loader

घाटमपुर क्यों नहीं जाते नेता, गैंगरेप की शिकार लड़कियों के पिता ने भी जान दी

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में महिलाओं के यौन उत्पीड़न को भाजपा, सीपीएम ने राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया। भाजपा के नेता वहां अदालत का आदेश हासिल करने के बाद पहुंचे। भाजपा और अदालत की सक्रियता पर वहां आरोपी गिरफ्तार किए गए। यहां तक तो सब ठीक है। लेकिन उत्तर प्रदेश में इसी तरह की घटनाएं होने पर न तो सत्तारूढ़ भाजपा का दिल पसीजता है और न प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी का जमीर जागता है। यूपी में कानून व्यवस्था बिगड़ रही है लेकिन विपक्षी नेता ट्वीट करके अपना कर्तव्य पूरा कर रहे हैं। घाटमपुर की घटना दहलाने वाली है। जिन लड़कियों के शव घाटमपुर में एक पेड़ से लटके हुए मिले थे, उनमें से एक के पिता ने हमीरपुर जिले में अपने पैतृक गांव में एक पेड़ से लटककर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
सूत्रों का आरोप है कि आरोपी के परिजन लड़कियों के परिवार को धमका रहे हैं और केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। हालाँकि, पुलिस अभी तक इन आरोपों की पुष्टि नहीं कर पाई है। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और पिता के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। बता दें कि, हमीरपुर जिले के सिसोलर थाना क्षेत्र के एक गांव के रहने वाले दो परिवार कानपुर जिले के घाटमपुर में एक ईंट-भट्ठे पर काम करने गए थे।
ताजा ख़बरें
आरोप है कि फरवरी के अंतिम सप्ताह में भट्ठा ठेकेदार रामस्वरूप के बेटे रज्जू और भतीजे संजू ने दोनों लड़कियों को शराब पिलाकर गैंगरेप किया। उन्होंने उनका वीडियो भी बनाया और तस्वीरें भी लीं। बाद में, उन्होंने दोनों लड़कियों को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया, जिसके बाद 29 फरवरी को दोनों लड़कियों ने ईंट भट्ठे के पास एक पेड़ से लटककर जान दे दी।

भट्ठा ठेकेदार के परिवार वाले लड़कियों के परिवार पर मामले को रफा-दफा करने का दबाव बना रहे थे। लेकिन जब मामला पुलिस तक पहुंचा तो उन्होंने केस दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन गिरफ्तारी के बाद उन्होंने लड़कियों के परिवार पर फिर से दबाव बनाया, जिसका नतीजा यह निकला की एक लड़की के पिता ने भट्ठे के पास बबूल के पेड़ पर फांसी लगाकर जान दे दी। इस मामले को देश के अन्य हिस्सों में इस तरह की घटनाओं को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को ट्वीट करके उठाया।

राहुल गांधी का बयानराहुल गांधी ने गुरुवार को कहा- नरेंद्र मोदी की डबल इंजन सरकारों में हो रहे ‘डबल अन्याय’ को इन दो घटनाओं से समझिए! UP में दो बहनों ने अपने साथ हुए दुष्कर्म के बाद फांसी लगा ली, अब न्याय न मिलने और मुकदमा वापस लेने के दबाव पर उनके पिता को भी फांसी लगानी पड़ी। MP में एक महिला की इज़्ज़त सरेबाज़ार तार-तार हुई, जब गरीब पति ने न्याय की गुहार लगाई, तो सुनवाई न होने से निराश होकर वह अपने दोनों बच्चों के साथ फांसी पर झूल गया। डबल इंजन सरकार में न्याय मांगना गुनाह है। मित्र मीडिया द्वारा बड़ी मेहनत से गढ़ी गई झूठी छवि की रक्षा के लिए पीड़ित ही नहीं बल्कि उनके परिवारों तक से दुश्मन जैसा व्यवहार भाजपा शासित राज्यों में परंपरा बन चुकी है। भाजपा राज में हाथरस से लेकर उन्नाव और मंदसौर से लेकर पौड़ी तक महिलाओं के खिलाफ हुए अत्याचार के बाद उनके परिवारों को न्याय के लिए तरसाया गया। इस भयंकर अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाइए, वरना आज नहीं तो कल इस अत्याचार की आग आप तक भी पहुंचेगी।

कांग्रेस पार्टी ने भी अलग से ट्वीट करके घाटमपुर की घटना को उठाया। कांग्रेस का बयान देखिए-
यूपी के शाहजहांपुर में ताहिर नामक शख्स की पिकप वैन चोरी हो गई। उस पिकप में वो स्कूल बच्चों को पहुंचाते थे। उन्होंने तब तक इंश्योरेंस कंपनी मुआवजा नहीं देगी, पुलिस जब तक उनकी रिपोर्ट नहीं लिखेगी। ताहिर ने दर्जनों बार थाने का चक्कर लगाया। रिपोर्ट नहीं लिखी गई। ताहिर ने थाने पर जाकर आत्मदाह कर लिया। उनकी हालत अभी चिन्ताजनक बनी हुई है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करके इंसाफ की गुहार कर डाली। सपा यूपी की प्रमुख पार्टी है, लेकिन वो इस तरह की घटनाएं होने पर जनता की आवाज बनने से चूक जाती है। सपा की जिला यूनिट तक ने इन घटनाओं को उठाना उचित नहीं समझा। यूपी में कानून व्यवस्था की स्थिति बहुत बिगड़ती जा रही है लेकिन राजनीतिक दल खामोश बने हुए हैं।
देश से और खबरें
गैर भाजपा शासित राज्य में अपराध की छोटी घटना होने पर भी राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा फौरन पहुंच जाती है। संदेशखाली की घटना को लेकर तो उन्होंने राष्ट्रपति को ज्ञापन तक दिया और बंगाल में राष्ट्रपति शासन की मांग कर डाली। कांग्रेस आज भी यह आरोप लगाती है कि मणिपुर में तीन महिलाओं से भीड़ ने गैंगरेप करके उनकी नग्न परेड कराई लेकिन विपक्ष की मांग के बावजूद प्रधानमंत्री मणिपुर नहीं गए। घटना सामने आने के बाद वहां राहुल गांधी पहुंचे थे।  प्रधानमंत्री ने संदेशखाली की पीड़ित महिलाओं से मुलाकात की, उनके मामले को अपने भाषण का मुद्दा बनाया लेकिन ऐसा करने से वे मणिपुर के मामले में चूक गए थे। 
सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
क़मर वहीद नक़वी
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

देश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें