चीनी उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने के हालिया अमेरिकी फ़ैसले से कई सवाल खड़े हो गए हैं। इससे चीनी उत्पादों का अमेरिकी बाज़ार में टिकना लगभग नामुमकिन हो गया है। तो भारत को इससे नुक़सान होगा या फ़ायदा होगा? देखिए शीतल के सवाल में पूरी रिपोर्ट।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।






















