भारतीय दल अमेरिका ट्रेड डील करने जाने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चंद दिनों पहले ईरान युद्ध के दौरान पीएम मोदी से 40 मिनट तक बात की थी। इन दोनों खबरों को भारतीय टीवी मीडिया ने जमकर उछाला था। लेकिन अब उन्हीं ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल पर एक ऐसा पत्र साझा किया है, जिसमें भारत और चीन को नर्क वाला देश बताया गया है। कांग्रेस इस घटनाक्रम पर भड़क गई है, उसने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक विवादास्पद पत्र को दोबारा पोस्ट किया है, जिसमें भारत, चीन और अन्य देशों को "हेलहोल" (नर्क जैसा देश) करार दिया गया है। इस पत्र में अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता (बर्थराइट सिटीजनशिप) की नीति पर तीखा हमला किया गया है।
पत्र में कहा गया है कि जन्मसिद्ध नागरिकता की वजह से अप्रवासी अमेरिका में आसानी से पैर जमाते हैं। पत्र के अनुसार, "यहां एक बच्चे का जन्म होते ही वह तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर वह अपने पूरे परिवार को चीन, भारत या दुनिया के किसी अन्य हेलहोल देश से यहां बुला लेता है।"
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कांग्रेस की कड़ी आपत्ति

कांग्रेस ने अपनी तत्काल प्रतिक्रिया में कहा है कि ये बात बेहद अपमानजनक है और भारत विरोधी है। हर भारतीय इससे आहत है। इस बात के लिए PM मोदी को अमेरिका के राष्ट्रपति से बात करनी चाहिए और कड़ी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए। हालांकि, जिस हिसाब का मोदी का ट्रैक-रिकॉर्ड रहा है, ऐसे में यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि मोदी, ट्रंप के आगे कुछ बोल पाएंगे। ट्रंप लगातार भारत के लिए अपमानजनक बातें करते हैं और मोदी चुपचाप सुनते हैं। नरेंद्र मोदी एक कमजोर प्रधानमंत्री हैं और इसका खामियाजा पूरा देश भुगत रहा है।
ट्रंप ने इस पत्र को दोबारा शेयर करते हुए जन्मसिद्ध नागरिकता के खिलाफ अपने पुराने रुख को दोहराया है। पत्र में दावा किया गया है कि यह नीति अप्रवासियों को देश में बसने का आसान रास्ता प्रदान करती है, जिससे अवैध इमीग्रेशन को बढ़ावा मिलता है। यह मूल पोस्ट अमेरिकी रेडियो होस्ट माइकल सैवेज की है। जिससे सहमति जताते हुए ट्रंप रीपोस्ट करते रहते हैं।
पत्र में जन्मसिद्ध नागरिकता का मुद्दा अदालतों के बजाय आम नागरिकों द्वारा तय किए जाने की वकालत की गई है। इसमें अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) और अन्य कानूनी संगठनों की आलोचना करते हुए कहा गया है कि ये संस्थाएं अवैध आप्रवासन को बढ़ावा देने वाली नीतियों को प्रभावित करती हैं, जिससे सार्वजनिक संसाधनों पर बोझ बढ़ता है।
पत्र में आगे दावा किया गया है कि अप्रवासी स्वास्थ्य सेवा और कल्याणकारी योजनाओं का दुरुपयोग करते हैं, खासकर कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में। इसमें सांस्कृतिक और आर्थिक चिंताओं से जोड़ते हुए कहा गया है कि ऐसी नीतियां अमेरिका की व्यवस्था को तनाव में डाल रही हैं। पत्र में ACLU और संबंधित संगठनों के खिलाफ RICO कानून (रैकेटियर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गनाइजेशंस एक्ट) के तहत कार्रवाई की मांग भी की गई है।
ट्रंप का यह कदम इमीग्रेशन और नागरिकता नीति पर उनकी सख्त लाइन को दर्शाता है। उन्होंने पहले भी जन्मसिद्ध नागरिकता को समाप्त करने या सीमित करने की वकालत की है। भारत और चीन जैसे देशों का "हेलहोल" शब्दों में जिक्र करने से यह पोस्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादास्पद हो गया है।
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भारत और चीन दोनों ही अमेरिका में बड़े संख्या में छात्र, पेशेवर और अप्रवासी भेजने वाले प्रमुख देश हैं। ट्रंप के इस बयान से दोनों देशों में नाराजगी की संभावना है, हालांकि अब तक दोनों सरकारों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह घटना अमेरिका में आप्रवासन नीति पर चल रहे गर्मागर्म बहस के बीच आई है, जहां ट्रंप प्रशासन अवैध आप्रवासन को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने पर जोर दे रहा है।