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राकेश टिकैत और अन्य किसान नेता शनिवार को भूपेंद्र सिंब हुड्डा के दिल्ली आवास पर

किसानों नेताओं से हुड्डा की मुलाकात के क्या मायने हैं 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से किसान नेता राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसान नेताओं की मुलाकात के कई मायने लगाए जा रहे हैं। ये मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब किसान नेताओं ने केंद्र सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया है। तीनों कृषि बिल वापस लेने के समय पीएम मोदी ने किसानों से कई वादे किए थे, लेकिन लंबा समय बीतने के बावजूद एक भी वादा पूरा नहीं किया गया है। 

कांग्रेस चिंतन शिविर में किसानों के मुद्दे पर विचार होना है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हुड्डा को किसान औऱ कृषि समिति का संयोजक बनाया है। कांग्रेस की इस समिति को चिंतन शिविर में कई प्रस्ताव पेश करने हैं। हुड्डा ने इसीलिए राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसान नेताओं को दिल्ली में अपने आवास पर आमंत्रित किया था, ताकि उनसे मिली सूचना के आधार पर प्रस्ताव तैयार किए जा सकें।

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किसान नेताओं ने कहा कि किसान एक वर्ष तक दिल्ली की सीमा पर बैठे रहे। लेकिन सरकार किसानों से बस वादे करती रही और उन्हे ंकुचलती रही। हम लोग जिस चौथे अध्यादेश की मांग कर रहे थे कि एमएसपी में सजा का भी प्रावधान हो। यानी अगर कोई व्यापारी पूरी एमएसपी न दे तो उसे सजा भी मिलना चाहिए। हुड्डा ने किसानों की इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि अगर कोई व्यापारी एमएसपी से कम कीमत पर अनाज खरीदता है तो उसे सजा का प्रावधान होना चाहिए।

What is the significance of Hooda's meeting with farmers' leaders? - Satya Hindi
किसान नेताओं की बातें सुनते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा (दाएं)

हुड्डा ने बताया कि किसानों की मूल चिन्ता अनाज की कम कीमत पर खरीदारी को लेकर है। किसानों का अनाज सरकार खरीदे या प्राइवेट कारोबारी, अगर वो एमएसपी से कम कीमत पर अनाज खरीदता है तो किसान कैसे सुरक्षित होगा। सरकार एमएसपी गारंटी कानून लाकर इस बिन्दु को भी उसमें शामिल करे। कम कीमत पर अनाज की खरीदारी पर किसान गारंटी चाहता है। किसानों की चिन्ता खाद्यान्न आयात-निर्यात नीति को लेकर भी है। 

बता दें कि किसानो का आंदोलन 378 दिनों तक चला था। मोदी सरकार ने 2020 में तीन कृषि कानून बनाए थे। 11 दिसंबर 2021 को जब पीएम मोदी ने तीनों कानून वापस लेने की घोषणा की तो उसके बाद केंद्र सरकार खुद खामोश हो गई, जबकि उस समय पीएम मोदी ने खुद कहा था कि किसानों की एक एक समस्या को सुलझाया जाएगा।

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