व्यापारिक तनाव के बावजूद गणतंत्र दिवस के मौके पर डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ ‘ऐतिहासिक रिश्ते’ की बात कही। इसके कूटनीतिक और रणनीतिक संकेत क्या हैं, पढ़िए रिपोर्ट।
पीएम मोदी और यूएस राष्ट्रपति ट्रंप (फाइल फोटो)
इंडिया-यूएस ट्रेड डील पर बने गतिरोध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर बधाई देते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक रिश्ते रहे हैं। ट्रंप ने दोनों देशों को दुनिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा लोकतंत्र वाला देश कहा। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार विवाद, टैरिफ और अन्य मुद्दों से रिश्ते तनावपूर्ण हैं।
ट्रंप ने अमेरिकी दूतावास के ज़रिए यह संदेश भेजा। उन्होंने कहा, 'अमेरिका के लोगों की ओर से मैं भारत सरकार और लोगों को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई देता हूं। अमेरिका और भारत दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्र वाले देश हैं, हमारे बीच ऐतिहासिक रिश्ता है।'
यह बयान तब आया है जब ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर 50% तक टैरिफ लगा दिए हैं। इसमें रूस से तेल खरीदने पर जुर्माने के तौर पर 25% अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार प्रभावित हुआ है। भारत ने इसका कड़ा विरोध किया है।
रुबियो ने रणनीतिक सहयोग पर जोर दिया
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी गणतंत्र दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा कि रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और नई तकनीकों में सहयोग बढ़ रहा है। अमेरिका, भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया वाले क्वाड के जरिए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अच्छे नतीजे मिल रहे हैं।
रुबियो ने लिखा, 'अमेरिका-भारत रिश्ता दोनों देशों और क्षेत्र के लिए फायदेमंद है। आने वाले साल में हमारे साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने का इंतजार है।'
यह दिखाता है कि अमेरिका रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में भारत के साथ मजबूत रिश्ते चाहता है, भले ही व्यापार में मतभेद हों।
अमेरिकी राजदूत हुए समारोह में शामिल
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुए। उन्होंने कहा, 'भारत को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं! पहली बार परेड में शामिल होना सम्मान की बात है। यह भारत के संविधान और लोकतांत्रिक भावना का जश्न है।' उन्होंने खुशी जताई कि परेड में अमेरिका में बने विमान ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और अपाचे हेलीकॉप्टर भारतीय आसमान में उड़ रहे थे। यह अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी की ताकत का प्रतीक है।
व्यापार और टैरिफ से तनाव
ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ लगाए। मुख्य वजह भारत का रूस से तेल खरीदना बताया गया। इससे व्यापार प्रभावित हुआ। दोनों देशों ने कई दौर की बातचीत की, लेकिन कृषि और डेयरी क्षेत्र में अमेरिका की मांगों के कारण कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ। इसके अलावा, भारत-पाकिस्तान संघर्ष खत्म करने का दावे के ट्रंप के पुराने बयान और अमेरिका की नई इमिग्रेशन नीतियों से भी रिश्ते पर असर पड़ा है।माना जा रहा है कि रक्षा और रणनीतिक स्तर पर सहयोग मजबूत है, लेकिन व्यापार विवाद रिश्तों को रीसेट करने में मुश्किल पैदा कर रहे हैं। फिर भी, ट्रंप और रुबियो के बयानों से लगता है कि अमेरिका भारत को अहम साझेदार मानता है। दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों पर एकजुट हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा में साथ काम करना चाहते हैं। आने वाले समय में बातचीत से इन मतभेदों को सुलझने की उम्मीद है। हाल में ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि इंडिया-यूएस ट्रेड डील जल्द हो सकता है।