loader

बीजेपी से क्यों जुड़े थे उदयपुर में कन्हैया की हत्या के आरोपी?

उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल की हत्या के मुख्य आरोपी रियाज अटारी और मोहम्मद गौस ने हत्या को अंजाम देने से बहुत पहले बीजेपी नेताओं से संपर्क बना लिया था। उनके फोटो कई बीजेपी नेताओं के साथ पाए गए हैं। कांग्रेस ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरोपियों के फोटो बीजेपी नेताओं के साथ जारी भी कर दिए, लेकिन बीजेपी ने इस आरोप का खंडन किया है कि आरोपियों के संबंध बीजेपी से थे। बहरहाल, फोटो की वजह से बीजेपी को तमाम आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि बीजेपी ने भी फोटो के आधार पर विपक्षी नेताओं पर तमाम आरोप लगाए थे। जिसमें बीजेपी ने फोटो के आधार पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को टारगेट किया थाष
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हमलावरों के अतीत की गहराई में जाने से पता चलता है कि वे कम से कम तीन साल तक बीजेपी की राजस्थान इकाई में घुसने की कोशिश करते रहे।

ताजा ख़बरें
ऐसा प्रतीत होता है कि दो हत्यारों में से एक रियाज अटारी ने अपने वफादारों के माध्यम से बीजेपी के कार्यक्रमों में अपनी जगह बनाई है। इंडिया टुडे के खोजी पत्रकारों द्वारा एक्सेस किए गए दस्तावेजों में राजस्थान में बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के सदस्य इरशाद चैनवाला द्वारा 2019 में सऊदी अरब में उमरा से लौटने के बाद एक आरोपी का स्वागत करते हुए दिखाया गया है।
बीजेपी के साथ चैनवाला का अपना जुड़ाव एक दशक से भी ज्यादा पुराना है। इंडिया टुडे ने जब उनसे पूछताछ की तो उन्होंने माना कि रियाज उदयपुर में बीजेपी के कार्यक्रमों में शामिल होता था। चैनवाला ने याद किया कि हालांकि, उस व्यक्ति ने निजी बातचीत में बीजेपी की राजनीतिक विचारधारा पर हमला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 
इंडिया टुडे ने जब चैनवाला को फोटो दिखाया तो उन्होंने कहा - हाँ, यह मेरा है, फोटो दिखाए जाने पर बीजेपी नेता ने कहा। मैंने उसे माला पहनाई क्योंकि वह उमरा से वापस आया था। संवाददाता ने पूछा- क्या आरोपी बीजेपी के कार्यक्रमों में शामिल हुए था। चैनवाला ने जवाब दिया - हां, वो शामिल होता था। उसने गुलाब जी (बीजेपी नेता गुलाब चंद कटारिया) के कई कार्यक्रमों में शिरकत की। रियाज अक्सर उन इवेंट्स में बिन बुलाए ही नजर आता था। फिर उसने (आरोपी) कहा कि वह पार्टी के साथ काम करना चाहता है। लेकिन निजी तौर पर रियाज बीजेपी के कटु आलोचक था। चैनवाला के मुताबिक, वह दोस्तों से निजी बातचीत में पार्टी का कड़ा विरोध करता था।

रियाज अटारी मोहम्मद ताहिर नामक एक व्यक्ति के माध्यम से बीजेपी के कार्यक्रमों में शामिल हुआ, जिसे चैनवाला ने पार्टी कार्यकर्ता बताया। ताहिर रियाज के काफी करीब था। तस्वीरों में ताहिर और रियाज दोनों को एक साथ देखा जा सकता है।
इंडिया टुडे की जांच टीम सवीना पहुंची तो ताहिर कहीं नहीं मिला। पड़ोसियों ने कहा कि उसने वहां अपना किराए का घर खाली कर दिया था। ताहिर का मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ था।

इस बीच, उदयपुर के दर्जी कन्हैयालाल तेली पर हुए घातक हमले के दिन दो हत्यारों ने जिस मोटर-बाइक का इस्तेमाल किया, उसमें उनके कट्टरपंथी गुट से जुड़े होने के बारे में चौंकाने वाले सुराग थे। इसकी नंबर प्लेट, आरजे 27 एएस 2611, को मुंबई पर सबसे बड़े आतंकी हमले से जोड़ा गया था। 26 नवंबर, 2008 को भारत की आर्थिक राजधानी की घेराबंदी को 26/11 के नाम से जाना जाता है। 
देश से और खबरें

26/11 लाइसेंस प्लेट वाली बाइक रियाज के नाम पर रजिस्टर्ड थी और 2013 में खरीदी गई थी। जांचकर्ताओं को संदेह है कि उसने उदयपुर में तालिबान शैली की हत्या को अंजाम देने से पहले लगभग नौ वर्षों तक इस नंबर को ट्रॉफी के रूप में संजो कर रखा था।

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

देश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें