ECI SIR meeting- तमाम विवादों के बाद चुनाव आयोग की शनिवार को तीनों आयुक्तों की मौजूदगी में पहली बैठक हुई। कई फैसले लिए गए। जहां SIR नहीं हुआ, वहां फॉर्म 6 पुराना वाला चलेगा। ECINET की समीक्षा होगी। अनमैप्ड मतदाताओं को नोटिस नहीं भेजा जायेगा। दिल्ली-महाराष्ट्र में तारीख बढ़ी।
केंद्रीय चुनाव आयोग की 26 सितंबर को बैठक हुई। जिसमें तीनों आयुक्त मौजूद थे
चुनाव आयोग में अंदरुनी असहमति, SIR को लेकर चिंता और बढ़ता राजनीतिक तूफान, इन सबके बीच चुनाव आयोग ने शनिवार 26 सितंबर को चुनाव आयोग ने अपनी बैठक की। बैठक में तीनों आयुक्त ज्ञानेश कुमार गुप्ता, सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी मौजूद थे। इसके बाद प्रेसनोट जारी हुआ। चुनाव आयोग इंडियन एक्सप्रेस में 23 सितंबर को प्रकाशित किसी भी तथ्य का खंडन नहीं कर पाया। उसने कहा कि मतभेद आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा हैं। उसने अपने प्रेस नोट में यह कहा कि एसआईआर प्रक्रिया पर सभी अंतिम निर्णय आमराय से लिए गए थे। बैठक में कुछ फैसले लिये गये और उन फैसलों पर इंडियन एक्सप्रेस के तथ्यात्मक रिपोर्ट का असर साफ दिख रहा है। हमले बता देते हैं कि क्या फैसले आज लिये गये, उनका मतलब क्या है और किस तरह चुनाव आयोग ने विवादित मुद्दों पर बचने की कोशिश की है।
चुनाव आयोग के शनिवार को लिये गये फैसले
SIR के दौरान नोटिस वाले लोगों के लिए सुविधा
चल रहे एसआईआर में अनमैप्ड और लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के कारण नोटिस जारी किए गए व्यक्तियों के घर ब्लॉक लेवल ऑफिसर (बीएलओ) जाएंगे।
फॉर्म 6 की घोषणा और नियम
जहां एसआईआर नहीं हुआ है, वहां पुराना वाला यानी 1960 से लागू फॉर्म 6 चलेगा। जहां एसआईआर हो रहा है, वहां सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक घोषणा के साथ फॉर्म 6 लागू रहेगा। यानी बताना पड़ेगा कि दादा-दादी का वोट 2002 की लिस्ट में था या नहीं, था तो कहां था, कहां पैदा हुए थे आदि-आदि।
ECINET सिस्टम की समीक्षा
ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर की समीक्षा के लिए चुनाव आयोग ने एक्सपर्ट की कमेटी बनाई है। क्या बदलाव होगा यह साफ नहीं है।
दिल्ली-महाराष्ट्र में तारीख बढ़ाई
दिल्ली और महाराष्ट्र में अभी एसआईआर चल रहा है। वहां दावों और आपत्तियों के लिए तारीख बढ़ा दी गई है। दिल्ली में 30 नवंबर और महाराष्ट्र में 10 नवंबर तक तारीख बढ़ाई गई है।
और भी कई बातें
चुनाव आयोग ने और भी बहुत कुछ कहा है। जिनके बारे में आगे विस्तार से बताया जायेगा।
सबसे महत्वपूर्ण फैसला उन लोगों को लेकर है जिन्हें SIR के दौरान अनमैप्ड या लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के आधार पर नोटिस जारी किए गए हैं। अब ऐसे लोगों को हर मामले में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यानी ERO या सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यानी AERO के दफ्तर में सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी। BLO संबंधित मतदाता के घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे और उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे। इसके बाद ERO उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर फैसला कर सकेंगे।
आयोग ने कहा है कि केवल असाधारण परिस्थितियों में ही ERO के निर्णय से व्यक्तिगत सुनवाई की जरूरत होगी और ऐसी सुनवाई भी प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन कराई जाएगी। मतदाता अपनी ओर से सुनवाई में शामिल होने के लिए परिवार के किसी वयस्क सदस्य को अधिकृत कर सकेगा। इसके लिए ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाओं को भी मजबूत करने का फैसला किया गया है। ECINet के नागरिक पोर्टल पर फिलहाल SIR-2026 के तहत नोटिस के जवाब में दस्तावेज जमा करने और Form 6 भरने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
गरीब, मजदूर और बेघर लोगों के लिए हेल्प डेस्क
आयोग ने कमजोर और वंचित वर्गों के मतदाताओं के लिए भी विशेष व्यवस्था करने का फैसला किया है। जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि रात के आश्रयों में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त संख्या में हेल्प डेस्क बनाए जाएं और विशेष शिविर लगाए जाएं। आयोग का कहना है कि SIR की प्रक्रिया में कोई पात्र मतदाता छूट न जाए, इसके लिए जिला और निर्वाचन स्तर के अधिकारियों को ऐसे वर्गों तक पहुंच बनानी होगी।
- यह साफ नहीं है कि जिन राज्यों में एसआईआर की वजह से ऐसे लोगों के नाम कट गये हैं, उन लाखों गरीब मजदूरों और बेघर लोगों का क्या होगा। क्या उनके नाम वापस जोड़ने के लिए मौका मिलेगा। क्योंकि यह घोषणा उन राज्यों के लिए है, जहां एसआईआर प्रक्रिया जारी है।
Form 6 को लेकर आयोग का स्पष्टीकरण
बैठक में Form 6 को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई। आयोग के अनुसार SIR के दौरान Form 6 से संबंधित घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। वहीं SIR की अवधि के बाहर मतदाता पंजीकरण के लिए Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित Form 6 और अन्य संबंधित फॉर्म लागू होंगे। इसका मतलब है कि SIR के दौरान इस्तेमाल होने वाली प्रक्रिया और सामान्य अवधि में मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया को अलग-अलग आधार पर देखा जाएगा।
- विपक्ष इसी को आपत्तिजनक मान रहा है। फॉर्म 6 में अलग से जोड़े गये घोषणापत्र की वजह से युवा यानी जेन ज़ी मतदाता जुड़ नहीं पा रहा है। यह हरकत 2024 से जारी है। इस बदलाव और घोषणापत्र को लेकर कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई।
ECINet की स्वतंत्र समीक्षा होगी
SIR से जुड़े विवादों में ECINet की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही है। आयोग ने अब ECINet सिस्टम की समीक्षा कराने का फैसला किया है। इसके लिए वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी। समिति में IIT या IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा। यह समिति यह देखेगी कि ECINet में इस्तेमाल किए जा रहे सिस्टम और प्रक्रियाएं संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।आयोग के अनुसार पिछले कुछ महीनों में विभिन्न राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से मिले सुझावों के आधार पर ECINet में कई बदलाव किए जा चुके हैं। फील्ड अधिकारियों की ओर से मांगी गई अन्य जरूरी सुविधाओं और लचीलेपन को भी लागू किया जाएगा। आयोग ने यह भी तय किया है कि भविष्य में IT मॉड्यूल और पोर्टल से संबंधित कोई भी नया महत्वपूर्ण कदम अधिकारियों की समिति यानी COO में चर्चा के बाद ही आयोग की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
- सबसे बड़ा सवालः क्या समीक्षा के बाद ईआरओ को उनका अधिकार वापस मिलेगा। ईसीआईनेट के ज़रिये नाम जोड़ने या हटाने क प्रक्रिया को सेंट्रलाइज्ड कर दिया गया है। जबकि वो पहले विकेंद्रीकृत (डीसेंट्रलाइज्ड) रही है।
दिल्ली और महाराष्ट्र में दावा-आपत्ति की समयसीमा बढ़ी
SIR प्रक्रिया के तहत मतदाताओं को राहत देते हुए आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में दावा और आपत्ति दाखिल करने की समयसीमा बढ़ा दी है। दिल्ली में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर दावा और आपत्ति दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। वहीं नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। महाराष्ट्र में दावा और आपत्ति दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 और नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026 कर दी गई है।आयोग की बैठकों का एजेंडा सभी सदस्यों को भेजे जायेंगे
आयोग ने अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर भी कुछ फैसले किए हैं। अब आयोग की बैठकों के एजेंडे पहले से सभी संबंधित सदस्यों को भेजे जाएंगे और बैठकों के मिनट्स भी जारी किए जाएंगे। इसके अलावा अधिकारियों की Annual Performance Appraisal Reports यानी APAR निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है। हर वर्ष 31 दिसंबर तक APAR प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है। अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए भी आयोग की पूर्व मंजूरी जरूरी होगी। आयोग के आयुक्तों द्वारा अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का सावधानीपूर्वक पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
- तथ्यः इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा था कि बैठक का एजेंडा सारे सदस्यों को न भेजा जाता था और न ही बैठक की सूचना पहले से भेजी जाती थी। अब इसे सुधारने की घोषणा आयोग ने की है।
ईआरओ के पास वोट बनवाने के लिए आवेदन करें
आयोग ने बैठक में यह भी बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है। आयोग के मुताबिक SIR के दौरान या उसके बाद जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, वे निरंतर मतदाता सूची अपडेट करने की प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO के पास आवेदन कर सकते हैं। इसमें युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाता भी शामिल हैं। CEO, DEO और ERO को ऐसे मतदाताओं के नाम शामिल कराने के लिए तत्काल विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
कैबिनेट सचिव को भेजे पत्र पर आयोग की सफाई
हाल के दिनों में निर्वाचन आयोग के भीतर अधिकारियों की भूमिका और कामकाज को लेकर उठे सवालों के बीच आयोग ने कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र पर भी स्पष्टीकरण दिया। आयोग के मुताबिक यह पत्र आयोग या उसके IT Division की किसी नीतिगत व्यवस्था से संबंधित नहीं था। पत्र का संबंध ECI में प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से था। आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी की ओर से जारी किया गया कार्य-पुनर्वितरण आदेश वास्तव में लागू नहीं हुआ, क्योंकि दो चुनाव आयुक्तों की ओर से जारी आदेशों के बाद उसे लागू नहीं किया गया था। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि IT Division पर वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की निगरानी कभी वापस नहीं ली गई।गोवा में 81 मतदाताओं ने Form 6 भरा
आयोग ने गोवा का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित BLO को छूटे हुए मतदाताओं के घर जाकर Form 6 जमा कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग के मुताबिक ऐसे 97 मतदाताओं में से 81 ने Form 6 भर दिया है। यह उदाहरण आयोग की उस व्यवस्था से जुड़ा है जिसके तहत SIR के दौरान छूटे पात्र मतदाताओं को बाद की निरंतर अपडेट प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में शामिल कराने की सुविधा दी जा रही है।बहरहाल, अब खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि BLO के जरिए दस्तावेज संग्रह, ERO के फैसले, ऑनलाइन सुनवाई और ECINet की प्रस्तावित स्वतंत्र समीक्षा जमीन पर किस तरह लागू होती है और छूटे हुए मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया कितनी प्रभावी रहती है।