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कश्मीर में बच्चे हो रहे हैं हिंसा के शिकार, संयुक्त राष्ट्र ने कहा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि जम्मू-कश्मीर में बच्चे हथियारबंद गुटों और सरकार के बीच चल रही हिंसक झड़पों के शिकार हो रहे हैं। 
'बच्चों और सशस्त्र संघर्ष पर महासचिव की सालाना रपट' में कहा गया है कि हथियारबंद गुट और सेना के बीच चल रहे संघर्ष में बच्चों को सबसे ज़्यादा परेशानी हो रही है। इसमें कहा गया है कि झड़पों में बच्चे मारे जाते हैं। यह भी कहा गया है कि हथियारबंद गुट छोटे-छोटे बच्चों को अपने में शामिल कर  लेते हैं और सेना पर हमला करने के लिए उनका इस्तेमाल करते हैं। 
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रिपोर्ट में कहा गया है कि 14 साल की उम्र के 5 बच्चों को चरमपंथी गुटों ने शामिल किया जाता है। हिज़बुल मुजाहिदीन ने 2 और अंसार ग़ज़ावत-उल-हिन्द ने एक बच्चे को अपने गुट में शामिल कर लिया। इसके अलावा लश्कर-ए-तैयबा में दो बच्चे शामिल कर लिए गए, जिनमें से एक सेना के साथ मुठभेड़ में मारा गया।
रिपोर्ट में यह भी कहा है कि नक्सली भी बच्चों को अपने गुट में शामिल कर रहे हैं और उनका इस्तेमाल कर रहे हैं। 
संयुक्त राष्ट्र की इस सालाना रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के कठुआ बलात्कार कांड की भी चर्चा की गई है और कहा गया है कि 8 साल की बच्ची के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी गई। 
लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुतेरस ने भारत सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की तारीफ़ भी की है। उन्होंने कहा है कि सरकार न बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने का काम भी किया है। 
संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की प्रथम सचिव पौलमी त्रिपाठी ने इस मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती दी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट का विरोध करते हुए कहा है कि वहाँ कोई सशस्त्र संघर्ष नहीं चल रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को ख़तरा हो। उन्होंने इस तरह की बातों से असली मुद्दे गायब हो जाते हैं और पूरे मुद्दे का राजनीतिकरण होने लगता है। 
भारत ने कहा है कि आतंकवादी गुटों के समूह और दूसरे ग़ैर सरकारी तत्व (नॉन स्टेट एक्टर्स) अपनी नापाक हरक़तों और मक़सदों में इन बच्चों का बेजा इस्तेमाल करते हैं। कई मामलों में इन ग़ैर सरकारी तत्वों और सरकारी मशीनरी में मिलीभगत होती है।
कई मानवाधिकार संगठनों ने गुतेरस की यह कह कर आलोचना की है कि उन्होंने इस मामले में बच्चों के अधिकारों का हनन करने वालों की पहचान ठीक से नहीं की है। 
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब कश्मीर मुद्दे पर भारत को घेरने की कोशिश की जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने मध्यस्थता की पेशकश कर कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिश की है, जिसका भारत ने पुरजोर विरोध किया है। पाकिस्तान भी इस मुद्दे पर अपने मित्र देशों को यह समझाने की कोशिश कर रहा है कि कश्मीर में स्थिति बहुत ठीक नही है। यह ऐसे समय हो रहा है जब कश्मीर में भारत ने एक हफ़्ते के अंदर 38 हज़ार सैनिक भेज दिए। अब वहाँ मौजूद भारतीय सुरक्षा बलों के जवानों की तादाद लगभग 1.50 लाख हो गई है। इस स्थिति में संयुक्त राष्ट् की रिपोर्ट मे जम्मू-कश्मीर की चर्चा भारत के हित में नहीं है। देखना यह है कि भारत इस स्थिति से कैसे निपटता है। 
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