टीएमसी से इस्तीफा देने वाली सांसद सुष्मिता देव ने असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात की है। उनके बीजेपी में जाने की चर्चा है। TMC MP Sushmita Dev met Assam CM Himanta Biswa Sarma. There is speculation about her joining BJP.
टीएमसी सांसद सुष्मिता देव ने असम के सीएम हिमंता से मुलाकात की
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में करारी शिकस्त के बाद से ही संकटों से जूझ रही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) को आज बुधवार एक और बहुत बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वाली राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुष्मिता देव ने टीएमसी से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राज्यसभा से भी इस्तीफा दिया था।
एक हफ्ते के भीतर तृणमूल कांग्रेस को लगा यह दूसरा बड़ा झटका है, जिसने पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
राज्यसभा से इस्तीफा देते हुए सुष्मिता ने क्या कहा
सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। अपने संक्षिप्त पत्र में उन्होंने लिखा: "मैं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे रही हूँ, जिसे कृपया तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाए। मैं अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग के लिए माननीय उपसभापति और राज्यसभा सचिवालय के सभी अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करती हूँ।"
हिमंता से मिलीं सुष्मिता, क्या बीजेपी में जा रही हैं
इस्तीफा देने के ठीक बाद दिल्ली में सुष्मिता देव की असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा से एक अहम मुलाकात हुई। इस मुलाकात के बाद एक वीडियो और तस्वीरें भी सामने आईं, जिसमें दोनों नेता हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत करते दिख रहे हैं। राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात के बाद यह चर्चा बेहद तेज हो गई है कि सुष्मिता देव बहुत जल्द भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकती हैं। सुष्मिता ने बाद में अपने बयान में कहा कि वो हिमंता के साथ मिलकर असम के विकास के लिए काम करेंगी। सुष्मिता ने हिमंता के कार्यशैली की तारीफ भी की।
गौरतलब है कि सुष्मिता देव और हिमंता बिस्व सरमा दोनों के राजनीतिक रास्ते अतीत में एक जैसे रहे हैं। दोनों ही पहले असम कांग्रेस के कद्दावर नेता हुआ करते थे। सुष्मिता देव असम के दिग्गज कांग्रेस नेता संतोष मोहन देव की बेटी हैं और 2021 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में शामिल हुई थीं।
टीएमसी में बगावत का सिलसिला अभी भी जारी
सुष्मिता देव का यह इस्तीफा ऐसे समय पर आया है जब ममता बनर्जी की पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखरती नजर आ रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिले प्रचंड बहुमत (207 सीटें) और शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही टीएमसी में अंदरूनी असंतोष चरम पर है।
टीएमसी के घटनाक्रम
सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा: सुष्मिता देव से ठीक दो दिन पहले, टीएमसी के बेहद वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने भी संसद और पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। सुखेंदु शेखर ने तो इस्तीफा देने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी पर तीखे हमले करते हुए उसे "चोरों और बलात्कारियों की पार्टी" तक कह दिया।
सांसदों और विधायकों की सामूहिक बगावत: टीएमसी में टूट केवल राज्यसभा तक सीमित नहीं है। लोकसभा में भी पार्टी के 20 सांसदों ने बगावत कर दी है। बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पुष्टि की है कि उन्होंने लोकसभा स्पीकर से अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है और वे पश्चिम बंगाल के विकास के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे। इन बागी सांसदों ने हाल ही में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से भी मुलाकात की है। दूसरी तरफ, विधानसभा में भी करीब 58 टीएमसी विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अलग गुट बनाने का दावा पेश किया है।
सीआईडी पहुंचीः सीआईडी के अधिकारियों ने मंगलवार 9 जून को ममता बनर्जी के आवास और अभिषेक बनर्जी के दफ्तर पर पहुंची थी। जबकि दोनों नेता उस समय दिल्ली में कांग्रेस की चेयरपर्सन सोनिया गांधी से मुलाकात कर रहे थे।
कभी राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष का चेहरा बनने की कोशिश करने वाली तृणमूल कांग्रेस आज अपने ही गढ़ में अस्तित्व बचाने के संकट से गुजर रही है। सुष्मिता देव का जाना ममता बनर्जी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत आवाज खोने जैसा है। यदि वे भाजपा में शामिल होती हैं, तो यह असम और पूर्वोत्तर में टीएमसी के विस्तार के सपनों पर पूरी तरह से पानी फेर देगा और संकट में घिरी ममता बनर्जी के लिए इस बगावत को संभालना अब और भी मुश्किल होने वाला है।