाली पहली हूं। दूसरी लड़की की मां से भी मुलाक़ात हुई। जब मैं यहां बिना सुरक्षा पहुंच सकती हूं तो अब तक सीएम या बाक़ी प्रशासन क्यों नहीं आया ? 
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राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम अब मणिपुर पहुंची

राष्ट्रीय महिला आयोग की एक टीम मंगलवार को मणिपुर पहुंची। यह टीम यहां कुकी और मैतेई, समुदायों की उन महिलाओं से मिलेगी जिनका यहां जारी हिंसा के दौरान यौन उत्पीड़न हुआ है। 19 जुलाई को मणिपुर यौन हिंसा का वीडियो वायरल होने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम मणिपुर पहुंची है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद देश भर में विभिन्न लोगों द्वारा राष्ट्रीय महिला आयोग की आलोचना उसके कामकाज के रवैए को लेकर भी हुई थी। 
इस वायरल वीडियो में दिखा था कि एक भीड़ दो कुकी महिलाओं को निर्वस्त्र घुमा रही है।आरोप है कि इनमें से एक महिला के साथ गैंगरेप भी हुआ है। वायरल वीडियो में घटना 4 मई की ही है। आरोप है कि यौन हिंसा करने वाली यह भीड़ मैतेई समुदाय के लोगों की थी। 
मीडिया रिपोर्टो के मुताबिक ऐसे दावे सामने आएं हैं कि इस घटना की सूचना पत्र लिखकर राष्ट्रीय महिला आयोग को वीडियो वायरल होने से करीब एक माह पहले ही दी गई थी। इसके बावजूद तब आयोग की कोई टीम पीड़िताओं से मिलने नहीं गई थी। 
इन रिपोर्टो के मुताबिक न सिर्फ 4 मई की इस घटना बल्कि ऐसी ही कई घटनाओं के बारे में भी आयोग को पत्र लिखकर बताया गया था। जिसमें यौन उत्पीड़न, किडनैपिंग, मॉब लिंचिंग, और हत्या के भी कई मामले शामिल थे। वीडियो वायरल होने के बाद दावा किया गया था कि, दो लोगों ने 12 जून को ही आयोग को लिखे एक पत्र में बताया था कि वे मणिपुर जाकर आए हैं। मणिपुर में यौन उत्पीड़न और लिंग आधारित हिंसा की घटनाओं की ठीक तरह से रिपोर्टिंग नहीं हुई है। इन घटनाओं पर हर तरफ स्तब्ध करने वाली चुप्पी है। 
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मणिपुर के अधिकारियों से आयोग ने किया था संपर्क 

हालांकि इस तरह के दावे सामने आने के बाद इस संबंध में जवाब देते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने इस घटना की कोई भी रिपोर्ट मिलने से इंकार किया था और कहा कि वीडियो सामने आने के बाद उन्होंने शुक्रवार को इसका स्वत: संज्ञान लिया और अधिकारियों से मामले पर स्पष्टीकरण मांगा। 
पिछले दिनों उन्होंने कहा था कि, महिलाओं के मुद्दों के संबंध में  शिकायतें मिली हैं और इसके लिए मणिपुर में अधिकारियों से तीन बार संपर्क किया था लेकिन उनसे कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने राज्य के अधिकारियों को भेजे गए पत्र भी साझा किए थे। यह पत्र 18 मई, 29 मई और 19 जून को लिखे गए थे। रेखा शर्मा ने कहा था कि "हमें प्रामाणिकता की पुष्टि करनी थी। और यह भी कि शिकायतें मणिपुर से नहीं थीं, कुछ तो भारत से भी नहीं थीं। ऐसे में हमने अधिकारियों से संपर्क किया था लेकिन उनसे कोई प्रतिक्रिया हमें नहीं मिली।   
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क़मर वहीद नक़वी
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