बजट 2026 को लेकर विपक्ष ने सरकार की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर तीखा हमला बोला है। आखिर विपक्ष इसे ‘खाली डब्बा’ क्यों कह रहा है?
मोदी सरकार के बजट से जिस तरह से शेयर बाज़ार लहूलुहान हुआ, उसी तरह से विपक्ष ने भी सरकार के 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' की बखिया उधेड़ दी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश केंद्रीय बजट 2026-27 को सरकार 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' बता रही है, लेकिन विपक्ष ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी, आरजेडी समेत सभी विपक्षी दल इसे 'खाली डब्बा' बता रहे हैं। उनका कहना है कि इसमें आम लोगों, किसानों, युवाओं, बेरोजगारी और महंगाई जैसी असली समस्याओं का कोई समाधान नहीं है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि वे कल संसद में अपनी बात रखेंगे। लेकिन एक्स पर उन्होंने लिखा, “बिना नौकरी वाले युवा। गिरता हुआ मैन्युफैक्चरिंग। निवेशक पूंजी निकाल रहे हैं। घरेलू बचत तेज़ी से गिर रही है। किसान परेशान हैं। वैश्विक झटके आने वाले हैं। सभी को नज़रअंदाज़ किया गया। एक ऐसा बजट जो सुधार करने से इनकार करता है, भारत के असली संकटों से अनजान है।'
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, “90 मिनट में ही साफ हो गया कि बजट उम्मीदों से काफी कमजोर है। यह फीका और निराश करने वाला है। भाषण पारदर्शी नहीं था, बड़ी योजनाओं के लिए कितना पैसा है, इसकी जानकारी नहीं दी गई।”
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने बजट को 'खाली डब्बा' करार दिया। उन्होंने कहा, 'उम्मीद थी कि सरकार पुराने वादों को नई पैकेजिंग में पेश करेगी, लेकिन इस बार तो पुराने वादों का जिक्र तक नहीं किया गया। बजट में जनता के लिए कोई ठोस राहत नहीं है और न ही इसमें महंगाई, बेरोजगारी या आम आदमी की समस्याओं का समाधान नजर आता है। यह बजट पूरी तरह से खोखले दावों से भरा हुआ है।'
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “मोदी सरकार के पास अब नए विचार नहीं बचे हैं। बजट भारत की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं का एक भी समाधान नहीं देता। मनरेगा की जगह आए नए कानून के लिए कितना पैसा रखा गया — इस पर एक शब्द भी क्यों नहीं बोला?”
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “बजट के आंकड़े खर्च कम करके पूरे किए गए हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, खेती, समाज कल्याण और एससी-एसटी-ओबीसी की योजनाओं में पैसा काटा गया। लोग गंदा पानी पीकर मर रहे हैं, लेकिन पानी की योजनाओं में पैसा घटा दिया। घाटा 4.4% दिखाया गया है। टैक्स से कम आमदनी अर्थव्यवस्था के धीमे होने का संकेत है।”
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने मजाकिया अंदाज में कहा, “इस बार का बजट वित्त मंत्री जी को भी नहीं समझ में आया होगा, तो जनता को क्या समझ आएगा।”
अखिलेश यादव: बजट सिर्फ 5% लोगों के लिए
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने बजट को 'निराशाजनक और गरीब के समझ से परे' बताया। उन्होंने कहा, “बजट ने किसानों, नौजवानों, व्यापारियों, महिलाओं को निराश किया। आम जनता के लिए कुछ नहीं है। शिक्षा की उपेक्षा हुई। बिना शिक्षा के विकसित भारत कैसे बनेगा? यह बजट सिर्फ सपने दिखाने वाला है।”
अखिलेश ने कहा, “भाजपा बजट से सिर्फ 5% लोगों को फायदा पहुंचाती है। किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई, महंगाई बढ़ रही है, रोजगार नहीं है। पर्यावरण की स्थिति भयावह है। गंगा और नदियों की सफाई नहीं हुई। उत्तर प्रदेश को एक भी एक्सप्रेस-वे नहीं मिला। बाजार धड़ाम गिरा, यह बजट का असर है।”
ममता बनर्जी: बंगाल को एक पैसा नहीं
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक्स पर लिखा, “बंगाल को एक पैसा भी नहीं दिया गया। GST से जो टैक्स वसूल रहे हैं, उसका पूरा हिस्सा नहीं दे रहे। हमें दो लाख करोड़ से ज्यादा मिलने चाहिए। सिर्फ शब्दों की बाजीगरी करते हैं, काम कम करते हैं।”
आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा, “बजट आय की असमानता और बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों पर चुप है। सिर्फ सतही उपाय और भारी शब्दावली।” आरजेडी प्रवक्ताओं ने कहा कि बिहार गायब है, किसान-खेती-रोजगार की बातें विलुप्त हैं।
योगेंद्र यादव: किसान विरोधी बजट
एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव ने बजट को किसान विरोधी बताया। उन्होंने कहा, “2026 का बजट एक साफ संदेश देता है: गाँव, किसान और खेती अब सरकार की प्राथमिकताओं से बाहर हैं। पहली बार ऐसा बजट, जिसमें किसान का नाम तक नहीं— न सिंचाई, न खाद, न खेतिहर मजदूर। यह चूक नहीं, राजनीतिक घोषणा है।”एक्सपर्ट्स और कॉर्पोरेट जगत का स्वागत
दूसरी तरफ़ बिजनेस लीडर्स ने बजट का स्वागत किया। FICCI की पूर्व अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा, “वित्तीय संतुलन पर आगे बढ़ेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च जारी रखना जरूरी है। GST सुधारों से मांग बढ़ी है, उसे बनाए रखने के लिए सिस्टम में पैसा डालना होगा।”
बायोकॉन की चेयरपर्सन किरण मजुमदार-शॉ ने कहा कि बजट ने बायोफार्मा को अग्रणी क्षेत्र बनाकर स्वास्थ्य और नवाचार में बड़ा निवेश किया है। पीबी फिनटेक के जॉइंट ग्रुप सीईओ सरबवीर सिंह ने कहा, “नए आयकर कानून से टैक्स व्यवस्था सरल होगी। वेतनभोगी और छोटे करदाताओं के लिए अनुपालन आसान बनेगा।”
कुल मिलाकर, बजट पर प्रतिक्रियाएं पूरी तरह बंटी हुई हैं। सरकार इसे ग्रोथ और रिफॉर्म का बजट बता रही है, जबकि विपक्ष इसे आम आदमी से दूर और निराशाजनक मान रहा है। अब आने वाले दिनों में संसद में बहस पर नज़र टिकी है।