गैस और तेल संकट पर राहुल गांधी ने लोकसभा में हरदीप सिंह पुरी पर ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ होने का आरोप लगाया। बहस के दौरान जेफरी एपस्टीन का नाम आने पर हंगामा हुआ और फिर नारेबाजी हुई। जानें पूरा विवाद क्या है।
ओम बिरला, हरदीप पुरी और राहुल गांधी।
लोकसभा में फिर से संबोधन के दौरान राहुल गांधी का 'माइक' बंद कर दिया गया। राहुल गांधी ऊर्जा सुरक्षा पर बोल रहे थे। उन्होंने गैस-तेल की कमी की बात कही, भारत को रूस से तेल खरीद में अमेरिकी मंजूरी की ख़बरों का ज़िक्र किया और फिर कहा कि तेल मंत्री हरदीप पुरी कंप्रोमाइज्ड हैं क्योंकि एपस्टीन उनके दोस्त हैं। एपस्टीन का नाम लेते ही लोकसभा स्पीकर ने आपत्ति की कि वह मुद्दे से अलग नहीं बोल सकते हैं और फिर राहुल की आवाज़ संसद टीवी पर बंद हो गई। एपस्टीन का नाम आने पर सदन में हंगामा हो गया और 'एपस्टीन' से जुड़े नारे लगने लगे। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित करनी पड़ी।
इसकी शुरुआत तब हुई जब लोकसभा में गुरुवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अमेरिका द्वारा भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की छूट दिए जाने के मुद्दे पर सवाल उठाए और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर 'कॉम्प्रोमाइज्ड' होने का गंभीर आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि हर राष्ट्र की नींव उसकी ऊर्जा सुरक्षा होती है। उन्होंने कहा, 'अमेरिका को यह फ़ैसला करने की इजाजत देना कि हम किससे तेल खरीदें, गैस खरीदें या रूस से तेल खरीद सकते हैं या नहीं, यह हमारी संप्रभुता पर सवाल है। भारत जैसे बड़े देश को किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति से परमिशन क्यों लेनी पड़ रही है कि हम रूस से तेल खरीद सकते हैं या नहीं?'
राहुल ने एपस्टीन का नाम क्यों लिया?
राहुल ने आगे कहा कि यह सब 'कॉम्प्रोमाइज' होने की वजह से हो रहा है। राहुल गांधी ने सीधे हरदीप सिंह पुरी की ओर इशारा करते हुए कहा, 'यहां बैठे एक सज्जन हैं, जो तेल मंत्री हैं। उन्होंने खुद कहा है कि वे मिस्टर एपस्टीन के दोस्त हैं।' एपस्टीन का ज़िक्र आते ही सदन में हंगामा मच गया और कुछ सदस्यों ने नारे लगाए।राहुल गांधी ने और आरोप लगाते हुए कहा, 'मेरे पास एक दस्तावेज है जिसमें दिखता है कि उनकी (हरदीप सिंह पुरी की) बेटी को जॉर्ज सोरोस से पैसे मिले हैं।' इस बयान पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जोरदार विरोध किया और सदन में शोर बढ़ गया। स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी से कहा कि वे पहले दिए गए नोटिस के अनुसार ही बोलें और अनावश्यक विषयों पर न जाएं। उनका भाषण बीच में ही रोक दिया गया। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
हरदीप पुरी का जवाब
हरदीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि दुनिया में ऊर्जा का ऐसा संकट पहले कभी नहीं आया। उन्होंने बताया कि भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से पहले भारत का क़रीब 45% कच्चा तेल आता था, लेकिन प्रधानमंत्री की बेहतरीन कूटनीति की वजह से अब भारत ने उससे ज़्यादा मात्रा में तेल सुरक्षित कर लिया है जितना वह बाधित हुए होर्मुज स्ट्रेट से जितना तेल पाता।
एपस्टीन पर पुरी की सफाई
पुरी ने हालाँकि संसद में तो एपस्टीन पर कुछ नहीं बोला, लेकिन उन्होंने पहले एपस्टीन से जुड़े आरोपों पर सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि उन्होंने एपस्टीन से सिर्फ 3-4 बार मुलाकात की थी, वो भी अंतरराष्ट्रीय शांति संस्थान यानी आईपीआई के एक प्रतिनिधिमंडल के तौर पर, और यह सब 2017 से पहले की बात है जब वे मंत्री नहीं थे। उन्होंने कहा था कि ये मुलाक़ातें पूरी तरह पेशेवर थीं और एपस्टीन के अपराधों से कोई लेना-देना नहीं था।यह पूरा विवाद अमेरिका में जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों एपस्टीन फाइल्स के जारी होने के बाद शुरू हुआ, जिसमें कुछ भारतीय नामों का ज़िक्र है। कांग्रेस इसे सरकार की कमजोरी बता रही है, जबकि सरकार इसे राजनीतिक आरोप बताकर खारिज कर रही है।
'वापस लौटते' ही स्पीकर राहुल पर बरसे!
अपने ख़िलाफ़ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद पहली बार चेयर पर लौटे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी पर तंज कसा है। उन्होंने इशारों में ही कहा कि कुछ लोग मानते हैं कि लोकसभा में विपक्ष के नेता सदन से ऊपर हैं और वे किसी भी विषय पर बोल सकते हैं। लेकिन ऐसा कोई विशेष अधिकार किसी को नहीं है। सदन अपने नियमों से चलता है।यह बात ओम बिरला ने गुरुवार को कही जब वे लोकसभा स्पीकर के काम पर वापस लौटे। इससे पहले बुधवार को विपक्ष ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था, लेकिन वह सदन में वॉइस वोट से हार गया। यानी बहुमत से इसे खारिज कर दिया गया। ओम बिरला ने कहा कि वे हमेशा निष्पक्ष तरीक़े से सदन चलाने की कोशिश करते हैं। हर सांसद को बोलने का मौका देते हैं, लेकिन नियमों के अनुसार। उन्होंने जोर दिया कि प्रधानमंत्री और मंत्री भी सदन में बोलने के लिए नोटिस देते हैं। कोई भी व्यक्ति सदन से बड़ा नहीं है।
ओम बिरला की यह टिप्पणी राहुल गांधी पर सीधा इशारा लग रही है। कांग्रेस और विपक्ष पहले से आरोप लगा रहे थे कि स्पीकर राहुल गांधी को बोलने नहीं देते। फ़रवरी में पूर्व आर्मी चीफ़ एमएम नरवणे की किताब पर बोलते समय राहुल को रोका गया था, जिससे हंगामा हुआ। इसके बाद 8 कांग्रेस सांसदों को निलंबित किया गया। फिर विपक्ष ने 118 सांसदों के हस्ताक्षर से स्पीकर के खिलाफ नोटिस दिया था।
ओम बिरला ने माइक कंट्रोल के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि स्पीकर के पास कोई 'स्विच' नहीं है, जिससे माइक बंद-खोल सकें। माइक सिर्फ उस सांसद का ऑन होता है, जिसे बोलने की इजाजत मिली हो। जब विपक्ष के सदस्य चेयर पर बैठते हैं तो वे भी यह बात जानते हैं।