केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मंगलवार को अपना इस्तीफ़ा दे दिया। उनको यह पद इसलिए छोड़ना पड़ा क्योंकि उनका राज्यसभा का 6 साल का कार्यकाल पूरा हो चुका था और बीजेपी ने उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए नामांकित नहीं किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनके इस्तीफे को मंजूर कर लिया है। 

बीजेपी ने कुरियन को 2024 में केंद्रीय मंत्री बनाया था। तब पार्टी के इस फ़ैसले को केरल में पैठ बढ़ाने के लिए ईसाई समुदाय तक पहुँचने की बीजेपी की कोशिश के तौर पर देखा गया था। 65 साल के जॉर्ज कुरियन केरल के कोट्टायम से हैं। मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों के बीच कुरियन का इस्तीफ़ा और रवनीत सिंह बिट्टू को भी राज्यसभा नहीं भेजे जाने से अब फेरबदल जल्द होने की संभावना और बढ़ गई है।
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जॉर्ज कुरियन और बीजेपी

बहरहाल, जॉर्ज कुरियन सीरो-मालाबार कैथोलिक चर्च से आते हैं, जो केरल की प्रमुख ईसाई चर्चों में से एक है। वह 1980 से बीजेपी के सदस्य हैं, जब पार्टी बनी थी। वह केरल बीजेपी इकाई के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वह प्रदेश महासचिव, भारतीय युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव और बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य भी रह चुके हैं। वह वकील हैं और टीवी डिबेट में अक्सर दिखते थे। वह प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के केरल दौरे पर उनके भाषणों का मलयालम में अनुवाद करते दिखते रहे थे।

2016 के केरल विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री ओम्मन चांडी के खिलाफ पुत्तुप्पल्ली सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्होंने ओ. राजगोपाल के विशेष सहायक के रूप में भी काम किया था।

क्यों देना पड़ा इस्तीफा?

जॉर्ज कुरियन मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद थे। इस बार बीजेपी ने मध्य प्रदेश से तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल को नामांकित किया। मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि जॉर्ज कुरियन को पहले से यह जानकारी नहीं दी गई थी कि उन्हें दोबारा टिकट नहीं मिलेगा। 4 जून को जब 11 उम्मीदवारों की सूची जारी हुई तब उन्हें यह पता चला। 

जॉर्ज कुरियन की यह स्थिति पूर्व अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी जैसी है, जिन्हें भी राज्यसभा टिकट नहीं मिलने के कारण इस्तीफा देना पड़ा था।

रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल भी ख़त्म

जॉर्ज कुरियन के अलावा रवनीत सिंह बिट्टू का कार्यकाल भी 21 जून को ख़त्म हो गया है। कुरियन मध्य प्रदेश से तो रवनीत सिंह बिट्टू राजस्थान से राज्यसभा सदस्य थे। कुरियन और बिट्टू दोनों को ही राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने नामांकन नहीं किया था।

2024 में लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस से तीन बाद सांसद रहे रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। 2024 में वह बीजेपी में शामिल हुए और उन्होंने पटियाला लोकसभ सीट से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्हें शिकस्त मिली। इसके बाद बीजेपी ने उन्हें राजस्थान से राज्यसभा सदस्य बनाकर संसद भेजा था और केंद्रीय मंत्री का पद दिया। वह खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और रेल मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
अब नियम यह है कि राज्यसभा सदस्यता ख़त्म होने के बाद भी मंत्री 6 महीने तक पद पर रह सकते हैं। लेकिन कुरियन का इस्तीफ़ा होने के बाद बिट्टू के भी मंत्री पद छोड़ने की संभावना है। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री पेट्रोलियम हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का भी नवंबर 2026 में टर्म ख़त्म होने वाला है। हालाँकि, इन दोनों नेताओं का टर्म ख़त्म होने में अभी क़रीब पाँच महीने का समय है।

तो क्या मोदी मंत्रिमंडल में जल्द होगा फेरबदल?

मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल के कयास काफी लंबे समय से लगाए जा रहे हैं। इन्हीं कयासों के बीच अब एक केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा हो गया गया है। इसके अलावा माना जा रहा है कि रवनीत सिंह बिट्टू को भी जल्द ही मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है।
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इसके अलावा भी कुछ मंत्रियों को पार्टी संगठन में जिम्मेदारियाँ दिए जाने से फेरबदल की अटकलें तेज हैं। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी की कमान सौंपी गई है।

फेरबदल में नए चेहरे, क्षेत्रीय संतुलन और परफॉर्मेंस पर फोकस हो सकता है। अभी कोई आधिकारिक घोषणा तो नहीं हुई है, लेकिन अब मंत्री के इस्तीफ़े के बाद जल्द फेरबदल की संभावना बढ़ गई है। फेरबदल की संभावना इसलिए भी है कि अगले कुछ महीनों में ही यूपी के साथ-साथ कई राज्यों में चुनाव भी होने हैं।