शी जिनपिंग ने नई दिल्ली में पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत में भारत-चीन से ब्रिक्स सहयोग को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया। इधर, PM ने द्विपक्षीय बातचीत में शी से कहा कि 'रिश्तों के विकास के लिए सीमा पर शांति ज़रूरी'।
प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग। (फाइल फोटो)
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत और चीन के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देश मिलकर ब्रिक्स सहयोग को मजबूत कर सकते हैं और एक-दूसरे की ताकत से सीखते हुए साझा विकास की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। PM ने द्विपक्षीय बातचीत में शी से कहा कि 'रिश्तों के विकास के लिए सीमा पर शांति ज़रूरी'। PM ने द्विपक्षीय बातचीत में शी से कहा कि 'रिश्तों के विकास के लिए सीमा पर शांति ज़रूरी'।
शी जिनपिंग ने कहा, 'मेरे जन्मदिन पर मुझे आपके गृहनगर आने का निमंत्रण मिला। हम 21 बार मिल चुके हैं और कई अहम सहमतियाँ बनी हैं। इन सहमतियों ने चीन-भारत संबंधों को लगातार विकास की राह पर आगे बढ़ाया है।' उन्होंने कहा, 'चीन ने हमेशा भारत के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखा और आगे बढ़ाया है। हालांकि हमारे दोनों देशों की राष्ट्रीय परिस्थितियां अलग-अलग हैं, फिर भी हम एक-दूसरे की खूबियों से पूरी तरह सीख सकते हैं, एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं, मिलकर सफलता हासिल कर सकते हैं और साझा विकास की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।'
उन्होंने आगे कहा, 'दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों और 'ग्लोबल साउथ' के महत्वपूर्ण सदस्यों के रूप में चीन और भारत की जिम्मेदारियां बहुत बड़ी हैं। दोनों पक्षों को मानवता के भविष्य और अपने लोगों की भलाई का ध्यान रखना चाहिए और प्रमुख देशों की भूमिका निभाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'हमें एक समान और व्यवस्थित बहुध्रुवीय दुनिया की वकालत करनी चाहिए, अपने हितों को ही प्राथमिकता नहीं देनी चाहिए और विश्व शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि में अधिक सकारात्मक योगदान देना चाहिए।'
प्रधानमंत्री मोदी ने दिया धन्यवाद
पीएम मोदी ने कहा, 'आपका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। ब्रिक्स समिट में आपकी सकारात्मक बातों के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन से मिले समर्थन और सहयोग के लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं। अब हमारे पास द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने का मौका है। एक बार फिर, भारत में आपका स्वागत है।'शी जिनपिंग और पीएम मोदी की यह मुलाकात बेहद खास है क्योंकि 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद यह पहली बार है जब चीनी राष्ट्रपति ने भारतीय जमीन पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की है।
दोनों नेताओं के बीच बातचीत तब हो रही है जब पिछले कुछ वर्षों के तनाव के बाद भारत और चीन अपने रिश्तों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं। इधर, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन की ओर से मिले सहयोग और समर्थन के लिए शी जिनपिंग का आभार जताया।
द्विपक्षीय बैठक की शुरुआत में शी जिनपिंग ने भारत और चीन के रिश्तों को लेकर दीर्घकालिक और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और ब्रिक्स को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे की ताक़त से सीख सकते हैं और साझा विकास के लिए साथ काम कर सकते हैं। उनके इस बयान को दोनों देशों के बीच पिछले छह वर्षों से चले आ रहे तनाव के बाद रिश्तों को स्थिर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालाँकि सीमा विवाद अभी भी पूरी तरह हल नहीं हुआ है और दोनों देशों के बीच कई रणनीतिक मतभेद बने हुए हैं।
गलवान के बाद पहली बड़ी द्विपक्षीय बैठक
शी जिनपिंग की भारत यात्रा करीब सात साल बाद हुई है। इससे पहले वह अक्टूबर 2019 में भारत आए थे। उस समय उन्होंने तमिलनाडु के मामल्लपुरम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ अनौपचारिक शिखर बैठक की थी। इसके कुछ ही महीनों बाद पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच तनाव बढ़ गया। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प ने दोनों देशों के संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
इसके बाद भारत और चीन के बीच लंबे समय तक सैन्य और कूटनीतिक बातचीत चलती रही। दोनों देशों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर सैनिकों के तनाव को कम करने और अलग-अलग क्षेत्रों में डिसइंगेजमेंट के लिए कई दौर की बातचीत की। भारत लगातार कहता रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता के बिना दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य नहीं बनाया जा सकता।
2024 के समझौते के बाद रिश्तों में आई नरमी
भारत और चीन के बीच अक्टूबर 2024 में पेट्रोलिंग व्यवस्था को लेकर हुए समझौते के बाद सीमा पर तनाव कम करने की दिशा में अहम क़दम उठा। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाक़ात रूस के कज़ान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी।हालाँकि, दोनों देशों के बीच क़रीब 3500 किलोमीटर लंबी सीमा का विवाद अभी भी पूरी तरह सुलझा नहीं है। सीमा के कई हिस्सों में दोनों देशों की सैन्य मौजूदगी बनी हुई है।
अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी विवाद
भारत-चीन संबंधों में अरुणाचल प्रदेश एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। चीन अरुणाचल प्रदेश पर दावा करता है और इसे ‘जंगनान’ या दक्षिणी तिब्बत कहता है। भारत चीन के इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है और अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा मानता है। हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में चीनी सैन्य गतिविधियों की खबरों ने इस विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है।
6 सितंबर को दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सेक्टर में पहली बार कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई। यह बैठक वाचा-दमाई बॉर्डर पर्सनेल मीटिंग पॉइंट पर हुई। इसके पहले ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताकसिंग क्षेत्र में चीनी सैन्य गतिविधियों और कथित घुसपैठ की खबरें सामने आई थीं।
सीमा विवाद के साथ व्यापार भी अहम मुद्दा
2020 के बाद राजनीतिक और सैन्य तनाव बढ़ने के बावजूद चीन भारत का सबसे बड़ा वस्तु व्यापार साझेदार बना हुआ है। 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 151 अरब डॉलर तक पहुंचा। इस दौरान भारत ने चीन से करीब 131 अरब डॉलर का सामान आयात किया, जबकि चीन को भारत का निर्यात करीब 19 अरब डॉलर रहा। यानी भारत को चीन के साथ करीब 112 अरब डॉलर का व्यापार घाटा रहा।भारत लंबे समय से चीन के बाजार में भारतीय कंपनियों के लिए ज्यादा पहुंच और व्यापार में संतुलन की मांग करता रहा है। नई दिल्ली मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक कलपुर्जों जैसे क्षेत्रों में चीन पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश भी कर रहा है। इसके बावजूद भारतीय उद्योग के कई हिस्सों में चीनी सामान और उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका बनी हुई है।
सीधी उड़ान और कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर शुरू
दोनों देशों के संबंधों में सुधार के संकेत केवल उच्चस्तरीय बातचीत तक सीमित नहीं हैं। भारत और चीन के बीच कुछ पुराने संपर्क भी फिर बहाल किए जा रहे हैं। पांच साल से अधिक समय के अंतराल के बाद दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें फिर शुरू हुई हैं। कुछ वीजा प्रक्रियाओं में भी राहत दी गई है। सीमा व्यापार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर शुरू करना भी शामिल है। इन कदमों को दोनों देशों के बीच सामान्य संबंध बहाल करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है।
सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर कूटनीतिक बातचीत भी जारी है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पिछले महीने बीजिंग में सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं बैठक की। बातचीत में सीमा पर शांति बनाए रखने और लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर चर्चा हुई। हालाँकि, सीमा विवाद का अंतिम समाधान अभी दूर दिखाई देता है। इसलिए दोनों देशों के लिए तत्काल प्राथमिकता सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना है।
ब्रिक्स और एससीओ में साथ, लेकिन कई मुद्दों पर मतभेद
भारत और चीन के बीच रिश्ते केवल सीमा विवाद से तय नहीं होते। दोनों देश ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन जैसे बहुपक्षीय मंचों पर एक साथ काम करते हैं। दोनों देशों के आर्थिक हित भी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। लेकिन इसके साथ ही सीमा विवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा और कई रणनीतिक मुद्दों पर दोनों के बीच मतभेद हैं। इसलिए भारत-चीन संबंधों को सहयोग और प्रतिस्पर्धा दोनों के मिश्रण के रूप में देखा जाता है।
ब्रिक्स में दोनों देशों का सहयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। शी जिनपिंग ने नई दिल्ली में इसी सहयोग को मजबूत करने के लिए भारत और चीन को मिलकर काम करने की जरूरत बताई।